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हरियाणा सरकार ने बदले नियम एग्रो फॉरेस्ट प्लांटेशन, अब गार्डन भी वन होंगे

सरकार ने बदले नियम, 3 शर्तें लगाईं; निजी क्षेत्र में लगे पेड़ भी इसके दायरे में
 
हरियाणा वन

वनावरण 1,614.26 वर्ग किलोमीटर, जो राज्य के 3.65% क्षेत्र को कवर करता है।

हरियाणा में वन क्षेत्रों के संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा  बदलाव किया है। सरकार ने वनों की परिभाषा और पहचान के मानदंडों का भी  संशोधन किया है। इसके तहत अब एग्रो फॉरेस्ट प्लांटेशन और गार्डन भी वन का ही हिस्सा होंगे। सरकार ने इसके लिए नियमों में बदलाव किया है।

साथ ही 3 शर्तें लगाईं हैं। कार्रवाई के लिए 2 कमेटियां बनाई गई हैं। इसमें प्राइवेट जमीनों पर लगे पेड़ भी बदलाव के दायरे में आएंगे।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जमीन का एक टुकड़ा डिक्शनरी मीनिंग के अनुसार वन तभी माना जाएगा जब वह निम्नलिखित शर्तों को पूरा करता हो...

वह टुकड़ा अलग-थलग हो और कम से कम 5 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ हो।

यदि वह सरकार द्वारा नोटिफाई वनों से सटा हुआ है तो न्यूनतम 2 एकड़ क्षेत्रफल का होना चाहिए।

उसका कैनोपी डेंसिटी 0.4 या उससे अधिक होना चाहिए।

अधिकारियों ने बताया कि नोटिफिकेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सरकार द्वारा नोटिफाई वनों के बाहर स्थित सभी लीनियर, कॉम्पैक्ट, एग्रो फॉरेस्ट प्लांटेशन और बागों को इस परिभाषा के तहत वन नहीं माना जाएगा। इन नए नियमों से हरियाणा में वन क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण को लेकर एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

इसके बाद क्या होगा...

1. दो कमेटियां बनाएगी सरकार

वन डिफनीशन के बाद अब सरकार अगला कदम उन जमीनों की पहचान करना है जो इसके अंतर्गत आती हैं। ये निजी जमीनें, सामुदायिक जमीनें या पंचायती जमीनें भी हो सकती हैं। इसके लिए दो कमेटियां बनाई गई हैं।

2. ये होगा दोनों कमेटियों का काम

पहली कमेटी, उपायुक्त के अधीन जिला स्तरीय कमेटी होगी, जो इस मामले में प्रस्ताव भेजेगी। इसके बाद दूसरी कमेटी में अतिरिक्त मुख्य सचिव के अधीन स्टेट लेवल कमेटी उन प्रस्तावों पर विचार करेगी और अपनी सिफारिशें देगी। वन भूमि की नोटिफिकेशन के बाद, मुख्य सचिव सर्वोच्च न्यायालय (SC) में एक हलफनामा दायर किया जाएगा।

क्या बोले अधिकारी

पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) आनंद मोहन शरण ने बताया, हमने गोदावर्मन मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार वन को परिभाषित किया है। इससे पहले, कोई परिभाषा नहीं थी।

इसलिए किए गए बदलाव

वन को लेकर किए गए बदलावों के पीछे सुप्रीम कोर्ट का एक अहम फैसला है। गोदावर्मन मामले में 12 दिसंबर 1996 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि "वन" शब्द का कोई डिक्शनरी मीनिंग नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने सभी राज्यों को ऐसे सभी वन क्षेत्रों की पहचान करने और उनकी रिपोर्ट बनाने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि यह रिपोर्ट चाहे भारतीय वन अधिनियम के तहत नोटिफाई हो, राजस्व रिकॉर्ड में हो, या केवल डिक्शनरी मीनिंग में ही हो, सभी नेचुरल फॉरेस्ट लैंड पर वन (संरक्षण) एक्ट, 1980 के नियम एक समान रूप से लागू होंगे।

हरियाणा में अभी कितना है वन का एरिया

हरियाणा में अभी कुल फॉरेस्ट एरिया 3,307.28 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 1,614.26 वर्ग किलोमीटर वनावरण और 1,693.02 वर्ग किलोमीटर वृक्षावरण शामिल है। यह राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 7.48% है। वनावरण 1,614.26 वर्ग किलोमीटर, जो राज्य के 3.65% क्षेत्र को कवर करता है।

वृक्षावरण 1,693.02 वर्ग किलोमीटर, जो राज्य के पूरे 3.83% क्षेत्र को कवर करता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हरियाणा में वन क्षेत्र अपेक्षाकृत कम है, और राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार, प्रत्येक राज्य के लिए 20% कवरेज का लक्ष्य है।

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