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हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: 2014 की नीति के तहत 5 हजार संविदा कर्मचारी होंगे पक्के, जानें क्या है पूरी डिटेल

 
हरियाणा सरकार ने 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत संविदा कर्मचारियों को पक्का करने के निर्देश जारी किए

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 16 अप्रैल 2026 के फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत संविदा और तदर्थ कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मानव संसाधन विभाग ने 11 अगस्त को सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों को निर्देश जारी किए हैं कि वे पात्र कर्मचारियों की तुरंत पहचान करें और उनके मामलों की जांच के बाद नियमितीकरण के आदेश जारी करें। इस फैसले से ग्रुप-बी, सी और डी के करीब पांच हजार संविदा कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तत्कालीन भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार की 16 जून 2014 और 18 जून 2014 की दो नियमितीकरण नीतियों को सही ठहराया था। इन नीतियों के तहत वे कर्मचारी नियमित किए जाएंगे, जिन्होंने 28 मई 2014 तक स्वीकृत रिक्त पदों पर कम से कम तीन साल की सेवा पूरी कर ली थी, आवश्यक योग्यता रखते हैं और अभी भी सेवा में हैं। वहीं, 7 जुलाई 2014 की तीसरी नीति को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया।

7 जुलाई 2014 की नीति रद्द, लेकिन कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने 7 जुलाई 2014 की नियमितीकरण नीति को रद्द तो कर दिया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इस नीति के तहत पहले से लाभ ले चुके और अभी भी सेवा में बने कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा। ऐसे कर्मचारियों को उनके पद के सबसे निचले वेतनमान में रखा जाएगा। इसका मतलब है कि 7 जुलाई 2014 की नीति के तहत नियमित हुए करीब 14 हजार अतिथि अध्यापकों, तीन हजार बिजली कर्मचारियों और तीन हजार अन्य विभागों के कर्मचारियों की नौकरी बच गई है, हालांकि उन्हें सबसे कम वेतनमान में रखा जाएगा।

पुरानी नियमितीकरण नीतियों के तहत छूटे कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ

सरकार के आदेश में एक और अहम बात यह है कि 1997, 1999, 2003 और 2004 की नियमितीकरण नीतियों के तहत प्रशासनिक कारणों से नियमित नहीं हो सके ग्रुप-सी और डी के तदर्थ, अनुबंध और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के मामलों पर भी विचार किया जाएगा। यदि वे अन्यथा पात्र थे, तो उन्हें भी नियमितीकरण का लाभ दिया जाएगा। सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे इन नीतियों के दायरे में आने वाले सभी पात्र कर्मचारियों की पहचान करें और निर्धारित पात्रता शर्तों को सुनिश्चित करने के बाद सत्यापन के अधीन नियमितीकरण के आदेश जारी करें।

पात्रता तिथि से मिलेंगे पदोन्नति और सेवा लाभ

सरकार ने यह भी साफ किया है कि नियमित होने वाले कर्मचारियों को पात्रता की तिथि से पदोन्नति और अन्य सभी सेवा लाभ दिए जाएंगे। इसके लिए सरकार ने 18 जून 2020, 13 जून 2024 और 17 दिसंबर 2024 के पुराने निर्देशों को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। यानी जिन कर्मचारियों का मामला पात्र पाया जाता है, उन्हें केवल अब से नियमित कर्मचारी नहीं माना जाएगा, बल्कि उनकी पात्रता की तारीख से जुड़े सभी लाभ भी दिए जाएंगे।

क्या है पूरा मामला?

तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार ने साल 2014 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तीन नियमितीकरण नीतियां बनाई थीं। 16 जून और 18 जून 2014 को अधिसूचित दो नीतियों के तहत करीब पांच हजार कर्मचारियों को नियमित किया गया, जिन्होंने 30 जून 2014 तक सेवा के तीन साल पूरे कर लिए थे। 7 जुलाई 2014 को एक तीसरी नीति बनाई गई, जिसके तहत 31 दिसंबर 2018 तक 10 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने की व्यवस्था थी।

अक्टूबर 2014 में राज्य में सरकार बदलने के बाद इस नीति को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। जून 2018 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने तीनों नीतियों को रद्द कर दिया और कर्मचारियों के नियमितीकरण पर रोक लगा दी। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 16 अप्रैल 2026 को शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आठ साल पुराने फैसले को पलटते हुए जून 2014 की दोनों नीतियों को बरकरार रखा।
 

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