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पिता 12वीं पास किसान, मां अनपढ, लेकिन अपनी 3 बेटी और 1 बेटे को बनाया पुलिस, सबके लिए प्रेरणादायक है इस परिवार की कहानी

 
गांव के इस किसान परिवार के 4 बच्चे बने पुलिस कांस्टेबल! जानें क्या है सफलता का मंत्र

हरियाणा के भिवानी जिले के तौशाम तहसील के सण्डवा गांव के एक किसान परिवार ने मिसाल पेश की है। किसान अत्तर सिंह के चार बच्चों ने खाकी वर्दी पहनने का सपना पूरा किया है। तीन बेटियां-बेटे हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ पुलिस में कांस्टेबल हैं, जबकि एक रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में तैनात है।

सण्डवा गांव के किसान परिवार ने कैसे रचा इतिहास?

अत्तर सिंह खेतीबाड़ी करते हैं। वह खुद 12वीं तक पढ़े हैं और उनकी पत्नी राजवंती देवी पढ़ी-लिखी नहीं हैं। इसके बावजूद दोनों ने बच्चों की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। उनके पांच बच्चे हैं - तीन बेटियां और दो बेटे। चार भाई-बहनों ने पुलिस विभाग में नौकरी हासिल की, जबकि पांचवें भाई श्याम सुंदर राजस्थान के सीकर में गणित के शिक्षक हैं।

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कौन कहां है तैनात?

परिवार की सबसे बड़ी बेटी सुदेश ने साल 2010 में चंडीगढ़ पुलिस में कांस्टेबल बनकर परिवार की पहली सरकारी नौकरी हासिल की। उनके पति भारतीय सेना में हैं।

उर्मिला ने कोविड काल के दौरान RPF की भर्ती परीक्षा पास की। वह वर्तमान में अंबाला में तैनात हैं। उनके पति चंडीगढ़ पुलिस में कार्यरत हैं।

मोनिका ने दिल्ली पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2024 पास कर खाकी वर्दी हासिल की।

अंकित परिवार के सबसे छोटे सदस्य हैं। पहले प्रयास में सफल नहीं हुए, लेकिन हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में उनका चयन हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के पद पर हुआ। फिलहाल उनकी तैनाती रोहतक में है।

पहली बार एक साथ वर्दी में आए चारों भाई-बहन

परिवार के पांचवें भाई श्याम सुंदर ने बताया कि मार्च 2026 में घर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में चारों भाई-बहन पहली बार एक साथ खाकी वर्दी पहनकर पहुंचे। यह पल पूरे परिवार और गांव के लिए बेहद खास और यादगार बन गया।

क्या है सफलता का मूल मंत्र?

चारों भाई-बहनों की शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से हुई। कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। उनकी सफलता के पीछे तीन मुख्य बातें हैं - नियमित मेहनत, सही रणनीति और कभी हार न मानने का जज्बा।

अंकित के अनुसार, उनकी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय पिता अत्तर सिंह और मां राजवंती देवी को जाता है। उन्होंने हमेशा बच्चों को मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

यह कहानी साबित करती है कि सफलता के लिए बड़े शहरों में पढ़ाई करना या महंगी कोचिंग लेना जरूरी नहीं है। गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करके भी सरकारी नौकरी हासिल की जा सकती है। जरूरत है तो सिर्फ मेहनत, लगन और सही दिशा में लगातार प्रयास करने की।
 

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