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12वीं पास दो बहनों ने बदल दी 70 महिलाओं की किस्मत, सिरसा के इस गांव की कहानी कर देगी हैरान!

सिरसा: बैंक सखी निर्मला और सुनीता ने कैसे खड़ा किया महिलाओं का आत्मनिर्भर साम्राज्य? पढ़ें पूरी कहानी
 
 
Women of Shahpuria village Sirsa running self help groups businesses and canteen

हरियाणा के सिरसा जिले का नाथूसरी चोपटा इलाका इन दिनों महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिख रहा है। यहां के शाहपुरिया गांव की महिलाओं ने चूल्हे-चौके से बाहर निकलकर खुद का रोजगार खड़ा कर लिया है। गांव की 70 महिलाएं 10 अलग-अलग स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़कर न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि इलाके के लिए एक मिसाल भी पेश कर रही हैं। इस पूरी क्रांति के पीछे 12वीं पास दो बहनों— सुनीता और निर्मला— की सालों की मेहनत और विजन है।

सुनीता ने जगाई आत्मनिर्भरता की अलख

इस बदलाव की शुरुआत करीब 5 साल पहले हुई थी। शाहपुरिया गांव की बहू सुनीता देवी ने महसूस किया कि गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने महिलाओं को इकट्ठा कर स्वयं सहायता समूह बनाने शुरू किए। शुरुआत में झिझक थी, लेकिन धीरे-धीरे कारवां बनता गया। आज सुनीता की इसी पहल का नतीजा है कि गांव में 10 एक्टिव ग्रुप काम कर रहे हैं।

आईटीआई में चल रही 'अनमोल' कैंटीन

सुनीता की बहन निर्मला देवी भी इस मुहिम में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। गांव में बैंक सखी के तौर पर काम कर रहीं निर्मला ने करीब एक साल पहले 'अनमोल महिला स्वयं सहायता समूह' के तहत नाथूसरी चोपटा की आईटीआई में अपनी कैंटीन शुरू की। आज यह कैंटीन न सिर्फ आईटीआई के छात्रों और स्टाफ को बेहतरीन सुविधाएं दे रही है, बल्कि निर्मला के लिए एक अच्छी कमाई का जरिया भी बन चुकी है।

कोई चला रही दुकान, तो कोई ट्रैक्टर

शाहपुरिया की महिलाओं की सफलता सिर्फ कैंटीन तक सीमित नहीं है। 'एकता ग्रुप' से जुड़ी संतो देवी ने गांव में ही अपने कपड़ों की दुकान खोल ली है। वहीं, सुशीला और सुनीता जैसी महिलाओं ने तो एक कदम और आगे बढ़ाते हुए ग्रुप और बैंक से लोन लेकर सीधा ट्रैक्टर ही खरीद लिया। आज ये महिलाएं ट्रैक्टर के जरिए खेती और ट्रांसपोर्ट से जुड़े काम कर रही हैं और शानदार मुनाफा कमा रही हैं।

सुनीता और निर्मला ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो गांव की चौपाल से निकलकर भी सफलता का आसमान छुआ जा सकता है। इन महिलाओं की कहानी बताती है कि किसी भी बड़े बदलाव के लिए बहुत बड़ी डिग्रियों की नहीं, बल्कि एक मजबूत इरादे की जरूरत होती है।
 

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