हरियाणा के किसानों को बड़ी सौगात: सरकार इन किसानों को देगी 10000 रुपये प्रति एकड़
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को विधानसभा में बड़ा ऐलान करते हुए प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को अगले 5 साल तक 10 हजार रुपये प्रति एकड़ सालाना अनुदान देने की घोषणा की, जिससे प्रदेश के किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई।
दरअसल, राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की हैं। जैविक-प्राकृतिक खेती प्रमाणीकरण के लिए हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी को एक समर्पित प्रमाणीकरण संस्था के रूप में स्थापित किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत जो किसान एपीडा से प्रमाणित होंगे, उन्हें ही यह अनुदान राशि सीधे मिलेगी। सीएम सैनी ने 2026-27 के लिए 8,320 करोड़ रुपये का कृषि बजट पेश किया, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान 7,651 करोड़ रुपये से अधिक है। हरियाणा में प्राकृतिक खेती योजना 2022 में शुरू हुई थी और अब तक राज्य के प्राकृतिक खेती पोर्टल पर 31,873 एकड़ में खेती के लिए 19,723 किसानों ने अपना सत्यापन करवाया है, जबकि 12 हजार से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
विधानसभा में आयोजित प्राकृतिक खेती पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री @NayabSainiBJP का बयान-
— DPR Haryana (@DiprHaryana) March 18, 2026
हरियाणा एक कृषि प्रधान प्रदेश है और प्राकृतिक खेती का मॉडल किसानों के लिए एक नई दिशा प्रस्तुत करता है।
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्रयासों से गुरुकुल,… pic.twitter.com/sFekSWvGeu
सीएम सैनी गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत की उपस्थिति में विधायकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, "प्राकृतिक खेती कुछ विषय ऐसे होते हैं जो दलगत राजनीति से ऊपर होते हैं। हम सभी का दायित्व है कि किसानों को इसके प्रति जागरूक करें।" सीएम ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत की सराहना करते हुए कहा कि उनके गुरुकुल कुरुक्षेत्र में 180 एकड़ भूमि पर केवल गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार जीवामृत, घनामृत और बीजामृत से खेती होती है। उन्होंने यह भी चेताया कि आज किसान पेस्टीसाइड, यूरिया और रासायनिक खाद का अत्यधिक उपयोग कर रहे हैं, जिससे न सिर्फ वातावरण प्रदूषित होता है बल्कि स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
हरियाणा के इस बजट में फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती, डेयरी और कृषि बिजली आपूर्ति जैसे क्षेत्रों पर फोकस करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का रोडमैप पेश किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रासायनिक खेती से जमीन की उर्वरा शक्ति तेजी से घट रही है और यदि किसान अभी नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियों को बंजर खेत विरासत में मिलेंगे। सरकार की यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कारगर होगी, बल्कि हरियाणा की मिट्टी और स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रखेगी।
