हरियाणा में प्राइवेट स्कूलों को 9 मई तक RTE दाखिले का अल्टीमेटम, नियम तोड़ने वाले स्कूलों की जाएगी मान्यता
हरियाणा में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत गरीब विद्यार्थियों के दाखिले में आनाकानी करने वाले निजी स्कूलों पर अब गाज गिरना तय है। प्रदेश के शिक्षा विभाग ने सभी 4703 निजी स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आरटीई के लिए निर्धारित 21,752 सीटों पर हर हाल में नौ मई तक दाखिला प्रक्रिया पूरी करें। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि पात्र छात्रों को प्रवेश न देने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाएगा और उनकी मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
अभिभावकों की शिकायतों पर कड़ा संज्ञान
आरटीई के तहत प्रदेश में 30 अप्रैल से दाखिला प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस दौरान बड़ी संख्या में अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि कई निजी स्कूल जानबूझकर दाखिले में देरी कर रहे हैं। कुछ स्कूल मनमाने और तकनीकी कारण बताकर बच्चों को प्रवेश देने से इनकार कर रहे हैं। इन बढ़ती शिकायतों को देखते हुए प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों को विशेष निगरानी के आदेश जारी कर दिए हैं।
रोजाना पोर्टल पर देना होगा अपडेट
दाखिला प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया है। अब सभी स्कूलों को अपने एमआईएस (MIS) लॉगिन के जरिए हर छात्र के दाखिले की स्थिति रोजाना अपडेट करनी होगी। स्कूलों को पोर्टल पर यह स्पष्ट करना होगा कि आवेदन स्वीकार किया गया है या अस्वीकार। यदि किसी बच्चे का फॉर्म खारिज किया जाता है, तो उसका ठोस कारण भी पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। बिना आरटीई नियमों के आधार के दाखिला रोकने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।
एक किलोमीटर के दायरे में पहली प्राथमिकता
निदेशालय के निर्देशों के अनुसार, कक्षा पहली, पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक स्तर की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर सबसे पहले उन बच्चों को प्रवेश मिलेगा जो स्कूल से एक किलोमीटर के दायरे में रहते हैं। अगर कोई निजी स्कूल तीन किलोमीटर के दायरे में रहने वाले बच्चों को स्वेच्छा से दाखिला देता है, तो सरकार नियमानुसार उसकी फीस की प्रतिपूर्ति करेगी। इसके लिए आवेदक के पास वैध हरियाणा निवास प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है।
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पांच दिन में होगा शिकायतों का निपटारा
जिला और ब्लॉक स्तर की मॉनिटरिंग कमेटियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अभिभावकों की हर शिकायत का तुरंत समाधान करें। जिन मामलों का पांच दिनों के भीतर हल नहीं निकलेगा, उन्हें प्रथम अपीलीय समिति और उसके बाद अंतिम अपीलीय प्राधिकरण के पास भेजा जाएगा। शुरुआती दौर में सभी प्रवेश अस्थायी माने जाएंगे। विद्यालय स्तरीय समितियों द्वारा तय मानकों के आधार पर दस्तावेजों की गहन जांच और सत्यापन के बाद ही दाखिले को अंतिम रूप दिया जाएगा ताकि किसी भी पात्र बच्चे के साथ अन्याय न हो।
