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दीपावली क्यों मनाई जाती है? जानिए इस त्योहार का इतिहास, महत्व, 5दिनों की परंपरा और जीवन बदल देने वाली 15खास बातें

 
दीपावली पर जगमगाते मिट्टी के दीपक, रंगोली और रोशनी से सजा घर

Diwali Special 2026: दीपावली सिर्फ दीपक जलाने, मिठाइयां बांटने और नए कपड़े पहनने का त्योहार नहीं है। इसके पीछे भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की कहानी, मां लक्ष्मी की पूजा का महत्व, भारतीय संस्कृति की खूबसूरत परंपराएं और जीवन को बेहतर बनाने वाली कई सीख छिपी हैं। जानिए दीपावली का असली अर्थ, इसे मनाने का कारण, पांच दिनों का महत्व और ऐसी रोचक बातें, जिन्हें जानकर आपका त्योहार और भी खास बन जाएगा।

 🪔 दीपावली: एक ऐसा त्योहार, जो हर दिल में उम्मीद की रोशनी जगाता है

कल्पना कीजिए... शाम का समय है। घर के आंगन में छोटे-छोटे दीपक जगमगा रहे हैं। दरवाजे पर रंगोली सजी है। रसोई से मिठाइयों की खुशबू आ रही है। बच्चे नए कपड़े पहनकर खुश हैं। परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठे हैं और हर तरफ खुशी का माहौल है। यह नजारा किसी एक घर का नहीं, बल्कि पूरे भारत में दीपावली के अवसर पर देखने को मिलता है।

घर के आंगन में जलते मिट्टी के दीपक और सुंदर रंगोली।

दीपावली आते ही जैसे जिंदगी में एक नई रौनक आ जाती है। बाजारों की चमक बढ़ जाती है, घरों की सफाई होने लगती है, पुराने रिश्तों में फिर से अपनापन दिखाई देने लगता है और लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देकर खुशियां बांटते हैं।

लेकिन दीपावली की असली खूबसूरती केवल इन रौनकों में नहीं है। इसकी असली खूबसूरती उस संदेश में है, जो हजारों वर्षों से हमारी संस्कृति का हिस्सा बना हुआ है।

दीपावली हमें सिखाती है कि अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, रोशनी की एक छोटी-सी किरण उसे दूर करने की ताकत रखती है।

यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि जीवन में सच्चाई, प्रेम, ईमानदारी, दया और इंसानियत का महत्व कभी कम नहीं होता। यही वजह है कि दीपावली केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक एकता और सामाजिक भाईचारे का भी प्रतीक है।

आइए, इस खूबसूरत त्योहार को थोड़ा करीब से समझते हैं और जानते हैं कि दीपावली के पीछे कितनी रोचक कहानियां, परंपराएं और जीवन की अनमोल सीख छिपी हुई हैं।

 आखिर क्यों मनाई जाती है दीपावली? भगवान श्रीराम की वापसी से जुड़ी है खास कहानी

दीपावली मनाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध कथा भगवान श्रीराम से जुड़ी हुई है।

मान्यता के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र भगवान श्रीराम को पिता के वचन का पालन करने के लिए 14 वर्ष का वनवास मिला था। इस दौरान माता सीता और भाई लक्ष्मण भी उनके साथ वन गए।

वनवास के समय लंकापति रावण ने माता सीता का हरण कर लिया। इसके बाद भगवान श्रीराम ने हनुमान जी और वानर सेना की सहायता से लंका पहुंचकर रावण का वध किया और माता सीता को उसके चंगुल से मुक्त कराया।

जब 14 वर्ष का वनवास पूरा हुआ और भगवान श्रीराम, माता सीता तथा लक्ष्मण अयोध्या लौटे, तो पूरे नगर में खुशी की लहर दौड़ गई।अयोध्या के लोगों ने अपने प्रिय राजा के स्वागत में घरों, गलियों और रास्तों को दीपों से सजा दिया। पूरा नगर दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। इसी खुशी को दीप जलाकर मनाने की परंपरा से दीपावली को जोड़कर देखा जाता है। इस कहानी में केवल एक राजा की घर वापसी की खुशी नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़ा संदेश भी छिपा है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, हमें अपने कर्तव्य और सच्चाई का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए। वहीं रावण का अंत बताता है कि अहंकार और बुराई का रास्ता आखिरकार विनाश की ओर ले जाता है।

दीपावली शब्द का अर्थ जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान

क्या आपने कभी सोचा है कि दीपावली शब्द का असली अर्थ क्या है?

दीपावली दो शब्दों से मिलकर बना है- 'दीप' और 'आवली'।

 दीप: इसका अर्थ है दीपक या दीया।

आवली: इसका अर्थ है पंक्ति या कतार।

यानी दीपों की कतार को दीपावली कहा जाता है।

लेकिन इस शब्द का भाव केवल दीपक जलाने तक सीमित नहीं है। यह जीवन में ज्ञान की रोशनी फैलाने और अज्ञानता के अंधकार को दूर करने का प्रतीक भी है।

जिस तरह एक छोटा-सा दीपक अंधेरे कमरे को रोशन कर सकता है, उसी तरह एक अच्छा विचार किसी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकता है।

किसी निराश इंसान को हिम्मत देना, किसी जरूरतमंद की मदद करना और किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना भी अपने आप में रोशनी फैलाने जैसा है।

मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है?

दीपावली की शाम घरों और दुकानों में मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा करने की विशेष परंपरा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की देवी माना जाता है। वहीं भगवान गणेश बुद्धि, शुभ शुरुआत और विघ्नों को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं। इसीलिए दीपावली पर दोनों की एक साथ पूजा की जाती है। लोग अपने घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों को साफ-सुथरा करके पूजा की तैयारी करते हैं। दीप जलाए जाते हैं, फूलों से सजावट होती है और परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा करते हैं।लेकिन इस परंपरा के पीछे एक खूबसूरत सीख भी है।जीवन में केवल धन होना ही पर्याप्त नहीं है। धन के साथ अच्छी बुद्धि, सही सोच, संतोष और अच्छे संस्कार भी होने चाहिए।

जिस घर में पैसा तो हो, लेकिन आपसी प्रेम और सम्मान न हो, वहां खुशियों की कमी रह सकती है। इसके विपरीत, जिस घर में परिवार के लोग एक-दूसरे का साथ देते हैं, वहां सीमित साधनों में भी खुशियां मिल सकती हैं।

दीपावली से पहले घरों की सफाई क्यों की जाती है?

दीपावली आने से कई दिन पहले ही घरों में सफाई का काम शुरू हो जाता है। कोई अलमारियां साफ करता है, कोई पुराने सामान को व्यवस्थित करता है, तो कोई घर में रंग-रोगन करवाता है।गांवों में भी दीपावली से पहले घरों के आंगन, चौक और दीवारों की सफाई करने की पुरानी परंपरा रही है। इसके पीछे धार्मिक मान्यता के साथ-साथ व्यावहारिक महत्व भी है। साफ-सुथरा घर रहने के लिए अच्छा वातावरण देता है और दीपावली के बहाने पूरे घर को व्यवस्थित करने का अवसर मिलता है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि घर की सफाई के साथ मन की सफाई करना कितना जरूरी है?

अगर घर चमक रहा हो, लेकिन मन में किसी के प्रति नफरत, ईर्ष्या और गुस्सा भरा हो, तो त्योहार की खुशी अधूरी रह जाती है। इसलिए इस दीपावली पर घर की सफाई के साथ अपने मन से पुरानी नाराजगी और नकारात्मक सोच को भी बाहर निकालने की कोशिश करें।

दीपावली के पांच दिनों का महत्व जानिए

दीपावली का उत्सव केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहता। इसकी खुशियां कई दिनों तक चलती हैं। इस दौरान अलग-अलग पर्व मनाए जाते हैं और हर दिन का अपना विशेष धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्व है।

पहला दिन: धनतेरस

धनतेरस से दीपावली उत्सव की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि और धन के देवता कुबेर की पूजा की परंपरा है। लोग अपनी मान्यता और सामर्थ्य के अनुसार बर्तन, सोना, चांदी या अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदते हैं। यह दिन स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना से भी जुड़ा है।

दूसरा दिन: छोटी दीपावली या नरक चतुर्दशी

इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत से जोड़ा जाता है। कई जगह घरों में दीपक जलाए जाते हैं और दीपावली की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाता है।

तीसरा दिन: मुख्य दीपावली

यह दीपावली का सबसे प्रमुख दिन है। इस दिन लोग घरों और दुकानों को दीपों तथा रोशनी से सजाते हैं। शाम को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। परिवार के लोग एक-दूसरे को मिठाइयां बांटते हैं और शुभकामनाएं देते हैं।

चौथा दिन: गोवर्धन पूजा

दीपावली के अगले दिन कई क्षेत्रों में गोवर्धन पूजा की जाती है। इसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की कथा से है। यह पर्व प्रकृति, गौवंश और अन्न के महत्व का संदेश भी देता है।

पांचवां दिन: भाई दूज

भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी खुशहाली और लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहनों के सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लेते हैं। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम को मजबूत करने का अवसर है।

मिट्टी के छोटे-से दीपक में छिपा है बहुत बड़ा संदेश

आज के समय में बाजार में रंग-बिरंगी लाइटें, बिजली की लड़ियां और सजावट के कई आधुनिक साधन उपलब्ध हैं। इसके बावजूद मिट्टी के दीपक की अपनी अलग पहचान और खूबसूरती है।एक साधारण-सा मिट्टी का दीया हमें अपनी मिट्टी, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ता है।इसे बनाने में कुम्हार परिवारों की मेहनत और हुनर जुड़ा होता है। जब हम स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी के दीपक खरीदते हैं, तो उनके रोजगार और परिवार की आमदनी में भी योगदान देते हैं।मिट्टी के दीपक से हमें एक और अच्छी सीख मिलती है। एक दीपक दूसरे दीपक को जलाता है, लेकिन अपनी रोशनी कम नहीं करता। इंसान को भी ऐसा ही होना चाहिए। किसी दूसरे की सफलता से परेशान होने के बजाय उसकी खुशी में शामिल होना चाहिए। ज्ञान बांटने से ज्ञान कम नहीं होता और खुशियां बांटने से खुशियां घटती नहीं हैं।

दीपावली पर रिश्तों को जोड़ने का मिलता है सबसे अच्छा मौका

आज की जिंदगी में हर व्यक्ति किसी न किसी काम में व्यस्त है। किसी को नौकरी की चिंता है, किसी को कारोबार की, तो कोई पढ़ाई और भविष्य को लेकर परेशान है। कई बार परिवार के लोग एक ही घर में रहते हैं, लेकिन एक-दूसरे के साथ बैठकर बात करने का समय नहीं निकाल पाते। दीपावली हमें यह मौका देती है कि हम कुछ समय के लिए अपनी व्यस्तता से बाहर निकलें और अपनों के साथ खुशियां बांटें। इस अवसर पर रिश्तेदारों और पुराने दोस्तों से मुलाकात होती है। जिन लोगों से लंबे समय से बातचीत नहीं हुई होती, उन्हें भी फोन करके शुभकामनाएं दी जाती हैं। कभी-कभी एक छोटा-सा फोन कॉल, एक प्यारा-सा संदेश या किसी के घर जाकर मिलने भर से रिश्तों की पुरानी दूरी खत्म हो सकती है। इसलिए इस दीपावली पर कोशिश करें कि माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ कुछ अच्छा समय बिताएं।

याद रखिए, महंगे उपहार कुछ समय तक खुशी देते हैं, लेकिन अपनों के साथ बिताए गए पल जिंदगी भर याद रहते हैं।

किसी जरूरतमंद के घर भी खुशियों का दीप जलाएं

दीपावली की खुशी तब और बढ़ जाती है, जब इसमें समाज का हर व्यक्ति शामिल हो। हम अपने घरों में मिठाइयां बनाते हैं, नए कपड़े खरीदते हैं और सजावट पर खर्च करते हैं। लेकिन हमारे आसपास ऐसे परिवार भी होते हैं, जिनके लिए त्योहार पर जरूरी सामान जुटाना मुश्किल होता है। ऐसे में अगर हम अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद की मदद कर सकें, तो उनकी दीपावली भी खुशियों से भर सकती है। आप किसी गरीब बच्चे को कपड़े दे सकते हैं, किसी जरूरतमंद परिवार को मिठाई या राशन दे सकते हैं, किसी बुजुर्ग का हालचाल पूछ सकते हैं या किसी अकेले व्यक्ति के साथ समय बिता सकते हैं। मदद हमेशा पैसों से ही नहीं होती। किसी की बात ध्यान से सुनना, उसे सम्मान देना और मुश्किल समय में उसका साथ देना भी बहुत बड़ी मदद है। इस दीपावली एक संकल्प जरूर लें कि हमारी खुशी के साथ किसी दूसरे के चेहरे पर भी मुस्कान आए।

दीपावली छोटे व्यापारियों और कारीगरों के लिए भी क्यों है खास?

दीपावली के समय बाजारों में अलग ही रौनक दिखाई देती है। कपड़ों की दुकानों से लेकर मिठाई की दुकानों तक ग्राहकों की भीड़ रहती है। इस त्योहार से दुकानदारों, कुम्हारों, हलवाइयों, फूल बेचने वालों, सजावट का सामान बनाने वालों और छोटे कारोबारियों को काम के नए अवसर मिलते हैं। दीपावली पर मिट्टी के दीपक, रंगोली का सामान, मिठाइयां, पूजा सामग्री और उपहार खरीदने से स्थानीय बाजार को भी फायदा पहुंचता है। इसलिए कोशिश करें कि जहां संभव हो, अपने आसपास के छोटे दुकानदारों और स्थानीय कारीगरों से खरीदारी करें।आपकी छोटी-सी खरीदारी किसी दूसरे परिवार की बड़ी खुशी बन सकती है।

पटाखों की जगह खुशियों और सुरक्षित रोशनी को दें महत्व

दीपावली पर आतिशबाजी कई लोगों के उत्साह का हिस्सा रही है। हालांकि, पटाखों से निकलने वाला धुआं और तेज आवाज वातावरण को प्रभावित कर सकते हैं। इससे बच्चों, बुजुर्गों, बीमार लोगों और पशु-पक्षियों को भी परेशानी हो सकती है। इसलिए त्योहार मनाते समय अपनी खुशी के साथ दूसरों की सुविधा का भी ध्यान रखना जरूरी है। घर को मिट्टी के दीपकों, सुंदर रंगोली और आकर्षक सजावट से सजाएं। बच्चों के साथ खेल खेलें, परिवार के साथ मिठाइयां बांटें और यादगार पल बिताएं। यदि आतिशबाजी करते हैं, तो स्थानीय नियमों का पालन करें और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। बच्चों को अकेले पटाखों के पास न जाने दें। आखिर दीपावली का उद्देश्य खुशियां फैलाना है, किसी को परेशानी में डालना नहीं।

त्योहार की मिठाइयों के साथ सेहत का भी रखें ध्यान

दीपावली पर मिठाइयां और पकवान खाने का अपना अलग आनंद है। घरों में गुजिया, लड्डू, कचौरी, नमकीन और कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं। लेकिन त्योहार की खुशी में सेहत को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। मिठाई खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और ताजगी का ध्यान रखें। साफ-सफाई का ध्यान न रखने वाली दुकानों से खाने-पीने की चीजें लेने से बचें। घर में भी भोजन बनाते और परोसते समय स्वच्छता बनाए रखें। बुजुर्गों और बच्चों के खानपान का विशेष ध्यान रखें। याद रखिए, त्योहार का असली आनंद तभी है जब परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ और खुश रहें।

बच्चों को दीपावली से क्या सीखना चाहिए?

बच्चों के लिए दीपावली का मतलब अक्सर नए कपड़े, मिठाइयां, छुट्टियां और सजावट होता है। लेकिन यह त्योहार उन्हें जीवन की अच्छी बातें सिखाने का भी बेहतरीन अवसर है। माता-पिता बच्चों को भगवान श्रीराम की कहानी सुना सकते हैं और बता सकते हैं कि सच्चाई, ईमानदारी और अपने कर्तव्य का पालन करना कितना जरूरी है। बच्चों को घर की सजावट में शामिल करें। उन्हें मिट्टी के दीपक बनाने वाले कारीगरों की मेहनत के बारे में बताएं। जरूरतमंद बच्चों के साथ मिठाई और उपहार बांटने के लिए प्रेरित करें। उन्हें समझाएं कि त्योहार का मतलब केवल खुद खुश होना नहीं, बल्कि दूसरों की खुशी का कारण बनना भी है।

दीपावली पर अपनाएं ये 15 छोटी-छोटी अच्छी आदतें

दीपावली केवल एक दिन की खुशी नहीं, बल्कि जीवन में अच्छे बदलाव लाने का भी अवसर है। इस बार इन बातों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की कोशिश करें।

1. हमेशा सच बोलने और ईमानदारी से काम करने का प्रयास करें।

2. माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करें।

3. परिवार के लोगों के लिए समय जरूर निकालें।

4. किसी जरूरतमंद की अपनी क्षमता के अनुसार मदद करें।

5. पर्यावरण और पशु-पक्षियों का ध्यान रखें।

6. स्थानीय दुकानदारों और कारीगरों को प्रोत्साहित करें।

7. पुराने मतभेद बातचीत से दूर करने की कोशिश करें।

8. बच्चों को अच्छे संस्कार और अपनी संस्कृति की जानकारी दें।

9. अपनी कमाई का कुछ हिस्सा अच्छे कामों में लगाने का प्रयास करें।

10. किसी की सफलता देखकर ईर्ष्या करने के बजाय उससे प्रेरणा लें।

11. अपने आसपास सफाई बनाए रखें।

12. जरूरत से ज्यादा दिखावा और फिजूलखर्ची न करें।

13. रिश्तों में प्यार, सम्मान और विश्वास बनाए रखें।

14. अपनी सेहत और परिवार की खुशियों को प्राथमिकता दें।

15. हर दिन किसी न किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करें।

ये बातें सुनने में छोटी लग सकती हैं, लेकिन अगर इन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में अपना लिया जाए, तो परिवार और समाज दोनों में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

दीपावली हमें जिंदगी की कौन-सी सबसे बड़ी सीख देती है?

जीवन में हर दिन एक जैसा नहीं होता। कभी सफलता मिलती है, तो कभी असफलता का सामना करना पड़ता है। कभी परिवार में खुशियों का माहौल रहता है, तो कभी मुश्किलें भी आती हैं। ऐसे समय में दीपावली हमें उम्मीद का संदेश देती है। यह त्योहार बताता है कि मुश्किल समय हमेशा नहीं रहता। इंसान को मेहनत, धैर्य और अच्छे विचारों के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए। एक दीपक खुद जलकर दूसरों को रोशनी देता है। इसी तरह इंसान को भी अपने ज्ञान, अनुभव और अच्छे व्यवहार से दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए। किसी भूखे को भोजन देना, किसी जरूरतमंद बच्चे की पढ़ाई में मदद करना, किसी बुजुर्ग का सम्मान करना और किसी परेशान व्यक्ति को हिम्मत देना भी जीवन में रोशनी फैलाने के तरीके हैं।इसलिए दीपावली का असली संदेश केवल इतना नहीं है कि हम अपने घर में कितने दीपक जलाते हैं, बल्कि यह भी है कि हम अपने व्यवहार से कितने लोगों के जीवन में खुशियां लाते हैं।

 🌟 इस दीपावली खुद से करें ये 5 खास वादे

इस बार दीपावली पर केवल घर सजाने और खरीदारी करने तक ही अपनी खुशियों को सीमित न रखें। खुद से पांच वादे भी करें।

 किसी का दिल दुखाने से बचेंगे।

 जरूरतमंद की मदद करने से पीछे नहीं हटेंगे।

 अपने माता-पिता और परिवार को पर्याप्त समय देंगे।

 ईमानदारी और मेहनत के रास्ते पर चलेंगे।

 अपने आसपास प्रेम, भाईचारे और खुशियों का माहौल बनाएंगे।

अगर हर व्यक्ति इन पांच बातों को अपने जीवन में उतार ले, तो समाज में बहुत कुछ अच्छा बदल सकता है।

 ❤️ आइए, इस दीपावली केवल घर नहीं, दिल भी रोशन करें

दीपावली हर साल आती है। घर सजते हैं, बाजार चमकते हैं, मिठाइयां बंटती हैं और लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। लेकिन त्योहार की असली सफलता तब है, जब इसकी खुशियां हमारे जीवन में कुछ अच्छा बदलाव भी लेकर आएं। इस बार किसी रूठे हुए अपने को मनाएं। माता-पिता के साथ बैठकर बातें करें। बच्चों को अच्छी सीख दें। जरूरतमंद की मदद करें और अपने आसपास के लोगों के साथ प्रेम से रहें। दीपक की रोशनी कुछ घंटों में कम हो सकती है, लेकिन इंसान के अच्छे कर्मों की रोशनी लंबे समय तक याद रखी जाती है।

याद रखिए, जिस घर में प्रेम है, जहां बड़ों का सम्मान है, जहां छोटों को स्नेह मिलता है और जहां जरूरतमंद के लिए मदद का हाथ उठता है, वहां हर दिन दीपावली है। इसलिए इस बार दीपावली पर अपने घर को तो दीपों से सजाएं ही, अपने दिल में भी प्रेम, दया, इंसानियत और उम्मीद का दीप जलाएं।

आप सभी को दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली बनी रहे।

शुभ दीपावली! आपका घर ही नहीं, आपका पूरा जीवन खुशियों की रोशनी से जगमगाता रहे।

Chopta Plus की ओर से आप सभी पाठकों और उनके परिवारों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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