Sirsa Farmer Success: पारंपरिक खेती छोड़ उगाई स्ट्रॉबेरी और सब्जियां, 6वीं पास किसान सालाना कमा रहा 15 लाख।
नाथूसरी कलां (सिरसा): अगर किसान के पास जमीन कम हो और पूरे परिवार का पालन-पोषण उसी पर निर्भर हो, तो सेम, सूखा या अकाल पड़ने पर आर्थिक स्थिति डगमगा जाती है। लेकिन, सिरसा जिले के गांव नाथूसरी कलां के एक 6वीं पास किसान ने इन चुनौतियों के आगे हार नहीं मानी। किसान ईश्वर सिंह कड़वासरा ने नवाचार अपनाते हुए पारंपरिक खेती के साथ स्ट्रॉबेरी, गुलाब और मौसमी सब्जियों की खेती शुरू की, जिसने आज उन्हें लखपति बना दिया है।
15 साल पहले लिया था बदलाव का फैसला
ईश्वर सिंह बताते हैं कि फसलों पर बढ़ती लागत और मंदे भाव के कारण पारंपरिक खेती (गेहूं, सरसों, कपास) में बचत कम होने लगी थी। मात्र छठी कक्षा तक पढ़े ईश्वर ने 15 साल पहले फैसला लिया कि वह अपनी 4 एकड़ भूमि में से 2 एकड़ में बदलाव करेंगे। उन्होंने इस जमीन पर स्ट्रॉबेरी, गुलाब के पौधे और मौसमी सब्जियां (टमाटर, घीया, तर, तरबूज, तोरी और टिंडा) लगानी शुरू कर दी। पहले ही साल उन्हें 5 लाख रुपये की शानदार आमदनी हुई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज उनका सालाना कमाई का दायरा 15 लाख रुपये तक पहुंच गया है। उनकी इस सफलता को देखकर गांव के अन्य किसानों ने भी मौसमी सब्जियों की खेती शुरू कर दी है, जिससे गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
जैविक खेती पर जोर, इस बार 15 लाख का लक्ष्य
नवाचार को आगे बढ़ाते हुए ईश्वर कड़वासरा ने इस बार अपने साथी किसान महेंद्र सिंह के साथ मिलकर 5 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती की है। इसके अलावा एक एकड़ में तरबूज और एक एकड़ में टमाटर व तोरी लगाई है। उनकी खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे रासायनिक खाद का प्रयोग नाममात्र करते हैं। फसलों में मुख्य रूप से गोबर की खाद, जैविक खाद और ऑर्गेनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। किसान को पूरा विश्वास है कि इस बार 15 लाख रुपये की कमाई का लक्ष्य आसानी से पूरा हो जाएगा। खाने के लिए वे आज भी अपनी बाकी जमीन पर गेहूं और सरसों उगाते हैं।
चोपटा में सब्जी और फल मंडी की उठी मांग
आमदनी तो बढ़ी है, लेकिन किसानों के सामने एक बड़ी चुनौती बाजार की है। ईश्वर सिंह ने बताया कि आस-पास के क्षेत्र में सब्जी, स्ट्रॉबेरी या फूलों की कोई स्थापित मंडी नहीं है। उपज को दूर-दराज की मंडियों में ले जाने से यातायात (Transportation) पर भारी खर्च आता है, जिससे मुनाफे पर असर पड़ता है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि यदि चोपटा में एक नई सब्जी और फल मंडी विकसित कर दी जाए, तो यातायात खर्च बचेगा और किसानों की आय में और अधिक इजाफा होगा।
