नोहर-भादरा के किसानों के लिए अच्छी खबर, अगर फार्मर आईडी नहीं तो भी मिलेगी खाद
राजस्थान सरकार ने खरीफ सीजन 2026 से पहले अनुदानित उर्वरकों के वितरण को लेकर नई डिजिटल व्यवस्था लागू की है। कृषि आयुक्तालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार अब उर्वरक वितरण फार्मर आईडी (किसान पंजीयन) को प्राथमिकता देते हुए किया जाएगा। हालांकि जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है, वे जमाबंदी, एफआरए पट्टा, बटाईनामा या किरायानामा जैसे वैकल्पिक दस्तावेजों के आधार पर भी अनुदानित उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। नई व्यवस्था का उद्देश्य उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और जबरन टैगिंग पर रोक लगाना है। प्रदेश में हर वर्ष खरीफ और रबी सीजन के दौरान यूरिया की कमी और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आती रही हैं।
फार्मर आईडी को प्राथमिकता, वैकल्पिक दस्तावेजों से भी मिलेगी खाद
कृषि आयुक्तालय, जयपुर द्वारा 18 जून 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसानों को केवल फार्मर आईडी के आधार पर ही नहीं, बल्कि अन्य वैध कृषि दस्तावेजों के आधार पर भी अनुदानित उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। इस फैसले से उन हजारों किसानों को राहत मिलेगी जिनकी फार्मर आईडी नहीं बनी है या जिनका पंजीकरण लंबित है। बटाईदार, किरायेदार और संयुक्त खातेदार किसानों को भी अब खाद लेने में परेशानी नहीं होगी। खरीफ सीजन की बुवाई के समय यह समस्या और गंभीर हो गई थी। किसानों को खाद-बीज खरीदने के लिए फार्मर आईडी बनवाना अनिवार्य होगा, बिना इस आईडी के किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई होगी। फार्मर आईडी के आधार पर ही खाद का वितरण किया जाएगा।
टोकन सिस्टम से होगा उर्वरक वितरण
नई व्यवस्था के तहत किसानों को अपनी फार्मर आईडी के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के बाद एक टोकन जनरेट होगा, जिसे उर्वरक विक्रेता को प्रस्तुत करने पर खाद मिलेगी। ऑनलाइन आवेदन करते समय किसान को अपनी उपलब्ध जमीन, बोई जाने वाली फसलें, उर्वरक का नाम, कंपनी का नाम, पसंदीदा विक्रेता और खाद की मात्रा बतानी होगी। जारी किया गया टोकन 48 घंटे के लिए वैध होगा। इस प्रणाली से किसान के पास उपलब्ध जमीन और बोई जाने वाली फसलों के आधार पर उर्वरकों की सटीक मात्रा का निर्धारण हो सकेगा।
पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राजसमंद और सिरोही में शुरुआत
इस प्रणाली को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राजसमंद और सिरोही जिलों में लागू किया गया है। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने राजसमंद में फर्टीलाइजर सेल्स एप्लिकेशन सिस्टम (FSAS) का शुभारंभ किया। इस प्रणाली को जल्द ही अन्य सभी जिलों में भी लागू किया जाएगा। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि भारत सरकार द्वारा उर्वरकों पर भारी सब्सिडी प्रदान की जाती है। अनुदानित उर्वरकों का गैर कृषि कार्यों में उपयोग, कालाबाजारी, जमाखोरी आदि आपराधिक कृत्यों को रोकने के लिए यह नई पहल की जा रही है।
सीमावर्ती जिलों में बढ़ेगी निगरानी, चेक पोस्ट स्थापित
सरकार ने उर्वरकों की कालाबाजारी और एक जिले से दूसरे जिले अथवा दूसरे राज्यों में अवैध परिवहन को रोकने के लिए सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। पुलिस और कृषि विभाग के संयुक्त स्तर पर चेक पोस्ट स्थापित कर उर्वरकों की आवाजाही पर नजर रखी जाएगी। प्रशासन और कृषि विभाग संयुक्त रूप से निगरानी करेंगे ताकि राजस्थान के किसानों के लिए आवंटित खाद दूसरे राज्यों में न जा सके। राज्य सरकार ने 61 चेक पोस्ट सक्रिय कर दिए हैं। निरीक्षकों को नियमित जांच करने और खाद नियंत्रण आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जमाखोरी, टैगिंग और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले साल की तुलना में 84,166 मीट्रिक टन अधिक खाद का स्टॉक उपलब्ध है।
स्टॉक होने पर नहीं कर सकेंगे मनाही, कीमतें प्रदर्शित करना अनिवार्य
यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश हैं कि स्टॉक उपलब्ध होने पर किसानों को खाद देने से इनकार नहीं किया जाए। साथ ही विक्रेताओं को मूल्य सूची, उपलब्ध स्टॉक और गोदाम का विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना होगा, जिससे किसानों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
जबरन टैगिंग पर रोक, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई
किसानों की लंबे समय से रही उस शिकायत को भी गंभीरता से लिया गया है, जिसमें खाद खरीदने के दौरान अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव बनाया जाता था। अब खाद कंपनियों और विक्रेताओं को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अनुदानित यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी की बिक्री के साथ किसी अन्य गैर-अनुदानित उत्पाद की अनिवार्य टैगिंग नहीं की जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद नियंत्रण आदेश के तहत कार्रवाई की जाएगी। किसानों को उनकी मांग के अनुसार, निर्धारित दर पर और अपने आसपास के क्षेत्र से ही आसानी से उर्वरक उपलब्ध हो सकेंगे।
कृषि क्षेत्र में डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम
फसल बीमा, खाद वितरण, पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ किसान आईडी के माध्यम से ही दिया जाएगा। इसलिए वंचित किसान अपनी आईडी शीघ्र बनवाएं, जिससे भविष्य में विभागीय योजनाओं का लाभ सुगम रूप से लिया जा सके। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक किसान की पहचान फार्मर रजिस्ट्री से स्वतः सत्यापित हो पाएगी। यह भविष्य में कृषि क्षेत्र में डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।
