हरियाणा सिरसा: गांव रुपावास में तीसरी बेटी के जन्म पर दंपति ने मनाया जश्न, बनी समाज के लिए प्रेरणा
सिरसा (हरियाणा)। आज के दौर में जहां समाज के कई हिस्सों में बेटियों को बोझ समझा जाता है, वहीं हरियाणा के सिरसा जिले के गांव रुपावास के एक दंपति ने बेटियों को गर्व और सम्मान का दर्जा देते हुए समाज को एक नई दिशा दी है। गांव के प्रहलाद कड़वासरा और उनकी पत्नी पिंकी ने अपनी तीसरी बेटी दित्या के जन्म पर न सिर्फ खुशियां मनाई, बल्कि पारंपरिक तरीके से कुआं पूजन कर मिठाइयां बांटीं और मंगल गीत गाकर समाज को प्रेरणा दी।

यह घटना सरकार के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी अपनाओ” अभियान को वास्तविक स्वरूप देती है। ग्रामीणों का कहना है कि इस दंपति का निर्णय समाज में बेटियों के प्रति सोच बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
प्रहलाद और पिंकी: बेटियों को वरदान मानने वाला परिवार
गांव रुपावास के निवासी प्रहलाद सिंह कड़वासरा और पिंकी की शादी साल 2012 में हुई थी। शादी के बाद 2013 में उनकी पहली बेटी प्रसन्ना का जन्म हुआ। इसके बाद साल 2019 में दूसरी बेटी रुही ने जन्म लिया और अब 2025 में उनकी तीसरी बेटी दित्या का जन्म हुआ है।
तीसरी बेटी के जन्म पर परिवार ने घर में कुआं पूजन कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर मंगल गीत गाए गए और मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया गया। प्रहलाद और पिंकी का कहना है कि वे बेटियों की पढ़ाई-लिखाई और भविष्य को लेकर पूरी तरह सजग हैं।
“बेटियां चाहे जिस भी क्षेत्र में पढ़ना चाहें, उनकी हर जरूरत पूरी की जाएगी। बेटों की तरह ही उन्हें हर अवसर मिलेगा,” — पिंकी कड़वासरा
कठिन परिस्थितियों से मिली सीख
प्रहलाद सिंह ने बताया कि जब वे मात्र एक महीने के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। इसके बाद उनकी मां संतो देवी ने अकेले ही उन्हें पाला-पोसा। जीवन संघर्ष से भरा रहा।
शादी के कुछ साल बाद उनकी मां बीमार रहने लगीं और इलाज के दौरान परिवार की जमीन भी बिक गई। साल 2020 में उनकी मां का भी निधन हो गया। इन कठिन परिस्थितियों में भी प्रहलाद सिंह ने बेटियों के जन्म को ईश्वर का आशीर्वाद माना और समाज की रूढ़ियों को तोड़ते हुए हर बार बेटी के जन्म पर खुशियां मनाईं।
तीसरी बेटी के जन्म पर विशेष उत्सव
गांव रुपावास में जब तीसरी बेटी दित्या का जन्म हुआ, तो प्रहलाद और पिंकी ने कुआं पूजन कर उत्सव मनाने का निर्णय लिया। इस दौरान गांव के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। मंगल गीत गाए गए और मिठाई बांटकर खुशी साझा की गई।
ग्रामीणों ने भी इस आयोजन की सराहना की। उनका कहना था कि यह परिवार समाज के लिए प्रेरणा है और इससे अन्य दंपति भी बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच अपनाएंगे।
ग्रामीणों ने की तारीफ
इस मौके पर गांव के कई प्रमुख लोग जैसे उधमी राम कड़वासरा, रणधीर कड़वासरा, चंद्रसेन कड़वासरा, विक्रम कड़वासरा, प्रभु कड़वासरा, भीम कड़वासरा, हरी सिंह, शीलू निर्बाण, सुखदेव गिल, रोहतास फौजी सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
सभी ने प्रहलाद और पिंकी के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्य समाज में बेटियों को लेकर नई सोच पैदा करेगा।
समाज के लिए संदेश
हरियाणा, जो कभी लिंगानुपात की समस्या के लिए जाना जाता था, अब धीरे-धीरे बदल रहा है। प्रहलाद और पिंकी जैसे परिवार इस बदलाव की जीती-जागती मिसाल हैं। जहां कई जगह लोग आज भी बेटियों को गर्भ में ही खत्म कर देते हैं, वहीं इस परिवार ने तीसरी बेटी के जन्म पर उत्सव मनाकर समाज को एक नया दृष्टिकोण दिया है।
“हम अपनी बेटियों की परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ेंगे और अब आगे कोई संतान पैदा नहीं करेंगे। — प्रहलाद सिंह कड़वासरा
गांव रुपावास के दंपति प्रहलाद और पिंकी का यह कदम साबित करता है कि समाज बदल रहा है और बेटियों को बराबरी का हक मिल रहा है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का असली अर्थ तभी पूरा होगा जब हर परिवार बेटियों को बेटों की तरह अपनाएगा और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर देगा।
यह परिवार समाज के लिए प्रेरणा है और आने वाली पीढ़ी के लिए एक सकारात्मक उदाहरण भी। हरियाणा के सिरसा जिले के गांव रुपावास में दंपति ने तीसरी बेटी *दित्या* के जन्म पर कुआं पूजन कर मनाया उत्सव।
बेटियों को दिया बेटों जैसा सम्मान, समाज को मिली नई प्रेरणा।
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