राष्ट्रीय ध्वजा रोहण के साथ होगा गोगामेड़ी मेला का आगाज, जानिए कैसे होता है गोगामेड़ी मेले का विधिवत उद्घाटन
चोपटा प्लस - हरियाणा की सीमा से सटे राजस्थान के सांप्रदायिक एवं सद्भावना के प्रतीक उत्तर भारत के प्रसिद्ध गोगामेड़ी मेले का पुर्णिमा शुक्रवार को विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। इसके साथ ही पशु मेला भी शुरू हो जाएगा।
हनुमानगढ़ में उत्तर भारत के प्रसिद्ध गोगामेड़ी मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। 28 अगस्त से शुरू होने वाले इस मेले में 35 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इन तैयारियों की समीक्षा के लिए गोगामेड़ी स्थित पंचायत भवन में जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव की अध्यक्षता में एक बैठक हुई।

बैठक में भादरा विधायक संजीव बेनीवाल और एसपी बी. आदित्य भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और यातायात सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं की विभागवार समीक्षा की। देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त गौरव सोनी ने मेले की तैयारियों का प्रस्तुतीकरण दिया और पिछली बैठक के निर्देशों की अनुपालना रिपोर्ट पेश की।
255 CCTV कैमरों से रखी जाएगी कड़ी 'नजर'
इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, टेंट, बैरिकेडिंग, मंदिर में भीड़ प्रबंधन, यातायात, पार्किंग, बिजली, पेयजल, सफाई, अपराध नियंत्रण और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। पशु मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं पर भी जानकारी ली गई।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग क्षेत्र के भीतर ही प्रसाद और आवश्यक सामग्री की छह दुकानें लगाई जाएंगी, ताकि कतार में खड़े श्रद्धालुओं को सामान लेने के लिए बाहर न जाना पड़े।

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650 दुकानों का आवंटन किया गया
मेले में कुल 650 दुकानों का आवंटन किया गया है। श्रद्धालुओं के ठहरने और अन्य सुविधाओं के लिए बड़े डोम भी स्थापित किए जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से मेला क्षेत्र में 255 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनसे बैरिकेडिंग मार्ग सहित पूरे क्षेत्र की लगातार निगरानी की जाएगी। आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया जाएगा।

पशु मेला रहेगा आकर्षण का केंद्र
भादो मास में गोगामेड़ी में सिर्फ धार्मिक मेला ही नहीं लगता, बल्कि उत्तर भारत का सबसे बड़ा ऊंट मेला भी यहीं आयोजित होता है। इसमें देशभर से ऊंट व्यापारी, किसान, पशुपालक पहुंचते हैं। राजस्थान सरकार का पशुपालन विभाग इस मेले का आयोजन करता है।
रात्रि में गोगा जी का जागरण होता है, जहां लोक कलाकार भजनों और नृत्य के माध्यम से श्रद्धा को जीवंत कर देते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि गोगा जी की घोट (आत्मा की छाया) उनके शरीर में आती है और वे स्वयं लोहे की जंजीरों से खुद को पीटने लगते हैं।

गोगा जी की समाधि और पूजन विधि
गोगा नवमी के दिन भक्तजन गोरखनाथ धूणा पर माथा टेककर, गोरक्ष गंगा में स्नान कर 3 किलोमीटर लंबी कनक दंडवत यात्रा करते हुए गोगाजी की समाधि पर धोक लगाते हैं।
समाधि पर नारियल, खील-पतासे, नीली ध्वजा, सोने-चांदी के छत्र आदि चढ़ाए जाते हैं। इसके पश्चात श्रद्धालु रानी सीरियल, माता बाछल, नाहर सिंह पांडे, भज्जू कोतवाल, रत्तना हाजी, सबल सिंह बावरी, जीत कौर, श्याम कौर और भाई मदारण की समाधियों पर भी नमन करते हैं।

हर वर्ग की आस्था का प्रतीक है गोगामेड़ी मेला
हिन्दु, मुस्लिम, प्रत्येक वर्ग व धर्म के लोगों की आस्था के प्रतीक उतर भारत के प्रसिद्व मेले गोगामेडी़ में हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, उतरप्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात व हिमाचल प्रदेश से लाखों लोग लोक देवता गोगा जी की समाधि पर धोक लगाने व सजदा करने लगे हैं। गोगा जी को हिन्दू लोग वीर के रूप में तथा मुस्लिम पीर के रूप में पूजते हैं। गोगा जी की समाधि उनके मस्जिदनुमा मंदिर में स्थित है। समाधि पर अश्वारोही गोगा जी की मूर्ति उत्र्कीण है।
गुरू शिष्य परंपरा के अनुसार गोगामेडी़ आने वाले श्रद्धालु पहले गोगाजी के मंदिर से दो किलोमीटर दूर गोगाणा में पवित्र तालाब में स्नान कर गुरू गोरखनाथ के धूणे पर शीश नवातें हैं। बाद में गोगामेड़ी मंदिर में पूजा अर्चना करते है। कई भक्त पैदल व कुछ कनक दण्डवत आते है।

