हरियाणाः लाडो लक्ष्मी योजना के फार्म सत्यापन में लापरवाही पर 9 ग्राम सचिव निलंबित
लाडो लक्ष्मी योजना में आवेदनों का सत्यापन न करने पर 9 ग्राम सचिव निलंबित
सीईओ अमित कुमार ने की सख्त कार्रवाई, निलंबित अधिकारियों को मुख्यालय न छोड़ने के दिए निर्देश
निलंबित कर्मचारियों में इंद्री ब्लॉक का एक और नीलोखेड़ी ब्लॉक के 8 ग्राम सचिव शामिल
सभी निलंबित अधिकारियों के खिलाफ अलग से आरोप पत्र जारी किया जाएगा
करनाल। लाडो लक्ष्मी योजना के तहत महिलाओं के आवेदनों का सत्यापन नहीं करने पर जिला परिषद के सीईओ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 ग्राम सचिवों को निलंबित कर दिया है। जांच में सामने आया कि कई गांवों में पात्र महिलाओं के आवेदन तो लिए गए, लेकिन उनका समय पर सत्यापन नहीं किया गया, जिसके कारण वे योजना के लाभ से वंचित रह गईं। जिला परिषद के सीईओ अमित कुमार द्वारा जारी आदेश में निलंबित अधिकारियों को बिना पूर्व अनुमति के मुख्यालय न छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
नीलोखेड़ी और इंद्री ब्लॉक के कर्मचारियों पर कार्रवाई
निलंबित किए गए ग्राम सचिवों में इंद्री ब्लॉक और नीलोखेड़ी ब्लॉक के कर्मचारी शामिल हैं। इंद्री ब्लॉक के स्वर्ण माजरा गांव के ग्राम सचिव अमित कुमार को सस्पेंड किया गया है। वहीं नीलोखेड़ी ब्लॉक के डबरथला गांव के ग्राम सचिव अमित, जांबा गांव के ग्राम सचिव सुनील कुमार, कोयर गांव के ग्राम सचिव जितेंद्र कुमार, शामगढ़ गांव के ग्राम सचिव नरेश कुमार, सिद्धपुर गांव के ग्राम सचिव मंगतराम और सुलतानपुर गांव के ग्राम सचिव अमित अहलावत को भी निलंबित किया गया है।
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सीईओ ने जारी किए सख्त निर्देश
जिला परिषद के सीईओ अमित कुमार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान सभी ग्राम सचिव संबंधित कार्यालय से जुड़े रहेंगे और बिना पूर्व अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। इस दौरान उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। साथ ही सभी के खिलाफ अलग से आरोप पत्र भी जारी किया जाएगा।
क्या है लाडो लक्ष्मी योजना
लाडो लक्ष्मी योजना हरियाणा सरकार की एक सामाजिक कल्याण योजना है, जिसका उद्देश्य गरीब परिवारों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना 1 जनवरी 2026 से लागू हुई। इसके तहत 23 से 60 वर्ष की पात्र महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जाती है। पात्रता के लिए परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 6,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
