Digital Census Haryana 2027: हरियाणा डिजिटल जनगणना शुरू, घर बैठे कैसे भरें ऑनलाइन डेटा, जहां जाने पूरी जानकारी
Haryana News (Sirsa): सिरसा: हरियाणा में जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में डिजिटल जनगणना शुरू हो गई है। इस नई व्यवस्था का शुभारंभ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने टैब के माध्यम से किया। सरकार का दावा है कि डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से जनगणना पहले की तुलना में अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी होगी। इस बार जनगणनाकर्मी मोबाइल ऐप और टैबलेट के जरिए सीधे ऑनलाइन डेटा दर्ज करेंगे। इस दौरान सीएम सैनी ने कहा कि जनगणना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि हमारे विकसित हरियाणा विकसित भारत की आधारशिला है।
जनगणना के दौरान साझा किए गए हर डेटा की गोपनीयता की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। pic.twitter.com/e0NJi7ZwvE
— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) April 16, 2026
इस बार पहली बार दोनों चरणों में स्व-गणना (Self Enumeration) की ऑनलाइन सुविधा दी गई है। यह एक वेब पोर्टल के जरिए होगी, जिसमें लोग घर-घर सर्वे से 15 दिन पहले अपनी जानकारी खुद ऑनलाइन भर सकेंगे। पोर्टल पर फॉर्म भरने के लिए 16 भाषाओं का विकल्प दिया गया है। यह सुविधा पूरी तरह वैकल्पिक है, जो लोग स्व-गणना नहीं करेंगे, वे पारंपरिक तरीके से सरकारी कर्मचारी के घर आने पर डेटा दे सकते हैं। हालांकि, जिन्होंने ऑनलाइन फॉर्म भरा है, उनके डेटा की सत्यता जांचने के लिए भी सरकारी कर्मचारी उनके घर जरूर जाएंगे।

उपायुक्त महेंद्र पाल व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वगणना कर जनगणना 2027 का किया शुभारंभ
— DIPRO Hisar (@dipro_hisar) April 16, 2026
सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को स्वगणना कार्य जल्द से जल्द पूर्ण करने की दी हिदायत pic.twitter.com/YDzsGyZmGr
गौरतलब है कि 2011 के बाद यह पहली जनगणना है और हरियाणा के गठन के बाद से यह राज्य की छठी जनगणना होगी। स्व-गणना 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक चलेगी, जिसके बाद 1 मई से 30 मई 2026 तक घर-घर जाकर मकान सूचीकरण और आवासीय जनगणना का काम किया जाएगा। जनगणना के दूसरे चरण में फरवरी 2027 में जाति संबंधी डेटा इकट्ठा किया जाएगा, जो आजादी के बाद पहली बार होगा। इससे पहले 1931 में ऐसा हुआ था। सीएम सैनी ने स्पष्ट किया कि जनगणना में दिया गया सारा डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा और केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, इसे किसी बाहरी एजेंसी के साथ साझा नहीं किया जाएगा।
इस डिजिटल जनगणना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब आपको सरकारी कर्मचारी के आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि आप अपनी सुविधा के अनुसार घर बैठे मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर से पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर अपना डेटा दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए मोबाइल नंबर और ओटीपी के जरिए लॉगिन करना होगा। इस प्रक्रिया में करीब 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें परिवार के सदस्यों की संख्या, उम्र, शिक्षा, रोजगार, मकान की स्थिति और बिजली-पानी जैसी सुविधाओं की जानकारी शामिल है। एक बार जानकारी सबमिट करने पर एक यूनिक सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी (SE ID) मिलेगी, जिसे सत्यापन के समय गणनाकर्मी को दिखाना होगा।
कर्मचारी अगर ये 3 सवाल पूछें तो जवाब न दें
सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि जनगणनाकर्मी कभी भी आपसे आमदनी यानी महीने की कमाई या बैंक बैलेंस से जुड़ा कोई सवाल नहीं पूछेंगे। साथ ही वे आपसे आधार, पैन या कोई भी अन्य पहचान पत्र दिखाने का दबाव नहीं बना सकते। इसके अलावा बैंक खाता नंबर या ओटीपी जैसे निजी विवरण मांगना भी पूरी तरह गलत है। अगर कोई कर्मचारी ऐसा करता है तो आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए और उसे जवाब नहीं देना चाहिए।
जनगणना में क्या-क्या नियम बदले हैं?
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को इस जनगणना में ‘विवाहित युगल’ माना जाएगा। अगर आपके मोबाइल में एफएम है तो उसे ‘रेडियो’ गिना जाएगा, लेकिन मोबाइल पर यूट्यूब देखना ‘टीवी’ नहीं माना जाएगा, इसके लिए अलग से टीवी होना जरूरी है। वाहनों की बात करें तो कार या जीप की श्रेणी में ट्रैक्टर दर्ज नहीं होगा और ई-रिक्शा या ऑटो को कार या बाइक नहीं माना जाएगा। पानी के लिए कहा गया है कि अगर घर में नल होने के बावजूद आप बोतल या कैन का पानी मंगवाते हैं तो उसे ‘बोटल्ड वाटर’ लिखना होगा। वहीं रसोई के लिए नियम है कि अगर आप घर के एक ही हिस्से में खाना बनाते और सोते हैं तो वह रसोई नहीं मानी जाएगी, रसोई तभी दर्ज होगी जब घर में अलग से हो।
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हर घर बनेगा ‘डिजी डॉट’, जानिए इसके 5 फायदे
इस डिजिटल जनगणना में हर घर को जियो टैग किया जाएगा और मैप पर ‘डिजी डॉट’ के रूप में दर्ज किया जाएगा। इसका पहला फायदा यह है कि बादल फटने, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदा के समय इस मैप से तुरंत पता चल जाएगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में मदद मिलेगी। दूसरा फायदा यह है कि संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन करने में भी इससे मदद मिलेगी और क्षेत्रों का संतुलित बंटवारा हो सकेगा। तीसरा फायदा शहरी प्लानिंग से जुड़ा है, जहां सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों या पार्कों की योजना बनाने में यह मैप उपयोगी साबित होगा। चौथा फायदा यह है कि इससे शहरीकरण की दर और पलायन के क्षेत्रों की सटीक मैपिंग की जा सकेगी। पांचवां और अहम फायदा यह है कि आधार की पहचान के साथ जियो टैगिंग से मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हट जाएंगे, क्योंकि जब वोटर किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटली जुड़ा होगा तो दोहरे पंजीकरण की स्थिति में उसके मूल निवास का पता चल जाएगा।
