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हरियाणा में बिना फार्मर आईडी के नहीं मिलेंगे इन 20+ सरकारी योजनाओं का लाभ, जाने कैसे बनाएं Farmer ID

हरियाणा सरकार ने एग्रीस्टैक योजना के तहत फार्मर आईडी सभी किसानों के लिए अनिवार्य कर दी है। अब पीएम-किसान, फसल बीमा और खाद सब्सिडी सहित तमाम योजनाओं के लिए यह आईडी जरूरी होगी। बिना आईडी के लाभ रुक सकता है। किसान hrfr.agristack.gov.in पर या गांव के कैंपों में मौके पर पंजीकरण करा सकते हैं।
 
हरियाणा एग्रीस्टैक फार्मर आईडी अनिवार्य, किसानों की डिजिटल पहचान अब जरूरी

फार्मर आईडी अब पीएम-किसान निधि, एमएसपी, फसल बीमा और खाद सब्सिडी के लिए अनिवार्य।

राज्य का लक्ष्य 1.38 करोड़ किसानों की डिजिटल आईडी बनाने का है।

ऑनलाइन आवेदन की वेबसाइट hrfr.agristack.gov.in है; गांवों में कैंप भी लग रहे हैं।

आईडी बनवाने के लिए आधार, भूमि दस्तावेज और परिवार पहचान पत्र जरूरी।
 

चंडीगढ़। हरियाणा में एग्रीस्टैक (AgriStack) योजना के तहत किसानों के लिए फार्मर आईडी बनाना अब अनिवार्य हो गया है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि बिना इस डिजिटल पहचान पत्र के किसानों को पीएम-किसान सम्मान निधि से लेकर फसल बीमा, खाद पर सब्सिडी और बैंक लोन जैसी अहम सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। यह नियम राज्य के सभी किसानों पर लागू होगा।

क्या है यह एग्रीस्टैक फार्मर आईडी?

एग्रीस्टैक फार्मर आईडी, जिसे ‘किसान पहचान पत्र’ भी कहा जा रहा है, केंद्र सरकार की उस डिजिटल कृषि पहल का हिस्सा है, जिसका मकसद देश के हर किसान की डिजिटल पहचान बनाना है। यह आईडी एक तरह से किसानों का ‘आधार कार्ड’ है, जिसमें उनकी जमीन, फसल, परिवार और बैंक खाते से जुड़ी तमाम जानकारी जुड़ी होती है। अब तक देशभर में साढ़े 7 करोड़ से ज्यादा किसान आईडी बन चुकी हैं, जबकि हरियाणा में 1.38 करोड़ किसानों को इस दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है।

आखिर क्यों जरूरी है यह आईडी?

हरियाणा सरकार की मानें तो इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचेगा। फिलहाल, ऐसी कई शिकायतें सामने आती हैं कि असली जरूरतमंद किसानों को योजनाओं का फायदा नहीं मिल पाता और कई बार फर्जी लाभार्थियों के हाथों यह पैसा चला जाता है। फार्मर आईडी से इस समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है।

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किन-किन योजनाओं के लिए होगी जरूरी?

राज्य सरकार ने करीब दो दर्जन से ज्यादा सरकारी योजनाओं के लिए फार्मर आईडी को अनिवार्य कर दिया है। इनमें पीएम-किसान सम्मान निधि (सालाना 6 हजार रुपये) प्रमुख है। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई), न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल बिक्री, खाद और बीज पर मिलने वाली सब्सिडी, किसान क्रेडिट कार्ड (केवाईसी), सोलर पैनल पर सब्सिडी, ट्रैक्टर सब्सिडी, प्राकृतिक खेती योजना, मेरी फसल मेरा ब्यौरा, पराली प्रबंधन योजना, मधुपालन योजना और बागवानी योजना जैसी तमाम सरकारी सुविधाओं के लिए अब फार्मर आईडी होना अनिवार्य होगा।

कैसे बनवाएं किसान आईडी?

फार्मर आईडी बनवाने के लिए किसानों को कहीं दूर-दराज भटकने की जरूरत नहीं है। इसके लिए दो तरीके हैं। पहला, किसान मोबाइल या कंप्यूटर से खुद ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। दूसरा, वे गांव में लगने वाले कैंपों में जाकर या फिर सीएससी सेंटर और सरल केंद्रों पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।

ऑनलाइन प्रक्रिया स्टेप बाय स्टेप:

  1. सबसे पहले हरियाणा फार्मर रजिस्ट्री (एग्रीस्टैक) की आधिकारिक वेबसाइट hrfr.agristack.gov.in पर जाना होगा।
  2. वेबसाइट पर ‘न्यू फार्मर रजिस्ट्रेशन’ के विकल्प पर क्लिक करना होगा।
  3. इसके बाद अपना आधार नंबर डालना होगा। पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा, जिसे डालकर ई-केवाईसी पूरी करनी होगी।
  4. आधार वेरिफिकेशन के बाद जमीन के कागजात और खेती से जुड़ी दूसरी जानकारी भरनी होगी।
  5. सारी जानकारी भरने के बाद फॉर्म सबमिट करना होगा। सबमिट करते ही एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिल जाएगा, जिसे ही फार्मर आईडी कहा जाएगा।

इसके अलावा, किसान अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर के जरिए ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (MFMB) पोर्टल पर भी पंजीकरण करवा सकते हैं, जहां से भी उन्हें अपना किसान पंजीकरण नंबर मिल जाएगा।

बिना आईडी के अटक सकती हैं योजनाओं की किस्तें

हरियाणा के कई जिलों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि अब तक किसानों की संख्या इसके प्रति जागरूक नहीं हुई है। उदाहरण के तौर पर फतेहाबाद जिले में 3.68 लाख किसानों का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक मात्र 32 हजार किसानों ने ही अपनी फार्मर आईडी बनवाई है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जिन किसानों की यह आईडी नहीं बनेगी, उनकी पीएम-किसान निधि से लेकर दूसरी योजनाओं की किस्तें आने वाले दिनों में अटक सकती हैं।

क्या दस्तावेज होंगे जरूरी?

फार्मर आईडी बनवाने के लिए किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज अपने पास रखने होंगे। इनमें आधार कार्ड (जो मोबाइल नंबर से लिंक हो), भूमि के मालिकाना हक के कागजात, हरियाणा परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) या फैमिली आईडी, बैंक खाते की पासबुक और पंजीकृत मोबाइल नंबर प्रमुख हैं।

केंद्र सरकार का क्या कहना है?

केंद्र सरकार का कहना है कि आगामी दिनों में देश की लगभग सभी कृषि योजनाएं इसी फार्मर आईडी से जोड़ दी जाएंगी। इस डिजिटल सिस्टम से न सिर्फ फर्जी लाभार्थियों पर लगाम लगेगी, बल्कि सरकार को भी पता चल सकेगा कि किस किसान ने कितने रकबे में कौन सी फसल बोई है, जिससे उचित दामों पर फसल खरीदी जा सकेगी।
 

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