40 लाख का पैकेज, मल्टीनेशनल नौकरी फिर क्यों 30 वर्षीय इंजीनियर शुभम ने जैन संत बनने का लिया फैसला, हैरान कर देगा कारण
जहां आज के दौर में युवा 15 से 20 हजार की नौकरी के लिए दिन रात मेहनत करते है लेकिन फिर भी नौकरी नहीं मिल पाती। ऐसे में पाली के 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर शुभम श्रीश्रीमाल ने लगभग 40 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर संयम जीवन अपनाने का निर्णय ने सबको हैरान कर दिया है। वे 4 सितंबर 2026 को बीकानेर में आचार्य रामलाल म.सा. एवं उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि की निश्रा में जैन भागवती दीक्षा ग्रहण करेंगे। इस निर्णय के बाद परिवार और समाज में भावनात्मक माहौल देखने को मिला।
इंजीनियरिंग से संत बनने तक का सफर कैसे शुरू हुआ?
शुभम श्रीश्रीमाल का जन्म 18 सितंबर 1995 को राजस्थान के ब्यावर में हुआ। उनका परिवार बाद में पाली में बस गया, जहां उनकी शुरुआती पढ़ाई पूरी हुई।
साल 2011 में वे उच्च शिक्षा के लिए कोटा चले गए। इसके बाद 2014 से 2018 तक पंजाब के पटियाला से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक किया।
पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने देश की प्रमुख तकनीकी कंपनियों में काम किया। पेटीएम और मेक माय ट्रिप जैसी कंपनियों में सेवाएं देने के बाद वे एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत रहे। उनका वार्षिक पैकेज करीब 40 लाख रुपये बताया गया है।
परिवार का कारोबार भी सफल, फिर भी चुना संयम का रास्ता
शुभम के पिता प्रदीप श्रीश्रीमाल टेक्सटाइल व्यवसाय से जुड़े हैं। परिवार के अनुसार उनके कारोबार का सालाना टर्नओवर लगभग 8 करोड़ रुपये है।
मां पुष्पा श्रीश्रीमाल गृहिणी हैं। परिवार में बड़े भाई अंकित श्रीश्रीमाल भी हैं। पढ़ाई और नौकरी के कारण शुभम लंबे समय तक घर से बाहर रहे।
आर्थिक रूप से संपन्न परिवार और सफल करियर होने के बावजूद उन्होंने सांसारिक जीवन छोड़ने का निर्णय लिया।
आखिर ऐसा क्या हुआ कि वैराग्य आ गया?
जून 2025 में शुभम ने मुमुक्षुओं के लिए आयोजित एक उन्नयन शिविर में भाग लिया।
इस शिविर के दौरान उन्होंने लगातार 10 दिन तक साधु जीवन का अनुभव किया। संतों के प्रवचन सुने, संयम जीवन की दिनचर्या को नजदीक से समझा और आध्यात्मिक जीवन का अभ्यास किया।
इसी अनुभव ने उनके भीतर वैराग्य का भाव मजबूत किया। उन्होंने महसूस किया कि आध्यात्मिक साधना और मोक्ष की दिशा में संयम का मार्ग अपनाना ही उनके जीवन का उद्देश्य है।
परिवार ने पहले समझाया, फिर बेटे के निर्णय का सम्मान किया
जब शुभम ने परिवार के सामने दीक्षा लेने की इच्छा जताई तो शुरुआत में परिजन हैरान रह गए।
परिवार ने उन्हें समझाने की कोशिश भी की कि अच्छी शिक्षा, सफल करियर और उज्ज्वल भविष्य के बीच ऐसा निर्णय क्यों लिया जा रहा है।
हालांकि शुभम अपने निर्णय पर दृढ़ रहे।
बड़े भाई अंकित के अनुसार, गुरु से दीक्षा की अनुमति पिछले वर्ष नवंबर में मिल चुकी थी। परिवार ने केवल कुछ समय और साथ बिताने के उद्देश्य से अनुज्ञा पत्र देने में देरी की।
बाद में पिता ने सबसे पहले बेटे के निर्णय का समर्थन किया और अंततः पूरे परिवार ने सहमति दे दी।
मां हुईं भावुक, पिता ने समझाया मोक्ष का अर्थ
कार्यक्रम के दौरान मां पुष्पा श्रीश्रीमाल बेटे का जिक्र करते हुए भावुक हो गईं।
वहीं पिता प्रदीप श्रीश्रीमाल ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है। उनके अनुसार मोक्ष का पहला चरण मोह का त्याग है और मोहनीय कर्मों से मुक्त हुए बिना मोक्ष संभव नहीं माना जाता।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में बेटे को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन अंततः मोह छोड़कर उसके निर्णय को स्वीकार कर लिया।
लैपटॉप, कैश और निजी सामान से भी तोड़ा संबंध
दीक्षा से पहले आयोजित कार्यक्रम के दौरान शुभम ने प्रतीकात्मक रूप से अपने लैपटॉप, नकदी और अन्य निजी उपयोग की वस्तुओं का त्याग किया।
जैन परंपरा में दीक्षा से पहले सांसारिक वस्तुओं से विरक्ति का यह महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।
समाज ने भी किया सम्मान
पाली के तिलक नगर स्थित समता भवन में श्री साधुमार्गी जैन संघ की ओर से शुभम श्रीश्रीमाल और उनके परिवार का अभिनंदन किया गया।
इस दौरान समाज के अनेक लोगों ने उनके निर्णय का सम्मान किया और आगामी दीक्षा के लिए शुभकामनाएं दीं।
कब और कहां होगी दीक्षा?
शुभम श्रीश्रीमाल 4 सितंबर 2026 को राजस्थान के बीकानेर में जैन भागवती दीक्षा ग्रहण करेंगे।
दीक्षा समारोह आचार्य रामलाल म.सा. तथा उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि की निश्रा में आयोजित होगा। साधुमार्गी जैन संघ ने भी आगामी दीक्षा कार्यक्रम की आधिकारिक जानकारी जारी की है।
इस घटना की सबसे बड़ी खास बात
आज के दौर में जहां अधिकांश युवा बेहतर पैकेज, करियर ग्रोथ और आर्थिक सफलता को प्राथमिकता देते हैं, वहीं शुभम श्रीश्रीमाल ने स्थिर और उच्च वेतन वाली तकनीकी नौकरी छोड़कर आध्यात्मिक जीवन चुनने का निर्णय लिया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, प्रतिष्ठित कंपनियों में करियर, आर्थिक रूप से संपन्न परिवार और उज्ज्वल पेशेवर भविष्य होने के बावजूद संयम मार्ग अपनाने का उनका फैसला समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है।
