https://www.choptaplus.in/

हरियाणा ने पंजाब से नहरी पानी घटाने को कहा: बारिश से घटी मांग, भाखड़ा मेनलाइन में 2500 क्यूसेक पानी कम करने का अनुरोध

26 अगस्त को भी हरियाणा ने इंडेंट घटाकर 7,900 क्यूसेक किया था
 
cm haryana and panjab
पंजाब में फिलहाल कई जिलों के सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में हैं।


 

पंजाब और हरियाणा के बीच पानी प्रबंधन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। हरियाणा सरकार ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) और पंजाब सरकार को पत्र लिखकर नहरी पानी की आपूर्ति कम करने का अनुरोध किया है।

सरकार का तर्क है कि हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण खेतों और कैचमेंट क्षेत्रों में पानी की डिमांड घट गई है, इसलिए नहरों में भेजे जाने वाले पानी की मात्रा को घटाया जाना चाहिए। इस फैसले ने दोनों राज्यों के बीच पहले से मौजूद जल विवाद को फिर से हवा दे दी है।

2500 क्यूसेक पानी कम करने का प्रस्ताव

हरियाणा ने पंजाब से अनुरोध किया है कि उसकी ओर छोड़े जाने वाले 2500 क्यूसेक पानी को कम किया जाए। 29 अगस्त 2025 को हरियाणा कॉन्टैक्ट प्वाइंट (HCP) पर पानी का डिस्चार्ज 8,894 क्यूसेक पाया गया, जबकि राज्य सरकार ने केवल 7,900 क्यूसेक की मांग की थी।


26 अगस्त को भी हरियाणा ने इंडेंट घटाकर 7,900 क्यूसेक किया था, लेकिन पानी की आपूर्ति कम नहीं हुई। अब, जब लगातार बारिश के कारण खेतों और जलाशयों में पर्याप्त पानी है, तो हरियाणा ने 29 अगस्त को नया पत्र भेजकर मात्र 6,250 क्यूसेक पानी की मांग की है।

पहले अतिरिक्त पानी की थी मांग

इस पूरे मामले की विडंबना यह है कि बीते माह हरियाणा ने पंजाब से अतिरिक्त पानी की मांग की थी। तब राज्य सरकार ने कृषि और पेयजल की जरूरतों का हवाला देते हुए नहरों में पानी बढ़ाने की अपील की थी।


लेकिन अब जब मानसून ने पर्याप्त वर्षा दी और नदियों का जलस्तर उफान पर है, हरियाणा ने अपनी मांग बदल दी। इस अचानक यू-टर्न ने सभी का ध्यान खींचा है। खासतौर पर इसलिए कि कुछ ही दिन पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब के सीएम को पत्र लिखकर बाढ़ की स्थिति में अतिरिक्त सहयोग देने की बात कही थी।


पंजाब में गंभीर बाढ़ की स्थिति

पंजाब में फिलहाल कई जिलों के सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में हैं। रावी, ब्यास और सतलुज जैसी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। तटबंध टूटने का खतरा बना हुआ है और राहत-बचाव कार्य लगातार जारी हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान बार-बार पड़ोसी राज्यों से अपील कर रहे हैं कि वे अतिरिक्त पानी अपने हिस्से में लें, ताकि राज्य पर दबाव कम हो सके।


बीबीएमबी का रुख स्पष्ट नहीं

हरियाणा के ताजा पत्र पर अभी तक भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) ने कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। बोर्ड का कहना है कि दोनों राज्यों की जरूरतों और मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए ही अगला कदम उठाया जाएगा।

जल प्रबंधन पर उठ रहे सवाल

हरियाणा का यह कदम एक बार फिर इस बहस को जन्म देता है कि क्या दोनों राज्यों के बीच जल प्रबंधन और आपूर्ति का कोई स्थायी हल निकल पाएगा।

बारिश और बाढ़ के समय पानी घटाने की मांग
सूखे और खेती की आवश्यकता के समय पानी बढ़ाने की मांग
 ये दोनों परिदृश्य दिखाते हैं कि स्थायी और दीर्घकालिक समाधान की जरूरत है।

भविष्य की चुनौतियां

हरियाणा और पंजाब दोनों ही कृषि प्रधान राज्य हैं। सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक जरूरतें पूरी करने के लिए नदियों और नहरों पर अत्यधिक निर्भरता है। ऐसे में

मानसून पर आधारित पानी प्रबंधन बांधों और नहरों की क्षमताऔर पड़ोसी राज्यों के सहयोग पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते दोनों राज्य आपसी तालमेल नहीं बैठाते, तो हर बार मानसून या सूखे के हालात में विवाद खड़ा होगा।


हरियाणा द्वारा पंजाब से नहरी पानी घटाने की मांग मौजूदा बाढ़ और बारिश के हालात में तर्कसंगत लग सकती है, लेकिन इसका राजनीतिक और व्यावहारिक असर दूरगामी होगा। पंजाब पहले से ही बाढ़ से जूझ रहा है और उसे उम्मीद है कि पड़ोसी राज्य सहयोग करेंगे। वहीं, हरियाणा अपने खेतों और नहर क्षेत्रों में घटती मांग का हवाला दे रहा है।
 

Rajasthan