राजस्थान हाईकोर्ट ने इन 2 भर्तियों पर लगाई रोक, अगर आपने भी भरा है फार्म तो देखें बड़ी अपडेट
राजस्थान हाईकोर्ट ने 25 जुलाई 2026 को दो अलग-अलग भर्ती मामलों में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किए हैं। पहला मामला चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 से जुड़ा है, जिसमें खंडपीठ ने एकलपीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें शून्य अंक वाली श्रेणियों की मेरिट सूची रद्द कर नई चयन सूची जारी करने के निर्देश दिए गए थे। दूसरा मामला कृषि पर्यवेक्षक भर्ती-2025 का है, जिसमें तीन विवादित प्रश्नों के उत्तरों को लेकर अदालत ने अंतिम चयन सूची जारी करने और नियुक्ति प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है।
चतुर्थ श्रेणी भर्ती-2024: शून्य अंक वालों की नियुक्ति पर विवाद
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) की चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 में शून्य अंक (जीरो से अधिक, एक से कम) पाने वाले अभ्यर्थियों के चयन को लेकर विवाद सामने आया था。इस भर्ती में 21 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी, जो राज्य सरकार की सबसे बड़ी भर्तियों में से एक है。बोर्ड ने यह परीक्षा 19 से 21 सितंबर 2025 तक कंप्यूटर आधारित (CBT) माध्यम से आयोजित करवाई थी。
एकलपीठ का आदेश: मेरिट सूची रद्द, न्यूनतम अंक तय करने के निर्देश
इस मामले में पहले हाईकोर्ट की एकलपीठ (जस्टिस आनंद शर्मा) ने विभिन्न आरक्षित श्रेणियों की मेरिट सूची रद्द करने और न्यूनतम अंक तय कर नई चयन सूची जारी करने के निर्देश दिए थे。एकलपीठ ने टिप्पणी की थी कि किसी भी भर्ती में न्यूनतम अंक तय करना आवश्यक है और इसके बिना चयन प्रक्रिया असंवैधानिक मानी जाएगी।कोर्ट ने यह भी कहा था कि भले ही पद चतुर्थ श्रेणी का हो, लेकिन सरकारी सेवा में एक न्यूनतम योग्यता स्तर (बेसिक स्टैंडर्ड) होना जरूरी है。
खंडपीठ की रोक: राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई
एकलपीठ के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की खंडपीठ में विशेष अपील दायर की।25 जुलाई 2026 को जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए एकलपीठ के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी।
सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने अदालत में पक्ष रखा।अपील में तर्क दिया गया कि:
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भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद 22 मई 2026 को एकलपीठ ने नई शर्त लागू कर दी, जबकि भर्ती नियमों और विज्ञापन में न्यूनतम अंक निर्धारित करने का कोई प्रावधान नहीं था
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1999 के वैधानिक सेवा नियमों और भर्ती विज्ञापन में कोई न्यूनतम अर्हता अंक निर्धारित नहीं किए गए थे
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एक बार भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों को नहीं बदला जा सकता
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एकलपीठ के आदेश से कई चयनित अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं, जो इस मामले में पक्षकार भी नहीं थे
खंडपीठ ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।फिलहाल एकलपीठ के आदेश लागू नहीं होंगे।
कृषि पर्यवेक्षक भर्ती-2025: तीन विवादित प्रश्नों पर रोक
दूसरा मामला कृषि पर्यवेक्षक भर्ती-2025 से जुड़ा है, जिसमें लगभग 1,100 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी।यह परीक्षा 10 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई थी, फाइनल आंसर-की 15 जून 2026 को जारी की गई और दस्तावेज सत्यापन के लिए अंतरिम परिणाम 23 जून 2026 को जारी किया गया था。
तीन सवालों पर क्यों है विवाद?
इस भर्ती परीक्षा में तीन विवादित प्रश्नों और उनके उत्तरों को लेकर अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन प्रश्नों के उत्तरों में त्रुटियां हैं, जिससे मेरिट और चयन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
मुख्य विवाद सवाल नंबर-56 को लेकर है:
"इनमें से कौनसी मवेशियों की द्वि-प्रयोजनी नस्ल हैं — (A) थारपारकर (B) सिंधी (C) साहिवाल (D) डांगी"
कर्मचारी चयन बोर्ड ने प्रारंभिक आंसर-की में इसका जवाब थारपारकर को सही माना, लेकिन फाइनल आंसर-की में डांगी को सही मान लिया।याचिकाकर्ताओं के वकील हरेंद्र नील ने अदालत में बताया कि:
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RPSC ने यही सवाल स्कूल लेक्चरर एवं कोच भर्ती-2025 में पूछा था, जिसमें थारपारकर को ही सही माना गया था
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कृषि विभाग और पशुपालन विभाग की किताबों में भी थारपारकर को ही सही माना गया है
एकलपीठ का आदेश: अंतिम चयन सूची पर रोक
इस मामले की सुनवाई जस्टिस गणेशराम मीणा की एकलपीठ ने की।याचिका सतीश कुमार मीणा और अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दायर की गई थी।
अदालत ने 25 जुलाई 2026 को फिलहाल अंतिम चयन सूची जारी करने और नियुक्ति प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है।साथ ही राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड और प्रमुख शासन सचिव, कृषि विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है。जब तक अदालत की ओर से अगला आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक न तो अंतिम परिणाम जारी किया जा सकेगा और न ही चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जा सकेगी।
दोनों आदेशों का हजारों अभ्यर्थियों पर पड़ेगा असर
हाईकोर्ट के इन दोनों अंतरिम आदेशों का असर हजारों अभ्यर्थियों पर पड़ेगा।
चतुर्थ श्रेणी भर्ती-2024: 21 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी।खंडपीठ की रोक से उन अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत मिली है जिन्हें एकलपीठ के आदेश के बाद चयन रद्द होने का डर था。
कृषि पर्यवेक्षक भर्ती-2025: लगभग 1,100 पदों के लिए परीक्षा हुई थी。इस रोक से उन अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है जो लंबे समय से परिणाम का इंतजार कर रहे थे।
अब दोनों मामलों में अगली सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत के अगले निर्देशों के आधार पर भर्ती प्रक्रियाओं की आगे की स्थिति तय होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: चतुर्थ श्रेणी भर्ती-2024 पर क्या रोक लगी है?
उत्तर: हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के उस आदेश पर रोक लगाई है जिसमें शून्य अंक वाली श्रेणियों की मेरिट सूची रद्द कर नई चयन सूची जारी करने को कहा गया था। अब फिलहाल एकलपीठ का आदेश लागू नहीं होगा।
प्रश्न: कृषि पर्यवेक्षक भर्ती-2025 में कितने पद हैं और क्यों रोक लगी?
उत्तर: इस भर्ती में लगभग 1,100 पद हैं। तीन विवादित प्रश्नों के उत्तरों को लेकर अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने अंतिम चयन सूची जारी करने और नियुक्तियां देने पर रोक लगा दी है।
प्रश्न: अगली सुनवाई कब होगी?
उत्तर: दोनों मामलों में संबंधित पक्षों को छह सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा गया है। इसके बाद अगली सुनवाई में ही आगे की दिशा तय होगी।
प्रश्न: क्या चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलेगी?
उत्तर: फिलहाल दोनों भर्तियों में नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक है। अदालत के अगले आदेश के बाद ही इस पर कोई स्पष्टता आएगी।
Disclaimer: यह लेख 25 जुलाई 2026 तक उपलब्ध सत्यापित जानकारी पर आधारित है। दोनों मामले अदालत में विचाराधीन हैं, अतः आगे की कार्यवाही के आधार पर स्थिति बदल सकती है।

