https://www.choptaplus.in/

Sirsa News: गेहूं भुगतान और धीमे उठान पर भड़के किसान, SKM ने मार्केट कमेटी सचिव को सौंपा ज्ञापन

 
Sanyukt Kisan Morcha Sirsa Leaders Submitting Memorandum to Market Committee Secretary
Sirsa News: हरियाणा की मंडियों में गेहूं की बंपर आवक के बीच अव्यवस्थाओं का अंबार लग गया है। सरकार द्वारा किए गए '72 घंटे में भुगतान' के दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। किसानों की इन्हीं ज्वलंत समस्याओं को लेकर गुरुवार को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) सिरसा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मार्केट कमेटी सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक कड़ा ज्ञापन सौंपा। 

एसकेएम नेताओं ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार द्वारा एकतरफा और बिना जमीनी हकीकत जाने जो नियम थोपे गए हैं, वे किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुके हैं। गेहूं की फसल बिके हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक किसानों के खातों में पूरा भुगतान नहीं पहुंचा है। किसान अपनी ही फसल के पैसों के लिए आढ़तियों और बैंकों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

मंडियों में लगा गेहूं का पहाड़, धीमे उठान से बढ़ी परेशानी

भुगतान के साथ-साथ मंडियों से गेहूं का धीमा उठान (लिफ्टिंग) भी एक गंभीर समस्या बन चुका है। सिरसा जिले की प्रमुख अनाज मंडियों में लाखों क्विंटल गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है और उठान की सुस्त रफ्तार के कारण अब मंडियों में नई फसल उतारने तक की जगह नहीं बची है। 

एसकेएम नेताओं ने ज्ञापन में बताया कि प्रशासन लिफ्टिंग के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन हकीकत में ट्रांसपोर्टरों और एजेंसियों की लापरवाही का खामियाजा किसानों और आढ़तियों को भुगतना पड़ रहा है। मौसम की अनिश्चितता के बीच खुले में पड़ा गेहूं बारिश की भेंट चढ़ने का भी डर बना हुआ है, जिससे किसानों की चिंताएं दोगुनी हो गई हैं।

ऑनलाइन पोर्टल और बायोमेट्रिक शर्तों ने बढ़ाई सिरदर्दी

किसान नेताओं ने पिछले दिनों फसल बिक्री में लगाई गई नई शर्तों और 'ई-खरीद' (e-Kharid) पोर्टल की तकनीकी खामियों पर भी कड़ा रोष जताया। उनका कहना है कि सर्वर डाउन रहने, बार-बार रजिस्ट्रेशन मांगने और अनिवार्य बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी जटिल प्रक्रियाओं ने खरीद व्यवस्था को पूरी तरह से बाधित कर दिया है। 

तकनीकी गड़बड़ियों के कारण किसानों को अपनी ट्रॉलियों के साथ चिलचिलाती धूप में कई-कई दिनों तक मंडियों में इंतजार करना पड़ रहा है। एसकेएम का आरोप है कि डिजिटल इंडिया के नाम पर थोपे गए ये नियम किसानों को सुविधा देने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।

मार्केट कमेटी सचिव को सौंपे गए इस ज्ञापन में संयुक्त किसान मोर्चा ने मुख्य रूप से तीन अहम मांगें रखी हैं। प्रतिनिधिमंडल ने पहली मांग में स्पष्ट किया है कि सरकार गेहूं की फसल का सारा बकाया भुगतान तुरंत प्रभाव से किसानों के खातों में जमा करवाए। दूसरी मांग के तहत प्रशासन को मंडियों से गेहूं के उठान की प्रक्रिया में तेजी लाने और परिवहन व्यवस्था दुरुस्त करने का अल्टीमेटम दिया गया है। वहीं, तीसरी सबसे अहम मांग में कहा गया है कि फसल खरीद में बाधा बन रही ऑनलाइन पोर्टल, अनिवार्य पंजीकरण और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी शर्तों को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए, ताकि किसान अपनी उपज आसानी से बेच सकें।

मांगों की अनदेखी पर बड़े आंदोलन की चेतावनी

मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में एसकेएम के प्रमुख नेता सुखदेव सिंह जम्मू, हमजिंद्र सिधु, कामरेड सुरजीत सिंह, इकबाल सिंह, बेअंत सिंह नेजाडेला कलां, जगसीर सिंह और राजेंद्र बैनीवाल शामिल रहे। इन सभी किसान नेताओं ने प्रशासन और प्रदेश सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यह ज्ञापन उनका अंतिम शांतिपूर्ण कदम है। यदि सरकार ने जल्द ही किसानों की इन समस्याओं का संज्ञान लेकर उनका ठोस समाधान नहीं किया, तो संयुक्त किसान मोर्चा को मजबूर होकर एक बार फिर सड़कों पर उतरना पड़ेगा और इस बार बेमियादी आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
 

Rajasthan