Sociology of religion: जनगणना का परिप्रेक्ष्य (Census Perspective) पर टिप्पणी करें।

Sociology of religion: हमारे देश में जनगणना संबंधी गंभीर व वैज्ञानिक अध्ययन किए जा रहे है, जिनके आधार पर राष्ट्रीय जनसंख्या नीति का निर्माण होता है। भारत में प्रथम जनगणना 1971 में हुई थी तथा इससे पूर्व भारत की जनसंख्या के संबंध में कोई स्थिर ज्ञान नहीं था।
जनगणना तथा पहचान की राजनीति किस प्रकार सरकार का गठन करने में सहयोग देती है। राजनीतिक घटनाओं ने जनगणना सांख्यिकी के उपयोग उसके प्रति जनता की प्रतिक्रिया को निर्धारित किया। इसी डेटा के आधार पर विभिन्न समुदायों एवं धार्मिक समूहों के मध्य तुलना की गई।
हाउजर एवं डंकन के अनुसार 'जनगणना जनसंख्या के आकार, क्षेत्रीय वितरण, गठन व उनमें प्रिवर्तन तथा इन परिवर्तनों के घटक, जो कि जन्म, मृत्यु, क्षेत्रीय गमन एवं सामाजिक गतिशीलता के रूप में जाने जाते हैं, का अध्ययन करते हैं।
जनसंख्या के विधिवत् अध्ययन एवं विश्लेषण के लिए जनगणना का आश्रय लिया जाता है। दोनों एक दूसरे के पूरक एवं अन्योयाश्रित है। एक के बिना दूसरे का अध्ययन व विश्लेषण अपूर्ण होता है।
जनगणना एक राजनीतिक कार्य है. जिससे राजनीतिक प्रभावी वाली संवेदनशील सूचना एकत्रित की जाती है। जाति सबंधी जनगणना बैल में सामाजिक-आर्थिक समस्याओं को समझने और विभिन्न समुदायों को विभाजनशील बनाने * लिए विश्लेषित करने की अत्यधिक संभावना होती है।
इस इकाई में जाति की पहचान व नगणना में जाति की अभिव्यक्ति का प्रभाव, समाजशास्त्र में जाति की अवधारणा पर जनगणना प्रणायनादि तथ्यों पर प्रकाश डाला गया है। जनगणना में जाति और वर्ग के संबध में भेद थाइराको स्पष्ट किया गया है।