हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: बंद ट्यूबवेल की जमीन अब किसानों को मिलेगी वापस
चण्डीगढ़: हरियाणा सरकार ने प्रदेश के हजारों किसानों को बड़ी राहत देते हुए उन जमीनों को वापस करने का निर्णय लिया है, जो दशकों पहले सरकारी ट्यूबवेल लगाने के लिए ली गई थीं, लेकिन अब बेकार पड़ी हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के इस फैसले के तहत, सिंचाई विभाग और पंचायत विभाग की संयुक्त टीमें प्रदेशभर में इन जमीनों का सर्वे कर रही हैं।
यह कदम मुख्यमंत्री नायब सैनी के वित्त वर्ष 2026-27 के बजट भाषण में की गई घोषणा के बाद उठाया गया है। बजट पूर्व चर्चाओं के दौरान विभिन्न किसान यूनियनों ने यह मुद्दा उठाया था कि सरकारी विभागों के पास गांवों में ऐसी कई छोटी-बड़ी जमीनें हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं हो रहा है, जबकि ये जमीनें किसानों के खेतों के बीच में या किनारे पर होने के कारण उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं।
दरअसल, पिछले कई दशकों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसानों से सरकारी ट्यूबवेल लगाने के लिए जमीनें ली गई थीं। लेकिन समय के साथ, तकनीकी खामियों या भू-जल स्तर में भारी गिरावट के कारण इनमें से कई ट्यूबवेल बेकार हो चुके हैं और उन पर ली गई जमीनें भी अनुपयोगी पड़ी हैं। इस फैसले से न केवल किसानों को उनकी पैतृक जमीन का हिस्सा वापस मिलेगा, बल्कि खेती के रकबे में भी बढ़ोत्तरी होगी।
जमीन वापसी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने एक स्पष्ट फॉर्मूला तय किया है। जब ये जमीनें अधिग्रहित की गई थीं, तब भू-स्वामियों को सरकारी मुआवजा दिया जा चुका है। अब नियमों के अनुसार, जो किसान अपनी जमीन वापस लेना चाहते हैं, उन्हें मौजूदा 'कलेक्ट्रेट रेट' (जिला दर) के हिसाब से सरकार को भुगतान करना होगा। इसके बाद ही मालिकाना हक का हस्तांतरण किया जाएगा। सिंचाई विभाग ने सभी जिला उपायुक्तों को पत्र लिखकर इस सर्वे में सहयोग करने का आग्रह किया है।
सूत्रों के अनुसार, जिन जमीनों का पांच साल से अधिक समय से उपयोग नहीं हुआ है, उन्हें वापस करने की प्राथमिकता होगी, जो कि भू-अधिग्रहण कानून 2013 की धारा 101 के तहत एक कानूनी प्रावधान भी है। सरकार जल्द ही इस प्रक्रिया के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू कर सकती है, ताकि किसान आसानी से आवेदन कर सकें।
