आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ पवन शर्मा कागदाना की सेवानिवृति पर विदाई समारोह का आयोजन।

सिरसा। कागदाना के आयुर्वेदिक आरोग्य मन्दिर में कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ पवन शर्मा 22 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त्त हो गये । उनकी सेवानिवृत्त्ति पर स्टाफ सदस्यों की ओर से कागदाना और सिरसा में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर उनके सहयोगी कर्मचारियों ने डॉ पवन शर्मा व उनकी पत्नी प्रेमलता को स्मृतिचिन्ह भेंट किए. गांव कागदाना के प्रतिष्ठित आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर पवन कुमार शर्मा को उनकी 22 वर्षों की समर्पित सेवा के बाद सेवानिवृत्ति के अवसर पर आयुष्मान आरोग्य मंदिर कागदाना में एक भावभीनी विदाई दी गई।
डॉ. पवन कुमार शर्मा का जन्म कागदाना गांव में एक शिक्षित परिवार में हुआ था। उनके पिता श्री राम कुमार ‘मास्टरजी’ और माता श्रीमती सरस्वती ने उन्हें सेवा और समर्पण के संस्कार दिए। वर्ष 2003 में उन्होंने आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी के रूप में सरकारी सेवा में प्रवेश किया और उसके बाद से लगातार 22 वर्षों तक आयुर्वेद चिकित्सा के माध्यम से जनसेवा की।
सिरसा में आयोजित कार्यक्रम में जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. राजकुमार गंडा और जिला योग समन्वयक सुरेंद्र पाल नागर विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने डॉ. शर्मा के योगदान को सराहते हुए कहा कि उनकी सेवा ने जिले में आयुर्वेद को एक नई पहचान दी है और उनके अनुभव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगे।
डॉ. शर्मा ने न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाया, बल्कि हजारों मरीजों को प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेदिक पद्धतियों, पंचकर्म, योग और संतुलित आहार के जरिये निरोग रहने की राह दिखाई। उनकी सेवा भावना और सरल व्यवहार के चलते वे क्षेत्र के लोगों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहे।
इस अवसर पर उनके सहयोगी कर्मचारियों ने उन्हें स्मृतिचिन्ह भेंट किए और उनके साथ बिताए गए अनुभवों को साझा किया। फार्मासिस्ट गुरप्रीत सिंह ने कहा, “डॉ. साहब हमारे लिए मार्गदर्शक रहे हैं। उनसे अनुशासन, परिश्रम और मरीजों के प्रति करुणा भाव सीखा।”आयुष योग सहायक बजरंग साहू, योग प्रशिक्षक मोनिका गैना, दर्शन, मनीष और नरेश सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, उनके सहयोगी कर्मचारी, अधिकारीगण और उनके परिजन मौजूद रहे।
डॉ. पवन कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में सभी सहयोगियों और जनमानस का आभार जताते हुए कहा, “मेरे लिए यह 22 वर्षों की यात्रा सेवा, सीख और संतोष से भरी रही। मैं अपने अनुभवों को समाज सेवा में आगे भी उपयोग करूंगा।”