राष्ट्रीय घुड़सवारी प्रतियोगिता में हैली किंग घोड़ा प्रथम, पौड़ी चांदनी घोड़ी द्वितीय
असम राइफल्स का जीनियर घोड़ा तृतीय, टेंट पेगिंग में दिखा साहस और तालमेल
गुरुग्राम
घुड़सवारी खेल देश की परंपरा का प्रतीक
राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित टेंट पेगिंग घुड़सवारी प्रतियोगिता का आयोजन गुरुग्राम स्थित रिक्रूट प्रशिक्षण केंद्र में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रतियोगिता में देशभर से सेना, अर्धसैनिक बलों और विभिन्न राज्य पुलिस बलों की कुल 18 टीमों ने भाग लिया। शुक्रवार को प्रतियोगिता का समापन हुआ, जिसमें घुड़सवारों ने अद्वितीय साहस, तकनीक और घोड़े-सवार के बीच गहरे तालमेल का शानदार प्रदर्शन किया।
हैली किंग के साथ संदीप कुमार बने विजेता
ध्रुव पानुयवेशन मोड के सदस्य संदीप कुमार ने अपने घोड़े हैली किंग के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। संदीप कुमार ने रिंग एंड पेग स्पर्धा में मात्र 6.08 सेकंड में 18 अंक अर्जित कर निर्णायकों और दर्शकों को प्रभावित किया। उनका प्रदर्शन तकनीकी रूप से सटीक, संतुलित और अत्यंत साहसिक रहा, जिसने उन्हें प्रतियोगिता का निर्विवाद विजेता बना दिया।
पौड़ी चांदनी के साथ अंकित कुमार रहे दूसरे स्थान पर
प्रतियोगिता में भारतीय नौसेना के अंकित कुमार ने अपनी घोड़ी पौड़ी चांदनी के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए द्वितीय स्थान प्राप्त किया। उन्होंने 6.11 सेकंड का समय लेकर यह उपलब्धि हासिल की। अंकित कुमार का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि घुड़सवारी में केवल गति ही नहीं, बल्कि सटीक नियंत्रण और घोड़े के साथ विश्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
असम राइफल्स के जीनियर घोड़े ने पाया तृतीय स्थान
असम राइफल्स के राइफलमैन दिनेश कालेकर ने अपने घोड़े जीनियर (जीनियस) के साथ 6.12 सेकंड में स्पर्धा पूरी कर तृतीय स्थान प्राप्त किया। उनका प्रदर्शन भी सराहनीय रहा और दर्शकों ने तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया। वहीं भारतीय थल सेना की 61 कैवेलरी बटालियन के प्रवीन जगताप चौथे स्थान पर रहे।
रिंग एंड पेग स्पर्धा बनी आकर्षण का केंद्र
इस राष्ट्रीय टेंट पेगिंग प्रतियोगिता के तहत आयोजित रिंग एंड पेग स्पर्धा दर्शकों के लिए सबसे रोमांचक रही। इस खेल में तेज रफ्तार से दौड़ते घोड़े पर सवार होकर जमीन में गड़ी छोटी खूंटी को भाले या तलवार की सहायता से उठाया जाता है। यह खेल घुड़सवार के साहस, संतुलन, एकाग्रता और घोड़े के साथ तालमेल की सच्ची परीक्षा होता है।
घुड़सवारी में दिखा साहस, विश्वास और अनुशासन
पूरी प्रतियोगिता के दौरान यह स्पष्ट देखने को मिला कि टेंट पेगिंग केवल एक खेल नहीं, बल्कि साहस, विश्वास और अनुशासन का प्रतीक है। घोड़े की शक्ति, उसकी निष्ठा और सवार के साथ उसका गहरा संबंध इस खेल को विशेष बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन घुड़सवारी परंपरा को जीवित रखने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
पुरस्कार वितरण समारोह में चारु बाली रहीं मुख्य अतिथि
प्रतियोगिता के समापन अवसर पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस परिसर भोंडसी एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की प्रमुख चारु बाली मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने विजेता खिलाड़ियों और घोड़ों को रिबन पहनाकर सम्मानित किया और सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
चारु बाली ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय घुड़सवारी स्पर्धाएं नई प्रतिभाओं को पहचान दिलाने और उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि विजेता खिलाड़ी विशेष रूप से प्रशंसा के पात्र हैं, क्योंकि उन्होंने कड़े मुकाबले में अपनी क्षमता सिद्ध की है।
घुड़सवारी खेल देश की परंपरा का प्रतीक
मुख्य अतिथि ने कहा कि घुड़सवारी खेल न केवल शारीरिक दक्षता, बल्कि मानसिक दृढ़ता और अनुशासन को भी मजबूत करता है। यह खेल भारतीय सेना और सुरक्षा बलों की गौरवशाली परंपरा से जुड़ा हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की पहचान को मजबूत करता है।
बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि रहे मौजूद
इस अवसर पर ब्रिगेडियर संदीप सिंह कश्यप, पूर्व पुलिस महानिदेशक रामकृष्ण, सेवानिवृत्त कर्नल ए.के. यादव, सरप्रताप सोहेल, डॉ. अक्तर अफसर, आकिफ अफसर, निरीक्षक सुनील कुमार, उपनिरीक्षक कृष्ण, राजबीर, प्रवीन्द्र कुमार सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षक और खेल प्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन की सराहना की।
युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी प्रतियोगिता
राष्ट्रीय टेंट पेगिंग घुड़सवारी प्रतियोगिता युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि निरंतर अभ्यास, अनुशासन और घोड़े के साथ विश्वास के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। विजेता घोड़े हैली किंग, पौड़ी चांदनी और जीनियर के प्रदर्शन ने दर्शकों के मन में विशेष छाप छोड़ी।
कुल मिलाकर, गुरुग्राम में आयोजित यह राष्ट्रीय घुड़सवारी स्पर्धा साहस, विश्वास और तालमेल का उत्कृष्ट उदाहरण बनी। प्रतियोगिता ने न केवल देश के सर्वश्रेष्ठ घुड़सवारों को एक मंच प्रदान किया, बल्कि घुड़सवारी खेल के महत्व को भी रेखांकित किया। आने वाले समय में इस तरह के आयोजन भारतीय घुड़सवारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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