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हरियाणा में अब 10 मिनट में मिलेगी एंबुलेंस की सेवा, शामिल होगी 296 नई गाड़ियां, जाने किस जिले को कितनी मिलेगी एंबुलेंस

हरियाणा की नायब सैनी सरकार जल्द ही एंबुलेंस सेवा में क्रांतिकारी सुधार करने जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के बेड़े में 296 नई एंबुलेंस जोड़ी जा रही हैं, जिनमें 70 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) और 167 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) वाहन शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य किसी भी हादसे के स्थान पर 10 मिनट से भी कम समय में पहुंचना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार, नई एंबुलेंस अत्याधुनिक तकनीक और चिकित्सा उपकरणों से लैस होंगी।
 
फरीदाबाद, हिसार, करनाल समेत 7 जिलों में बढ़ेंगी एंबुलेंस, हाईटेक कंट्रोल रूम भी तैयार

Haryana News/ Chandigarh: हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में निरंतर नए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में प्रदेश सरकार स्वास्थ्य विभाग के बेड़े में 296 नई एंबुलेंस शामिल करने जा रही है। बता दें कि कई मर्तबा सड़क हादसों में कुछ मिनटों की देरी जिंदगी पर भारी पड़ जाती है क्योंकि एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती है। नायब सैनी सरकार ने इसे देखते हुए अपने एमरजेंसी एंबुलेंस नेटवर्क को रफ्तार देने का काम करते हुए यह बड़ा कदम उठाया है।

यह विस्तार कई वजहों से जरूरी हो गया था। फिलहाल प्रदेश में करीब 550 एंबुलेंस चल रही हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य किसी भी हादसे या ट्रामा स्पॉट पर दस मिनट से कम समय में पहुंचने का है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार इन एंबुलेंस का मकसद ट्रॉमा, हार्ट अटैक और सड़क हादसों जैसी आपात स्थितियों में रिस्पॉन्स टाइम घटाना है।

नए बेड़े में 70 एंबुलेंस एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) वाली होंगी। वहीं 59 एंबुलेंस को आउटसोर्सिंग के जरिए शामिल किया जाएगा और बाकी 167 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एंबुलेंस की खरीद प्रक्रिया जारी है। इन 167 में से 50 के लिए सड़क सुरक्षा विभाग से बजट स्वीकृत हो चुका है, वहीं बाकी बीएलएस वाहनों का प्रस्ताव वित्त विभाग के पास फाइनल अप्रूवल के लिए लंबित है।

एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस खरीदने पर करीब 33.78 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन एंबुलेंस को प्राथमिक तौर पर एनसीआर से जुड़े जिलों में तैनात किया जाएगा, जहां आपात मामलों की संख्या अधिक है। विभाग का लक्ष्य प्रदेश के हर जिले में कम से कम पांच से छह एंबुलेंस उपलब्ध कराना है।

सात जिलों में एंबुलेंस की संख्या बढ़ाई जाएगी: गुरुग्राम में 27 से बढ़ाकर 35, फरीदाबाद में 20 से 27, पंचकूला में 21 से 27, यमुनानगर में 20 से 25, हिसार में 30 से 33, करनाल में 30 से 31, सिरसा में 32 से बढ़ाकर 37 वाहन। यह विस्तार उन जिलों में सबसे ज्यादा जरूरी था जहां एंबुलेंस की कमी और बढ़ते ट्रैफिक के चलते आपात स्थितियों में देरी हो रही थी।

फिलहाल प्रदेश में 550 एंबुलेंस ऑपरेशन में हैं। इनमें से 86 पहले ही कंडम हो चुकी हैं, वहीं 210 ने अपनी उम्र या माइलेज की सीमा पार कर ली है और उन्हें बदले जाने की तत्काल जरूरत है। एंबुलेंस खरीदी में कम से कम छह महीने लगते हैं, यही वजह है कि सरकार ने तुरंत गैप भरने के लिए हाइब्रिड स्ट्रैटिजी अपनाई और 59 ALS एंबुलेंस आउटसोर्स की।

प्रदेश के कई जिलों में समस्या बेहद गंभीर है। फरीदाबाद में कुल 53 स्वीकृत ड्राइवर पदों के मुकाबले सिर्फ 23 ड्राइवर कार्यरत हैं, जिससे कई एंबुलेंस बेकार खड़ी रहती हैं। अंबाला में भी कई एंबुलेंस कंडम घोषित हो चुकी हैं। हाल ही में रेवाड़ी के सर्कुलर रोड पर एक एंबुलेंस 20 मिनट तक जाम में फंसी रही, जिसमें एक गंभीर रूप से घायल महिला थी।

वहीं, डायल-112 एंबुलेंस सेवा में हिसार जैसे जिलों में पहले रिस्पॉन्स टाइम 12 मिनट था, लेकिन नई व्यवस्था में यह बढ़कर 18 मिनट हो गया था। इन चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने बड़ा सुधार जरूरी समझा। हालांकि अच्छी खबर यह है कि पूरे प्रदेश में एंबुलेंस का औसत रिस्पॉन्स टाइम पिछले तीन महीनों में 16 मिनट से सुधरकर 10 मिनट पर आ चुका है। करनाल जिले में यह 22 मिनट से घटकर 12 मिनट पर आ गया है। लक्ष्य अब इसे 10 मिनट से भी नीचे लाने का है।

तकनीक और चिकित्सा सुविधाओं से लैस होंगी नई एंबुलेंस

नई एंबुलेंस सिर्फ संख्या नहीं बढ़ाएंगी, बल्कि तकनीक से भी लैस होंगी। इनमें रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग, ऑटोमैटिक कॉल-रूटिंग सिस्टम और डायरेक्ट कम्युनिकेशन डिवाइस लगाए जाएंगे। एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में कार्डियक मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट और जरूरी दवाओं जैसी सुविधाएं होंगी।

इन एंबुलेंस को मोबाइल आईसीयू की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। चालक, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन और कॉल सेंटर ऑपरेटरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि कॉल आने से लेकर मरीज को अस्पताल पहुंचाने तक हर कदम पर बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके।

हरियाणा में डायल-112 एमरजेंसी रेस्पॉन्स सिस्टम को और बेहतर बनाने के लिए पूरे प्रदेश में आधुनिक कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जो ट्रॉमा सेंटर और एमरजेंसी सर्विस एरिया के पास बनाए गए हैं। पहले एंबुलेंस कंट्रोल रूम ट्रॉमा सेंटर से काफी दूर हुआ करते थे, जिससे काफी असुविधा होती थी। मोबाइल डेटा टर्मिनल (MDT) डिवाइस की मदद से कंट्रोल रूम अब एंबुलेंस को ट्रैक और ट्रेस कर सकता है, जिससे रिस्पॉन्स टाइम पर नजर रखी जा सकेगी।

आम आदमी को कैसे मिलेगा इस योजना का फायदा?

इस विस्तार का सीधा फायदा प्रदेश के आम नागरिकों को होगा। डायल-112 पर कॉल करने के बाद अब सबसे नजदीकी एंबुलेंस को ऑटोमैटिक कॉल-रूटिंग सिस्टम के जरिए अलर्ट भेजा जाएगा, जिससे जवाबी कार्रवाई का समय काफी कम हो जाएगा। सड़क सुरक्षा विभाग से 50 एंबुलेंस के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है, जो इसी वित्त वर्ष में इस व्यवस्था को पुख्ता करने में मदद करेगा।

प्रदेश में बीते चार साल में डायल-112 पर 2.75 करोड़ से ज्यादा कॉल आ चुकी हैं, जिससे आम लोगों का भरोसा बढ़ा है। और अच्छी खबर यह है कि निजी अस्पतालों की एंबुलेंस को भी इस सिस्टम में जोड़ा जा रहा है, ताकि दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से मदद पहुंचाई जा सके।

साथ ही, प्लानिंग के तहत हरियाणा 112 को एक पूरी तरह से ऑटो-डिस्पैच, एआई-इनेबल्ड और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम में अपग्रेड किया जाएगा। अगले कुछ महीनों में इनमें से 70 ALS एंबुलेंस प्रदेश को उपलब्ध हो जाएंगी। हरियाणा में पुलिस सर्विस का रिस्पॉन्स टाइम 2022 के 12 मिनट से घटकर अब सात मिनट से भी कम हो गया है, लेकिन मेडिकल इमरजेंसी में 2022 के 25 मिनट को 12 मिनट से भी कम करने की चुनौती अब इस नए बेड़े के साथ आसान हो जाएगी।
 

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