बेटी से दुराचार के दोषी पिता को अदालत ने सुनाई 10 साल कठोर कारावास की सजा
दोषी पर 55 हजार रुपये जुर्माना, जान से मारने की धमकी देने का भी मामला साबित
गुरुग्राम की एक अदालत ने समाज को झकझोर देने वाले मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी ही नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने वाले पिता को दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर कुल 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला गुरुवार को एडिशनल सेशन जज जैस्मीन शर्मा की अदालत ने सुनाया।
यह मामला न केवल कानून व्यवस्था बल्कि सामाजिक मूल्यों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि ऐसे जघन्य अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती, विशेषकर तब जब आरोपी पीड़िता का पिता हो, जिस पर सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी होती है।
अगस्त 2023 में दर्ज हुआ था मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला 24 अगस्त 2023 को पुलिस थाना सेक्टर-9, गुरुग्राम में दर्ज किया गया था। एक महिला, जो आंगनबाड़ी में कार्यरत है, ने पुलिस को शिकायत दी थी। महिला ने बताया कि उसके पास आने वाली 16 वर्षीय किशोरी ने उसे आपबीती सुनाई थी।
पीड़िता ने बताया कि उसके पिता ने उसके साथ दुष्कर्म किया, और जब उसने किसी को बताने की बात कही तो आरोपी पिता ने उसे जान से मारने की धमकी दी। किशोरी मानसिक रूप से बेहद डरी और सहमी हुई थी, जिसके बाद महिला ने साहस दिखाते हुए पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद गुरुग्राम पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की। पुलिस ने पश्चिम बंगाल निवासी आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से गहन पूछताछ की गई और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की गई।
पुलिस टीम ने पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और अन्य तकनीकी सबूत एकत्र किए। साथ ही आवश्यक गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए, ताकि अदालत में मामला पूरी मजबूती के साथ प्रस्तुत किया जा सके।
मजबूत चार्जशीट के आधार पर आया फैसला
जांच पूरी होने के बाद गुरुग्राम पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष सभी साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य विश्वसनीय और ठोस हैं।
इन साक्ष्यों के आधार पर एडिशनल सेशन जज जैस्मीन शर्मा की अदालत ने आरोपी पिता को दुष्कर्म का दोषी करार दिया। अदालत ने माना कि आरोपी ने न केवल कानून का उल्लंघन किया, बल्कि पिता-बेटी जैसे पवित्र रिश्ते को भी कलंकित किया है।
अदालत ने सुनाई कड़ी सजा
अदालत ने दोषी को
10 वर्ष का कठोर कारावास
50 हजार रुपये का जुर्माना (दुष्कर्म के मामले में)
सुनाया। इसके अतिरिक्त, आरोपी को धारा 506 आईपीसी (आपराधिक धमकी) के तहत
2 वर्ष की कैद
5 हजार रुपये जुर्माना
की सजा भी सुनाई गई। इस प्रकार कुल मिलाकर आरोपी पर 55 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
