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मूंगफली के बाद खाली खेत न छोड़ें, हरियाणा के किसान सितंबर में इन फसलों से ले सकते हैं अतिरिक्त कमाई

 
मूंगफली के बाद खेत खाली है? सितंबर में ये फसलें बन सकती हैं कमाई का नया मौका

सिरसा। ग्रीष्मकालीन मूंगफली की खुदाई के बाद अगस्त के आखिरी सप्ताह में खाली होने वाले खेतों में किसान सितंबर के दौरान कम अवधि वाली सब्जियों की खेती कर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों की सिफारिशों के अनुसार मूली, पालक, फूलगोभी और ब्रोकली जैसी फसलें इस अवधि में विकल्प बन सकती हैं। हालांकि फसल का चयन करते समय मिट्टी में नमी, जल निकासी, स्थानीय मौसम, मंडी की मांग और आगामी रबी फसल की बुवाई का समय जरूर ध्यान में रखना चाहिए।

हरियाणा में अगस्त के आखिर तक बाजरा और ग्वार जैसी सामान्य खरीफ फसलों की बुवाई का उपयुक्त समय अधिकांश क्षेत्रों में निकल चुका होता है। ऐसे में मूंगफली की खुदाई के बाद खाली खेत में कम अवधि वाली सब्जियां लगाना किसानों के लिए एक विकल्प हो सकता है।

सितंबर में मूली की बुवाई का विकल्प

मूंगफली की खुदाई के बाद किसान सितंबर में मूली की बुवाई कर सकते हैं। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान में पंजाब सफेद किस्म को सितंबर के दूसरे सप्ताह और हिसार सिलेक्शन-1 को सितंबर के अंतिम सप्ताह में बोने पर बेहतर परिणाम दर्ज किए गए हैं।

मूली कम अवधि में तैयार होने वाली फसल है। सामान्य परिस्थितियों में शुरुआती उपज करीब 45 दिन में मिल सकती है। इससे किसान रबी की मुख्य फसल से पहले खेत का उपयोग कर सकते हैं।

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पालक भी कम समय में तैयार

सितंबर में पालक की खेती भी किसानों के लिए विकल्प हो सकती है। सामान्य सब्जी उत्पादन सिफारिशों के अनुसार सितंबर-अक्टूबर में पालक की बुवाई की जा सकती है और करीब 30 दिन में पहली कटाई शुरू हो सकती है।

जिन किसानों के पास स्थानीय बाजार, शहर या सब्जी मंडी तक आसान पहुंच है, उनके लिए पालक अपेक्षाकृत कम अवधि वाली फसल के रूप में उपयोगी हो सकती है।

फूलगोभी और ब्रोकली भी विकल्प

मूंगफली की खुदाई के बाद अगस्त-सितंबर में फूलगोभी की कुछ किस्मों की रोपाई का समय भी रहता है। किसान तैयार पौधों की रोपाई कर खाली खेत का उपयोग कर सकते हैं।

वहीं बेहतर बाजार उपलब्धता वाले किसान ब्रोकली पर भी विचार कर सकते हैं। इसकी उपयुक्त बुवाई/रोपाई अवधि मध्य अगस्त से मध्य सितंबर तक बताई जाती है और सामान्य तौर पर फसल करीब 72 दिन में तैयार हो सकती है। हालांकि ब्रोकली लगाने से पहले स्थानीय बाजार में मांग और संभावित भाव की जानकारी लेना जरूरी है।

खेत में पानी खड़ा है तो पहले निकासी करें

मूंगफली की खुदाई के तुरंत बाद खेत में पानी जमा होने की स्थिति में किसान जल्दबाजी में अगली फसल की बुवाई न करें। पहले खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी जरूरी है। मिट्टी के काम करने योग्य स्थिति में आने के बाद ही खेत की तैयारी करें।

खासकर सब्जी वाली फसलों में जल निकासी का बेहतर प्रबंध जरूरी है। लगातार पानी खड़ा रहने से पौधों और जड़ों को नुकसान हो सकता है।

रबी फसल का भी रखें ध्यान

किसानों को मूंगफली के बाद फसल चुनते समय आगामी रबी सीजन का हिसाब भी रखना चाहिए। जो किसान अक्टूबर में सरसों की समय पर बुवाई करना चाहते हैं, उन्हें ऐसी कम अवधि वाली फसल चुननी चाहिए जो समय पर खेत खाली कर दे।

मूली और पालक जैसी फसलें कम अवधि में पहली उपज दे सकती हैं, जबकि फूलगोभी और ब्रोकली में अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है। इसलिए पूरे खेत में एक ही फसल लगाने के बजाय किसान बाजार और अपनी अगली फसल को ध्यान में रखकर निर्णय ले सकते हैं।

पूरी जमीन एक ही सब्जी में लगाने से बचें

सब्जियों में सरकारी खरीद का भरोसा गेहूं या सरसों जैसी फसलों के समान नहीं होता। बाजार भाव मांग और आपूर्ति के आधार पर तेजी से बदल सकते हैं। इसलिए किसान अपनी बाजार पहुंच और लागत को देखते हुए ही क्षेत्र तय करें।

छोटे किसान चाहें तो खेत को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अलग अवधि वाली सब्जियां लगा सकते हैं। इससे पूरी उपज एक साथ बाजार में पहुंचने का जोखिम कुछ कम किया जा सकता है।

मिट्टी परीक्षण के आधार पर करें खाद का इस्तेमाल

अगली फसल की तैयारी से पहले मिट्टी की स्थिति देखना जरूरी है। खाद और उर्वरक की मात्रा किसी सामान्य अनुमान के बजाय मिट्टी परीक्षण के आधार पर तय करना अधिक उचित रहता है। किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से खेत की स्थिति के अनुसार सलाह ले सकते हैं।

किसान सेवा सलाह: हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की किसान सेवा केंद्र की सलाह लेने के बाद स्थानीय मिट्टी और मौसम के अनुसार फसल का चयन करना अधिक सुरक्षित रहेगा।

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