DPS Sirsa News: सीबीएसई के तत्वावधान में 'थ्योरी ऑफ नॉलेज' पर कार्यशाला, शिक्षकों ने सीखे आधुनिक शिक्षण के गुर
सिरसा: शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर नवाचार और शिक्षकों के कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), सिरसा में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के तत्वावधान में 28 फरवरी को आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला का मुख्य विषय 'थ्योरी ऑफ नॉलेज' (ज्ञान का सिद्धांत) रहा।
'ज्ञान सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि सही दृष्टिकोण है'
कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ विद्यालय की प्राचार्या रमा दहिया ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षा के वास्तविक अर्थ पर प्रकाश डाला। प्राचार्या रमा दहिया ने कहा, "ज्ञान केवल किताबों से जानकारी प्राप्त करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उस जानकारी को सही दृष्टिकोण और विवेक के साथ आत्मसात करना ही वास्तविक शिक्षा है।"
आधुनिक शिक्षण और क्रिटिकल थिंकिंग पर जोर
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में शिक्षा विशेषज्ञ श्वेता और डॉ. संजय कुमार उपस्थित रहे। उन्होंने अपने व्यापक अनुभव और ज्ञान के माध्यम से शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। वक्ताओं ने शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों (Modern Teaching Techniques), समालोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) और नवाचार (Innovation) पर आधारित शिक्षण पद्धतियों से विस्तार से अवगत कराया। इसका मुख्य उद्देश्य कक्षा शिक्षण को छात्रों के लिए और अधिक प्रभावी, इंटरैक्टिव और रोचक बनाना था।
गतिविधियों और चर्चा से सीखा पढ़ाने का नया तरीका
कार्यशाला को केवल व्याख्यान तक सीमित न रखकर इसे पूरी तरह से व्यावहारिक बनाया गया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शैक्षिक गतिविधियों (Educational Activities) और समूह चर्चाओं (Group Discussions) का सफल आयोजन किया गया, जिसमें विद्यालय के सभी शिक्षकों ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को ऐसे व्यावहारिक उपाय बताए गए जिनसे वे अपने विद्यार्थियों के भीतर तार्किक सोच (Logical Thinking), विश्लेषणात्मक क्षमता (Analytical Ability) और दृढ़ आत्मविश्वास विकसित कर सकें।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्राचार्या रमा दहिया ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि विद्यालय में भविष्य में भी इस प्रकार की ज्ञानवर्धक कार्यशालाओं का निरंतर आयोजन किया जाता रहेगा, ताकि शिक्षा के वास्तविक उद्देश्यों को पूरा किया जा सके और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास (Overall Development) का लक्ष्य हासिल हो।
