तीन पीढ़ियों की सैन्य विरासत को आगे बढ़ाएंगी नीतू, ननिहाल लुदेसर पहुंची एयरफोर्स में चयनित नीतू, बधाई देने उमड़ा पूरा गांव
तीन पीढ़ियों की सैन्य विरासत को आगे बढ़ाएंगी नीतू
भारतीय वायुसेना में हुआ चयन
चोपटा/भादरा। सिरसा। जिले के गांव लुदेसर की नाती और भारतीय वायुसेना में चयनित नीतू का गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। नीतू का सिरसा और उनके ननिहाल गांव लुदेसर से बचपन से गहरा जुड़ाव रहा है। उनका बचपन यहीं बीता तथा प्रारंभिक शिक्षा दयानंद स्कूल, सिरसा से हुई। भारतीय वायुसेना की AEL (एरोनॉटिकल इंजीनियर इलेक्ट्रॉनिक्स) शाखा में चयन होने के बाद जब नीतू अपने ननिहाल गांव पहुंचीं तो उन्हें बधाई देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और बुजुर्ग एकत्रित हुए तथा उनकी उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया।
क्षेत्र के लिए गर्व की बात है कि राजस्थान के भादरा क्षेत्र से जुड़ी होनहार बेटी नीतू का चयन भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) में AEL (Aeronautical Engineer Electronics) ब्रांच के लिए हुआ है। नीतू ने AFCAT-2 2025 परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद SSB इंटरव्यू एवं CPSS (पायलट एप्टीट्यूड टेस्ट) सफलतापूर्वक पास किया और भारतीय वायुसेना में अधिकारी बनने का सपना साकार किया।
नीतू का पैतृक संबंध राजस्थान के अनूपशहर (भादरा) से है। उनके दादाजी रामस्वरूप कसवाँ हैं तथा उनके पिता सूबेदार (सेवानिवृत्त) वेद प्रकाश भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 25 ग्रेनेडियर्स यूनिट में सेवाएं दे चुके हैं।
नीतू ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा आर्मी पब्लिक स्कूल, श्रीगंगानगर से प्राप्त की तथा उच्च शिक्षा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने एनसीसी एयर विंग (3 पंजाब एयर स्क्वाड्रन, पटियाला) में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2023 की गणतंत्र दिवस परेड (RDC) दिल्ली में उन्होंने अपने डायरेक्ट्रेट (पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश एवं चंडीगढ़) का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रतिष्ठित कैंप में उन्होंने 'बेस्ट कैडेट' कैटेगरी में अपनी डायरेक्ट्रेट की तरफ से हिस्सा लिया और पूरे देश में टॉप 7 में अपनी जगह बनाई, जो किसी भी कैडेट के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।
नीतू की सफलता के पीछे उनके परिवार की सैन्य परंपरा और प्रेरणा का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही अपने पिता सूबेदार वेद प्रकाश और परनाना सूबेदार भीम सिंह गोदारा की वीरता एवं अनुशासन की कहानियां सुनकर उनके मन में देश सेवा का जज्बा पैदा हुआ।
उनके परनाना सूबेदार भीम सिंह गोदारा मूल रूप से गांव लुदेसर, जिला सिरसा (हरियाणा) के निवासी थे। उन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना की राजपूताना राइफल्स में सेवा दी और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा मोर्चे पर बहादुरी से लड़ाई लड़ी। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 'बर्मा स्टार' सहित कई प्रतिष्ठित सैन्य पदकों से सम्मानित किया गया था।
नीतू की यह उपलब्धि केवल उनके परिवार ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। विशेष बात यह है कि दादा रामस्वरूप कसवान के परिवार से एक साथ तीन युवाओं ने सैन्य सेवाओं में स्थान प्राप्त कर परिवार की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है। इनमें सुशील पूनिया का चयन टेरिटोरियल आर्मी में तथा रविंद्र गोदारा का चयन आर्मर्ड रेजिमेंट (अग्निवीर) में हुआ है।
परिवार और क्षेत्र के लोगों ने नीतू की इस सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि क्षेत्र की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। नीतू ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों, एनसीसी प्रशिक्षण और परिवार की सैन्य विरासत को दिया है।
