हरियाणा में पराली जलाने वालों पर होगी सख्त निगरानी, गांव-गांव में नियुक्त किए गए 8,535नोडल अधिकारी
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने और किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में गांव स्तर पर 8,535 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। इसके साथ ही सभी जिलों में विशेष ‘पराली सुरक्षा बल’ का गठन किया गया है, ताकि पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।
हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक, कृषि उपकरणों और आर्थिक प्रोत्साहन के माध्यम से पराली प्रबंधन के लिए लगातार जागरूक कर रही है। सरकार का उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और भूमि की उर्वरता बनाए रखना है।
केंद्रीय मंत्रियों ने हरियाणा सरकार के प्रयासों को सराहा
कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने यह जानकारी केंद्र सरकार द्वारा आयोजित फसल अवशेष जलाने के प्रबंधन से संबंधित मंत्रिस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक में दी। उन्होंने चंडीगढ़ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में हरियाणा का पक्ष रखा।
हरियाणा सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान तथा केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने भी सराहना की।
दिल्ली में आयोजित इस बैठक में दोनों केंद्रीय मंत्रियों के अलावा हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के कृषि मंत्री भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने-अपने राज्यों से जुड़े थे।
इस अवसर पर कृषि विभाग के निदेशक श्री अमित खत्री और अतिरिक्त निदेशक श्री प्रदीप मील भी उपस्थित रहे।
पराली प्रबंधन के लिए 440 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि निर्धारित
कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश के खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कुल 66,050 आधुनिक मशीनें उपलब्ध करवाई गई हैं। इन मशीनों की मदद से किसान पराली को जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 37 लाख एकड़ क्षेत्र में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कुल 440 करोड़ रुपये की अनुमानित प्रोत्साहन राशि निर्धारित की गई है। इसके तहत किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
सरकार किसानों को पराली प्रबंधन के आधुनिक विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि फसल अवशेषों का उपयोग कृषि में किया जा सके और पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।
धान की सीधी बिजाई पर 4,500 रुपये प्रति एकड़ का प्रोत्साहन
श्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और जल बचत को बढ़ावा देने के लिए धान की सीधी बिजाई (DSR) अपनाने वाले किसानों को 4,500 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
इसके अलावा, धान की फसल के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसलों की बिजाई यानी फसल विविधीकरण अपनाने वाले किसानों को 8,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये प्रति एकड़ तक प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने के बजाय सरकार की योजनाओं का लाभ उठाएं और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।
ड्रोन से होगी खेतों की निगरानी, 30 अतिरिक्त ड्रोन भी होंगे तैनात
पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया है। कृषि मंत्री ने बताया कि खेतों की निगरानी के लिए वर्तमान में 20 ड्रोन तैनात किए जा चुके हैं। जल्द ही 30 अतिरिक्त ड्रोन भी तैनात किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरे प्रदेश में 79 पीएम 2.5 सेंसर स्थापित किए गए हैं। गांव स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और जिलों में पराली सुरक्षा बल के गठन से निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा रहा है।
सरकार का प्रयास है कि पराली जलाने की घटनाओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके और किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के बेहतर विकल्प उपलब्ध करवाए जाएं।
पराली जलाने की घटनाओं पर सख्ती, नियमों के अनुसार कार्रवाई
कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य में सख्त नियमों और जागरूकता अभियान के चलते फसल अवशेष जलाने की केवल 7 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें हिसार जिले में दर्ज एक घटना दुर्घटनावश हुई थी, जिसके संबंध में नियमानुसार 5,000 रुपये का चालान जारी किया गया। बाकी घटनाएं गैर-कृषि क्षेत्र में हुई हैं।
सरकार का कहना है कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी के साथ-साथ किसानों को जागरूक करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से गांव स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है।
केंद्र सरकार से 60 प्रतिशत आर्थिक सहायता देने की मांग
कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने केंद्र सरकार से मांग की कि हरियाणा सरकार द्वारा पराली प्रबंधन के तहत किसानों को दी जा रही 1,200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि में केंद्र सरकार को 60 प्रतिशत हिस्सा वहन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे राज्य सरकार पर आर्थिक बोझ कम होगा और अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ने में मदद मिलेगी। किसानों को पर्याप्त प्रोत्साहन मिलने से वे पराली जलाने के बजाय उसके उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित होंगे।
किसानों से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग की अपील
कृषि मंत्री ने प्रदेश के सभी किसान भाइयों से अपील की कि वे पराली में आग लगाने के बजाय सरकार की योजनाओं, प्रोत्साहन राशि और कृषि उपकरणों का अधिकतम लाभ उठाएं।
उन्होंने कहा कि पराली का उचित प्रबंधन करने से पर्यावरण को स्वच्छ रखने, वायु प्रदूषण कम करने और भूमि की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है। किसानों का सहयोग ही पराली जलाने की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

