हरियाणा में ट्रेन से कट कर कांवड़िए की मौत।

सावन माह की शिवरात्रि पर जहां चारों ओर भोलेनाथ की भक्ति में डूबे श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा हुआ है, वहीं झज्जर जिले से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां डाक कांवड़ यात्रा में शामिल एक पटवारी की रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन से कटकर दर्दनाक मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि हादसे का मुख्य कारण डीजे की तेज आवाज बनी, जिसके चलते वह ट्रेन की आवाज नहीं सुन सका।
डीजे की तेज आवाज में दब गई ट्रेन की आवाज
यह हादसा झज्जर जिले के दुजाना इलाके में उस वक्त हुआ जब मृतक देवेंद्र अपने साथियों के साथ डाक कांवड़ लेकर लौट रहा था। देवेंद्र झज्जर के गांव बिरोहड़ का रहने वाला था और चरखी दादरी जिले के बोंद कलां गांव में पटवारी के पद पर कार्यरत था।
मंगलवार शाम वह रेलवे ट्रैक पार कर रहा था तभी वहां से एक पैसेंजर ट्रेन गुजरी और वह उसकी चपेट में आ गया।
मौके पर मौजूद जीआरपी जांच अधिकारी सत्य प्रकाश ने बताया कि जिस वक्त हादसा हुआ, वहां डीजे की तेज आवाज बज रही थी। इसी कारण देवेंद्र को आने वाली ट्रेन का आभास नहीं हो पाया और हादसे का शिकार हो गया।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर झज्जर नागरिक अस्पताल में रखवाया, जहां बुधवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
गांव में पसरा मातम, जल वहीं चढ़ाया गया
हादसे के बाद गांव बिरोहड़ में मातम छा गया है। देवेंद्र हर साल की तरह इस बार भी गांव वालों के साथ डाक कांवड़ लेने गया था। मंगलवार को जब कांवड़ यात्रा दुजाना के पास रेलवे ट्रैक से गुजर रही थी, तभी यह हादसा हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फाटक बंद था और ट्रेन आने वाली थी, लेकिन डीजे की शोरगुल में किसी को कुछ सुनाई नहीं दिया। जैसे ही देवेंद्र ट्रैक पर चढ़ा, वैसे ही ट्रेन आ गई और वह उसकी चपेट में आ गया।
शिव भक्तों ने जल वहीं पास में ही चढ़ा दिया और पूरी यात्रा को दुखभरे माहौल में विराम देना पड़ा। हादसे के बाद श्रद्धालु सहम गए और यात्रा को बीच में रोक दिया गया।
परिवार में थी जिम्मेदारियों की लम्बी फेहरिस्त
मृतक देवेंद्र विवाहित था और दो बच्चों का पिता था। वह तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। देवेंद्र का एक भाई हरियाणा पुलिस में कार्यरत है, जबकि दूसरा भाई ग्राम सचिव के पद पर है। अपने परिवार का सहारा माने जाने वाले देवेंद्र की असामयिक मृत्यु ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
पिता पप्पूराम ने बताया कि देवेंद्र हर साल कांवड़ यात्रा में भाग लेता था और बहुत श्रद्धा से जल चढ़ाता था। इस बार की यात्रा उसके जीवन की आखिरी यात्रा बन गई।
प्रशासन और समाज के लिए सबक
यह हादसा प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी है। डीजे की तेज आवाज जहां धार्मिक उत्सवों में जोश भर देती है, वहीं यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। प्रशासन को चाहिए कि डाक कांवड़ या अन्य तीर्थ यात्राओं के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करवाए और रेलवे ट्रैक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई जाए।
शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर झज्जर में हुए इस दर्दनाक हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं और एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि धार्मिक आस्था के साथ सुरक्षा को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है।