गोगामेड़ी मेला 2026: अगस्त में शुरू होगा मेला, जाने मेले की तैयारी और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के बारे में
हनुमानगढ़/राजस्थान। उत्तर भारत के ऐतिहासिक और आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में से एक गोगामेड़ी मेले की शुरुआत इस साल 28 अगस्त 2026 से हो रही है और 26 सिंतबर 2026 तक चलेगा। यह मेला राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गोगामेड़ी गांव में लोक देवता जाहरवीर गोगाजी की स्मृति में आयोजित किया जाता है।
मेले का मुख्य आकर्षण गोगा नवमी के दिन होता है, जो इस साल 5 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, गोगा नवमी भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी को आती है। हालांकि मुख्य धार्मिक अनुष्ठान नवमी के दिन होते हैं, लेकिन मेले का माहौल करीब एक महीने तक बना रहता है। मेले की शुरुआत पशु मेले से होती है, जिसमें मुख्य रूप से ऊंटों का व्यापार होता है।
गोगामेड़ी मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द का भी प्रतीक है। यहां गोगा जी को हिंदू 'वीर' के रूप में और मुस्लिम 'पीर' के रूप में पूजते हैं। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और हिमाचल प्रदेश से लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं।
इस वर्ष मेले को पिछले वर्षों की तुलना में अधिक भव्य, सुगम और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के लिए प्रशासन ने कई बड़े निर्णय लिए हैं। भादरा विधायक संजीव बेनीवाल की अध्यक्षता में गोगामेड़ी पंचायत भवन में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें नोहर एसडीएम राहुल श्रीवास्तव, भादरा एसडीएम भागीरथ, देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त ओमप्रकाश समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासन का मुख्य ध्यान कानून व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की मूलभूत सुविधाओं पर केंद्रित है। पूरे मेला क्षेत्र, पार्किंग और मंदिर परिसर पर सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी रखी जाएगी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में महिला और पुरुष पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाएगा।
भीषण गर्मी और उमस को देखते हुए पूरे मेला मार्ग पर ठंडे और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाएगी। जगह-जगह अस्थाई चिकित्सा शिविर और चौबीसों घंटे एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध रहेगी। मेले से जुड़ी सभी मुख्य सड़कों की मरम्मत समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यातायात जाम की स्थिति से बचा जा सके।
गौरतलब है कि गोगामेड़ी मेला उत्तर भारत के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक है। यहां ऊंटों, घोड़ों और गाय-भैंसों की भारी खरीद-फरोख्त होती है। मेले में राजस्थानी हस्तशिल्प, आभूषण, मिठाइयों और धार्मिक वस्तुओं की सैकड़ों दुकानें लगती हैं। श्रद्धालु गोगाजी की समाधि पर दूध, मिठाई और मिट्टी या धातु के सांपों की मूर्तियां चढ़ाते हैं।
गोगामेड़ी पहुंचने के लिए हनुमानगढ़ रेल और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। जयपुर या दिल्ली से बस या निजी टैक्सी के जरिए गोगामेड़ी पहुंचा जा सकता है।
