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पत्रकार छत्रपति हत्याकांड: 7 साल बाद राम रहीम बरी, हाई कोर्ट ने पलटा उम्रकैद का फैसला

सिरसा के पत्रकार हत्याकांड में आया बड़ा फैसला, 7 साल बाद राम रहीम को मिली क्लीन चिट
 
Dera chief Gurmeet Ram Rahim Singh acquitted by Punjab and Haryana High Court in journalist Ram Chander Chhatrapati murder case.

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को शनिवार को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने 2002 के बहुचर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को बरी कर दिया है। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की बेंच ने 2019 में सीबीआई कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया है। हालांकि, डेरा प्रमुख को अभी जेल में ही रहना होगा क्योंकि वह साध्वियों से रेप सहित अन्य मामलों में सजा काट रहे हैं।

7 साल बाद पलटा फैसला

पंचकूला की स्पेशल सीबीआई अदालत ने जनवरी 2019 में राम रहीम को छत्रपति की हत्या की साजिश रचने का दोषी माना था। तब कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब सात साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद, हाई कोर्ट ने उनकी अपील पर सुनवाई करते हुए उन्हें हत्या के इन आरोपों से मुक्त कर दिया है।

बाकी दो दोषियों को राहत नहीं

जहां एक तरफ राम रहीम को इस बड़े मामले में क्लीन चिट मिल गई है, वहीं इसमें शामिल दो अन्य आरोपियों को हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट के विस्तृत आदेश के बाद ही साफ हो पाएगा कि राम रहीम को किन कानूनी आधारों पर यह राहत दी गई है।

2002 में हुई थी पत्रकार की हत्या

सिरसा से प्रकाशित होने वाले एक स्थानीय अखबार के संपादक रामचंद्र छत्रपति को अक्टूबर 2002 में उनके घर के बाहर गोलियों से छलनी कर दिया गया था। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। दरअसल, छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा प्रमुख के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों वाली एक गुमनाम चिट्ठी छापी थी, जिसके बाद यह खौफनाक वारदात हुई। मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई थी।

सीबीआई की लंबी जांच और सालों चली कानूनी लड़ाई के बाद आए हाई कोर्ट के इस फैसले ने सबको चौंका दिया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या छत्रपति का परिवार अब इंसाफ के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा?
 

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