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Sociology of religion:प्रतिचयन को परिभाषित करें।

Sociology of religion
 
sociology

इस उप-समूह को निदर्शन तथा संपूर्ण समूह को एक समग्र के नाम से सम्बोधित किया जाता है।

 

 

Sociology of religion: निदर्शन (प्रतिचयन) का सामान्य अर्थ है संपूर्ण समग्र की यह छोटी इकाई जो अपूर्ण समग्र का प्रतिनिधित्व करती है। निदर्शन समग्र का वह अंश होता है जिसमें अपनी समग्र श्रीरामस्त विशेषताओं का स्पष्ट प्रतिविम्ब रहता है, अर्थात् एक निदर्शन अपने समस्त समूह एक लघु-चित्र होता है।

Sociology of religion: जोहन गाल्दुंग (Johan Galtung) के मतानुसार 'अध्ययन के लिए चुनी गई सकाइयों का समूह संभावित इकाइयों के संपूर्ण समूह का उप-समूह है। इस उप-समूह को निदर्शन तथा संपूर्ण समूह को एक समग्र के नाम से सम्बोधित किया जाता है।

Sociology of religion: एम.बी. पार्टन (M.B. Parten) के मतानुसार, 'एक निश्चित संख्या में व्यक्तियों, मामलों या निरीक्षणों को एक समग्र विशेष में से निकालने की प्रक्रिया या पद्धति निदर्शन कहलाती है।

Sociology of religion: पी.वी. यंग (P.V. Young) के अनुसार, 'एक सांख्यिकी निदर्शन उस संपूर्ण समूह अपवा संलग्न का सूक्ष्म चित्र अथवा पारवर्ग है जिससे निदर्शन लिया गया। उस संपूर्ण समूह को जिससे निदर्शन का चुनाव किया जाता है, जनसंख्या, समग्र अथवा प्रदाय समझा जाता

Sociology of religion: सेल्टिज एवं अन्य (Selltiz and others) ने इसे परिभाषित करते हुए लिखा है, यदि हम किसी जनसंख्या के बारे में कुछ जानने के उद्देश्य से उसके कुछ तत्त्वों का चुनाव करते है, हम उन तत्त्वों के समूह को निदर्शन कहते हैं।

Sociology of religion: गुड एवं हॉट (Goode and Hatt) ने लिखा है, 'एक निदर्शन जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है एक बड़े समग्र का अपेक्षाकृत छोटा प्रतिनिधि है।"

Sociology of religion: एफ.एन. करलिंगर (F.N. Kerlinger) के अनुसार, 'निदर्शन समग्र अथवा जनसंख्या को किसी एक अंश को उस समग्र के प्रतिनिधि के रूप में लेता है।"

Sociology of religion: स्पष्टतः निदर्शन को तभी उपयुक्त माना जा सकता है जब वह संपूर्ण समग्र (whole universe) का सही प्रतिनिधित्व करे। निदर्शन संपूर्ण समग्र का वास्तविक प्रतिनिधि है या नहीं इसकी एक कसौटी यह है कि निदर्शन के स्थान पर यदि संपूर्ण समग्र का अध्ययन किया जाए तो परिणामों में सार्थक अंतर नहीं आना चाहिए। निदर्शन चुनने की यह प्रमुख समस्या है कि निदर्शन किस प्रकार चुना जाए ताकि वह समग्र का ठीक प्रतिनिधित्व कर सके और उसमें कोई पूर्वाग्रह न हो।

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