6 देसी गायों से शुरू हुआ सफर, आज 60 गायों के दूध से लाखों की कमाई
माखोसरानी के दो किसान भाइयों ने नौकरी के साथ पशुपालन से बदली किस्मत
Dehsi Cow Dairy Business
Sirsa Dairy Success Story
Haryana Farmer Success Story
Dehsi Cow Milk Products
Gaay Palan Business
Vermicompost Business in Haryana
Dairy Farming Success Story Hindi
Dehsi Ghee Business
Gaon ke Kisan ki Safalta Kahani
चोपटा (सिरसा)। हरियाणा के सिरसा जिले के गांव माखोसरानी के दो किसान भाइयों ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही प्लानिंग और मेहनत हो, तो खेती के साथ पशुपालन भी लाखों की कमाई का जरिया बन सकता है। दिनेश कुमार और पवन कुमार पूनिया ने साल 2018 में केवल 5 देसी गायों से अपने डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की थी। आज उनके पास 70 से अधिक देसी गायें हैं और वे देसी दूध से बने उत्पादों व केंचुआ खाद के जरिए अच्छी आमदनी कर रहे हैं।
नौकरी के साथ शुरू किया देसी डेयरी बिजनेस
दिनेश कुमार बीटेक करने के बाद भारतीय वायुसेना (Air Force) में कार्यरत हैं, जबकि पवन कुमार पशुपालन में डिग्री लेकर वेटरनरी सर्जन के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। दोनों भाई नौकरी के साथ-साथ परंपरागत खेती और पशुपालन को भी संभाल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि बढ़ते रासायनिक खाद और मिलावटी खाद्य पदार्थों से परेशान होकर उन्होंने शुद्ध देसी गायों के दूध से उत्पाद तैयार करने का निर्णय लिया।
गोविंदम देसी काऊ फार्म बना पहचान
गांव माखोसरानी में उन्होंने “गोविंदम देसी काऊ फार्म” के नाम से अपना व्यवसाय शुरू किया। यहां साहीवाल, राठी और अन्य देसी नस्ल की गायों का पालन किया जाता है।
देसी गायों के दूध से पनीर, खोया, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, कलाकंद, पेड़े और बिनौला घी पूरी तरह बिना मिलावट तैयार किया जाता है।
लोकल से लेकर दूसरे राज्यों तक डिमांड
दिनेश और पवन कुमार का कहना है कि “लोकल के लिए वोकल” के सिद्धांत पर चलते हुए उन्होंने पहले आसपास के गांवों और सिरसा जिले में बिक्री शुरू की।
आज उनके उत्पादों की मांग दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों तक पहुंच चुकी है। त्योहारों, तीज-त्योहार और दिवाली के समय देसी मिठाइयों और घी की डिमांड कई गुना बढ़ जाती है।
केंचुआ खाद से घटा खर्च, बढ़ी फसल की गुणवत्ता
गायों के गोबर से वे देसी खाद और केंचुआ खाद भी तैयार करते हैं। इससे खेतों में रासायनिक खादों का प्रयोग कम हुआ है और फसलों की गुणवत्ता बेहतर हुई है।
उनका कहना है कि जब खेत में शुद्ध खाद डाली जाती है तो अन्न और चारा दोनों बेहतर पैदा होते हैं, जिससे दूध की गुणवत्ता भी बढ़ती है।
सालाना लाखों की कमाई और 2 लाख से ज्यादा बचत
दोनों भाइयों ने बताया कि इस व्यवसाय से उन्हें हर साल लाखों रुपये की आय हो रही है, जिसमें से करीब 2 लाख रुपये से अधिक की शुद्ध बचत होती है।
सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अब तक सरकार से किसी भी तरह की सब्सिडी या सहायता नहीं ली है।
सरकार से क्या है अपेक्षा
दिनेश और पवन कुमार का कहना है कि सरकार को खेती के साथ-साथ पशुपालन, डेयरी और बागवानी जैसे व्यवसायों के लिए लोन और योजनाओं को सरल बनाना चाहिए।
अगर योजनाएं आसान हों तो गांव का युवा भी खेती और पशुपालन को रोजगार का मजबूत साधन बना सकता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने किसान भाई
सिरसा जिले के माखोसरानी गांव के ये किसान भाई आज उन युवाओं के लिए मिसाल हैं, जो खेती को घाटे का सौदा मानकर गांव छोड़ रहे हैं।
इनकी कहानी बताती है कि नौकरी के साथ भी डेयरी और पशुपालन से सफल व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है।
