हरियाणा में जोहड़ों को लेकर ग्राम पंचायतों के लिए बड़ा आदेश, अनदेखी पर सरपंच के लगेगा जुर्माना
चंडीगढ़। हरियाणा में 'स्वच्छ गांव, स्वच्छ जलवायु अभियान' के तहत अब गांवों के जोहड़ों (तालाबों) को पूरी तरह से कचरा मुक्त बनाया जाएगा। जमीन के नीचे के पानी (भूजल) को प्रदूषित होने से बचाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहली बार गांवों की तरफ रुख किया है। बोर्ड ने पंचायतों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अगर जोहड़ों में कचरा मिला, तो सीधे पंचायत पर जुर्माना लगाया जाएगा। यह अभियान अप्रैल 2026 से शुरू होकर अप्रैल 2027 तक पूरे एक साल चलेगा।
गांवों में बारिश और नालियों के पानी को इकट्ठा करने का सबसे बड़ा जरिया जोहड़ ही होते हैं। अक्सर लोग इनमें घरों का कचरा डाल देते हैं, जिससे पानी दूषित होता है और इसका सीधा असर भूजल स्तर पर पड़ता है। अभी तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सिर्फ शहरों के प्रदूषण पर नजर रखता था, लेकिन अब गांवों के जोहड़ों को बचाने के लिए भी बोर्ड ने पंचायतों की जिम्मेदारी तय कर दी है। इस पूरे अभियान की देखरेख के लिए ब्लॉक स्तर पर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं, गांव के स्तर पर पंचायत सचिव, सरपंच और वार्ड पंच इस काम को संभालेंगे।
जोहड़ों में कचरा गिरने से रोकने के लिए पंचायतें अपने बजट के हिसाब से कड़े कदम उठा सकती हैं। पंचायत चाहे तो जोहड़ के चारों तरफ जाली लगवा सकती है। अगर पंचायत के पास अच्छा फंड है, तो पक्की चारदीवारी भी करवाई जा सकती है। कचरा जोहड़ तक न पहुंचे, इसके लिए हर घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए पंचायत खुद या किसी प्राइवेट एजेंसी के साथ समझौता करके घर-घर से कचरा उठवा सकती है।
एक साल तक चलने वाले इस जागरूकता अभियान के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड खुद गांवों में जाकर जोहड़ों की जांच करेगा। जांच के दौरान अगर किसी जोहड़ में कचरा तैरता हुआ मिला, तो संबंधित पंचायत पर 500 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शिखा ने बताया कि इस अभियान को लेकर जल्द ही सरकार की तरफ से पक्की गाइडलाइन आने वाली हैं, जिन्हें तुरंत लागू कर दिया जाएगा। फिलहाल ग्राम सभा की बैठकों में पंचायतें एमओयू (समझौता पत्र) पर साइन कर रही हैं। वहीं, आम नागरिक छवि कौशिक का कहना है कि यह एक बहुत अच्छी शुरुआत है। जोहड़ों में कचरा नहीं जाएगा तो भूजल भी साफ रहेगा और लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी मिल सकेगा।
