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सिरसा के खारिया गांव में किसानों को गुलाबी सुंडी को जड़ से खत्म करने की दी गई ट्रेनिंग, डॉ. अमरप्रीत सिंह ने बताया गजब का तरीका

 
Agriculture scientists giving training to farmers on AI smart pheromone trap for pink bollworm in Kharia village Sirsa

सिरसा: नरमा-कपास के किसानों के लिए नासूर बन चुकी गुलाबी सुंडी के खात्मे के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने अब पूरी तरह से कमर कस ली है। इसी कड़ी में केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (सीआईसीआर) के सिरसा क्षेत्रीय केंद्र द्वारा जिले के गांव खारिया में एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में 100 से अधिक किसानों को "ए.आई. स्मार्ट फेरोमोन ट्रैप" पायलट प्रोजेक्ट के जरिए अपनी नरमा-कपास की फसलों को बचाने के आधुनिक तरीके सिखाए गए।

कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए पिछले कुछ वर्षों से गुलाबी सुंडी सबसे बड़ा सिरदर्द बन रहा है, जिससे पैदावार में भारी गिरावट आती है। वैज्ञानिकों का यह प्रयास किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है।

बीटी नरमा के सही बीज और कीट प्रबंधन पर जोर

कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे कृषि वैज्ञानिक डॉ. अमरप्रीत सिंह ने किसानों को नरमा की बिजाई से पहले सही हाइब्रिड बीज के चयन को लेकर जागरूक किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत से ही अगर अपने क्षेत्र की मिट्टी के अनुसार उत्तम किस्म का चुनाव किया जाए, तो फसल में बीमारियों और कीटों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

इसके साथ ही उन्होंने कपास की फसल में लगने वाले विभिन्न कीटों, रोगों की पहचान और खरपतवार प्रबंधन पर किसानों को बहुत ही सरल भाषा में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. सिंह ने खेतों में पोषक तत्वों की कमी से पौधों की पत्तियों और विकास पर दिखने वाले शुरुआती लक्षणों के बारे में भी किसानों को अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय रहते अगर किसान इन लक्षणों को पहचान लें, तो पैदावार में होने वाले भारी नुकसान को आसानी से टाला जा सकता है।

AI Smart Pheromone Trap Training in Sirsa
तस्वीर: सिरसा के गांव खारिया में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को खेतों में ए.आई. स्मार्ट फेरोमोन ट्रैप के इस्तेमाल की ट्रेनिंग देते हुए, जहां ग्रामीण किसान ध्यान से सुन रहे हैं

ऑफ-सीजन में गुलाबी सुंडी का ऐसे करें जड़ से खात्मा

कपास की फसल की सबसे बड़ी दुश्मन गुलाबी सुंडी के गैर-मौसमी नियंत्रण (Off-season control) पर शिविर में मौजूद कृषि विशेषज्ञों ने सबसे ज्यादा जोर दिया। डॉ. अमरप्रीत सिंह ने किसानों को बताया की जिस खेत में कपास की बिजाई करनी है अगर उस जमीन मे नरमा-कपास के अवशेष और लकड़ियां बची हुई है तो उन्हे तुरंत खत्म करें।

अक्सर खेतों या घरों में रखी लकड़ियों में बचे हुए टिंडों के अंदर गुलाबी सुंडी का लार्वा छिपा रहता है, जो अगली फसल की बिजाई होते ही उनका फसलों पर अटैक शुरू कर देते है। डॉ. अमरप्रीत सिंह ने किसानों को बताया कि गुलाबी सुंडी की सटीक निगरानी के लिए प्रति एकड़ कम से कम दो फेरोमोन ट्रैप खेत में जरूर लगाएं। इसके अलावा, सही समय पर और उचित मात्रा में कीटनाशकों के छिड़काव को लेकर भी तकनीकी जानकारी साझा की गई।

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ए.आई. स्मार्ट फेरोमोन ट्रैप तकनीक से होगा चमत्कार

इस महत्वपूर्ण शिविर के दौरान किसानों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं दिया गया, बल्कि नई कृषि तकनीकों का सीधा लाइव डेमो भी खेतों में दिखाया गया। विशेषज्ञ संजीव कुमार ने किसानों के बीच जाकर उन्हें गुलाबी सुंडी की बारीकी से पहचान करने और फेरोमोन ट्रैप लगाने की सही विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।

संजीव कुमार ने आधुनिक 'ए.आई. स्मार्ट फेरोमोन ट्रैप' की पूरी कार्यप्रणाली समझाते हुए बताया कि यह तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करती है। यह ट्रैप कीटों के हमले की सटीक जानकारी और डेटा इकट्ठा करता है। इस उन्नत और स्मार्ट तकनीक को अपनाकर सिरसा के किसान न सिर्फ अपनी कपास की फसल को बर्बाद होने से बचा सकते हैं, बल्कि कीटनाशकों पर होने वाले अंधाधुंध खर्च को कम करके बेहतर मुनाफा भी कमा सकते हैं।

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