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हरियाणा गेस्ट टीचरों के लिए बड़ी खुशखबरी, हाई कोर्ट ने 2 महीने में पक्का करने के दिए आदेश

 
Punjab and Haryana High Court order on guest teachers regularization by Justice Sandeep Moudgil

चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पिछले 20 सालों से पढ़ा रहे हजारों गेस्ट टीचरों के लिए बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है और बरसों से अस्थायी नौकरी के फेर में फंसे इन शिक्षकों को दो महीने के भीतर पक्का (नियमित) करने का आदेश जारी कर दिया है। 

इस फैसले से राज्य के करीब 12,700 गेस्ट टीचरों के परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि अब उन्हें भी रेगुलर सरकारी कर्मचारियों की तरह सभी सर्विस और रिटायरमेंट के फायदे मिल सकेंगे।  हाई कोर्ट के जस्टिस संदीप मोदगिल की बेंच ने सुखविंदर सिंह और अन्य शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह साफ कर दिया कि जो शिक्षक दो दशक से बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, उन्हें सरकार जब चाहे तब हटाने वाली 'अस्थायी व्यवस्था' नहीं मान सकती। 

कोर्ट ने हरियाणा सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत इन सभी याचिकाकर्ताओं की नौकरियों को दो महीने के भीतर पक्का करे और इन्हें सभी परिणामी सेवा लाभ सौंपे।  अदालत में सरकार ने दलील दी थी कि इन शिक्षकों की भर्ती पक्के नियमों के तहत नहीं हुई थी और इन्हें सिर्फ काम चलाने (स्टॉप-गैप अरेंजमेंट) के लिए रखा गया था, इसलिए ये नियमित होने के हकदार नहीं हैं। 

लेकिन हाई कोर्ट ने सरकार की इस बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार की यह दलील मान ली जाए तो कर्मचारियों को पक्का करने की नीतियों का मकसद ही खत्म हो जाएगा, क्योंकि कॉन्ट्रैक्ट पर रखे जाने वाले लोग हमेशा आम भर्ती प्रक्रिया से अलग ही रखे जाते हैं।  

जस्टिस संदीप मोदगिल ने सरकार को आईना दिखाते हुए कहा कि इन गेस्ट टीचरों की भर्ती कोई पिछले दरवाजे (बैकडोर एंट्री) से नहीं हुई थी। साल 2005-06 में बाकायदा अखबारों में विज्ञापन निकाला गया था, कमेटियां बनी थीं, दस्तावेजों की जांच हुई थी और पूरी मेरिट लिस्ट तैयार करके ही इन्हें स्कूलों में जॉइन करवाया गया था। ऐसे में 20 साल तक इनसे लगातार काम लेने के बाद सरकार इन्हें अस्थायी कहकर अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती।  

कोर्ट ने अपने फैसले में शिक्षकों के सम्मान को लेकर बेहद गंभीर और बड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि मास्टर जी समाज और देश बनाने की सबसे मजबूत नींव होते हैं। उन्हें स्कूलों में खाली जगह भरने के लिए किसी गाड़ी के 'स्पेयर पार्ट' की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जब सरकार खुद मानती है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी थी और इसी वजह से इनसे लगातार 20 साल काम लिया गया, तो अब इन्हें इनके अधिकारों से वंचित रखना पूरी तरह से आत्मविरोधी और गलत है। 

इस फैसले को हाल ही में 16 अप्रैल 2026 को आए सुप्रीम कोर्ट के 'मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य' केस के फैसले से सबसे बड़ा सहारा मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में हुड्डा सरकार के समय की 2014 की नियमितीकरण नीतियों को पूरी तरह से कानूनी और वैध माना था। हाई कोर्ट ने कहा कि जब देश की सबसे बड़ी अदालत ने ही इस नीति पर मुहर लगा दी है, तो अब गेस्ट टीचरों को पक्का करने का रास्ता पूरी तरह साफ है क्योंकि ये शिक्षक इस नीति की सभी शर्तों को पूरा करते हैं।  

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गेस्ट टीचर एसोसिएशन के नेता रघु वत्स ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए बताया कि हरियाणा में इस समय लगभग 12,700 गेस्ट टीचर पिछले 20 साल से पूरी ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हाई कोर्ट के इस आदेश ने उनकी बरसों की लंबी और थका देने वाली कानूनी लड़ाई को सफल बना दिया है और उन्हें समाज में एक शिक्षक के तौर पर खोया हुआ सम्मान वापस दिलाया है। 

अब शिक्षकों को उम्मीद है कि हरियाणा सरकार कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए इसे बिना देरी किए तुरंत लागू करेगी।
 

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