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हरियाणा में प्राइवेट स्कूलों को फैल करेगें सरकारी स्कूल, शिक्षा मंत्री ने जारी किया ₹7862 करोड़ का पूरा रोडमैप

 
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा सरकारी स्कूल के बच्चों के साथ डिजिटल क्लासरूम में

चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है। प्रदेश सरकार अब सरकारी स्कूलों का चेहरा बदलने जा रही है, ताकि वे प्राइवेट स्कूलों का मुकाबला कर सकें। इसके लिए साल 2026-27 के बजट में माध्यमिक शिक्षा के लिए 7,862.40 करोड़ रुपये का एक बहुत बड़ा बजट रखा गया है। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा खुद इस योजना की देखरेख कर रहे हैं। इस पैसे से स्कूलों की इमारतें सुधारी जाएंगी, नई तकनीक लाई जाएगी और बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल दिया जाएगा।

इस पूरे बजट का सबसे बड़ा हिस्सा यानी 5,707.41 करोड़ रुपये शिक्षकों की सैलरी और स्कूलों के रोजमर्रा के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए रखा गया है। इसके अलावा, जिलों में बैठे शिक्षा अधिकारियों के दफ्तरों के लिए 83.74 करोड़ रुपये और मुख्यालय के लिए 56.29 करोड़ रुपये तय हुए हैं, ताकि काम में कोई ढील न रहे।

अब सरकारी स्कूलों के बच्चे भी कंप्यूटर और प्रोजेक्टर की मदद से पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए सरकार ने 'आईसीटी' योजना के तहत 65.37 करोड़ रुपये का बजट रखा है। इस पैसे से स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएंगे, डिजिटल बोर्ड लगेंगे और कंप्यूटर की पढ़ाई को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, जूनियर बेसिक ट्रेनिंग संस्थानों के सुधार पर भी 80.30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

स्कूलों को सुंदर और मजबूत बनाने के लिए भी सरकार दिल खोलकर पैसा खर्च कर रही है। नए स्कूल भवन और बड़े कामों के लिए 250 करोड़ रुपये दिए गए हैं। स्कूलों के लिए जरूरी सामान और संपत्तियां खरीदने पर 161 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जो इलाके पढ़ाई के मामले में थोड़े पिछड़े हैं, वहां नए मॉडल स्कूल खोलने के लिए 60 करोड़ रुपये का इंतजाम किया गया है। वहीं, बेटियों की सुविधा के लिए स्कूलों में अलग से शौचालय बनाने पर 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों को पढ़ाई में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए सरकार ने कई बड़ी घोषणाएं की हैं। बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों के नौवीं से बारहवीं कक्षा के छात्रों को हर महीने मिलने वाले वजीफे (स्टाइपेंड) के लिए 120 करोड़ रुपये रखे गए हैं। बीसी-ए वर्ग के बच्चों के लिए 35 करोड़ रुपये और अनुसूचित जाति (एससी) के बच्चों को नकद इनाम देने के लिए 147 करोड़ रुपये का बजट है। एससी छात्रों को पहले की तरह मुफ्त साइकिलें और परीक्षा फीस माफी की सुविधा मिलती रहेगी।

बेटियों की सुरक्षा और अच्छे संस्कारों के लिए 'सुसंस्कार-बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' प्रोग्राम के तहत 40 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बच्चों को घर से स्कूल सुरक्षित पहुंचाने वाली 'स्कूल परिवहन सुरक्षा योजना' के लिए 38 करोड़ रुपये तय हुए हैं। इसके साथ ही, बच्चों का सुरक्षा बीमा भी जारी रहेगा। बच्चों के मनोरंजन और ज्ञान के लिए किताबों और लाइब्रेरी पर 62 करोड़ रुपये, सांस्कृतिक प्रोग्राम के लिए 10 करोड़ रुपये और साइंस मेलों पर भी अलग से पैसे खर्च किए जाएंगे।

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हरियाणा के स्कूलों को देश में सबसे आगे ले जाने के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं की मदद भी ली जा रही है। केंद्र सरकार की तरफ से मिलने वाले 734.87 करोड़ रुपये में से 487.50 करोड़ रुपये 'राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान' पर खर्च होंगे। इसके तहत चुने गए 'पीएमश्री' स्कूलों को बिल्कुल आधुनिक और वर्ल्ड क्लास बनाया जाएगा। इसके अलावा, राज्य में पूरी तरह साक्षरता लाने के लिए ‘पढ़ना-लिखना अभियान’ पर भी 8 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

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