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8 फसलों की खेती करने वाले किसानो को हरियाणा सरकार देगी 1000 रुपये प्रति एकड़, 25 अप्रैल तक करें आवेदन

हरियाणा के किसानों के लिए बड़ी खबर। फसल विविधिकरण योजना के तहत ढेंचा, मूंग व अन्य दलहन की बिजाई पर सरकार 1000 रुपये प्रति एकड़ का अनुदान दे रही है। सिरसा जिले में 50 हजार एकड़ का लक्ष्य रखा गया है। किसान 25 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
 
Haryana government dhaincha seed subsidy scheme for farmers - ढेंचा बीज अनुदान

चोपटा: फसल विविधिकरण राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत हरियाणा सरकार किसानों को हरी खाद के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसी कड़ी में जिला सिरसा में 50 हजार एकड़ में ढेंचा की बिजाई का लक्ष्य रखा गया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डा. सुखदेव सिंह ने बताया कि ढेंचा, दालों (मूंग, उड़द, लोबिया, मोठ, अरहर, सोयाबीन) और ग्वार की बिजाई पर किसानों को प्रति एकड़ 1000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा।

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को 25 अप्रैल 2026 तक ऑनलाइन आवेदन करना होगा। यह अंतिम तिथि पहले 15 अप्रैल थी, जिसे बढ़ाकर अब 25 अप्रैल कर दिया गया है। किसान फसलडॉटहरियाणाडॉटजीओवीडॉटइन पोर्टल पर अपना पंजीकरण कर सकते हैं।

 सिरसा को सबसे बड़ा लक्ष्य, 50 हजार एकड़ में होगी ढेंचा की खेती

पूरे हरियाणा में इस योजना के तहत 4.50 लाख एकड़ में हरी खाद, दलहन और ग्वार उगाने का लक्ष्य रखा गया है। सिरसा जिले को सबसे अधिक 50,000 एकड़ का लक्ष्य दिया गया है, उसके बाद फतेहाबाद (38,000), करनाल (37,000) और जींद (35,000) का स्थान है। किसान स्वयं खुले बाजार से बीज खरीद सकते हैं।

अनुदान राशि पाने के लिए किसानों को ये चरण पूरे करने होंगे:

  1. बाजार से ढेंचा, मूंग, उड़द, लोबिया, मोठ, अरहर, सोयाबीन या ग्वार का बीज खरीदें।
  2. अपने खेत में बिजाई करें।
  3. मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर बोए गए खेत की फोटो अपलोड करें।
  4. विभाग के अधिकारी खेतों में जाकर भौतिक सत्यापन करेंगे (16 अप्रैल से 15 मई के बीच)।

सत्यापन के बाद 1000 रुपये प्रति एकड़ की राशि डीबीटी के जरिए सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाएगी।

हरी खाद से मिट्टी की सेहत सुधरेगी, कम होगी रासायनिक खादों पर निर्भरता

ढेंचा एक हरी खाद वाली फसल है, जिसे खेत में पलटने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। डा. सुखदेव सिंह ने बताया कि हरी खाद के उपयोग से मृदा के स्वास्थ्य में जैविक, रासायनिक तथा भौतिक सुधार होता है और भूमि की जल धारण क्षमता भी बढ़ती है। इससे रासायनिक उर्वरकों जैसे यूरिया पर निर्भरता कम होगी और किसानों की लागत में कमी आएगी।

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गौरतलब है कि इससे पहले सरकार सीधे बीज उपलब्ध कराती थी, लेकिन इस बार नकद प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया है। किसान अधिकतम 10 एकड़ तक यानी कुल 10,000 रुपये तक का लाभ उठा सकते हैं।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे भूमि की उर्वरता शक्ति बढ़ाने के लिए इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। अधिक जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी खंड कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
 

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