शक्कर मंदौरी गांव में कपास उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कृषि मेले का आयोजन: 400 किसानों ने लिया भाग.

कॉटन फसल में गुलाबी सुंडी के करण और निवारण की जानकारी विस्तार से दी
 
कृषि अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं व तकनीकों की दी जानकारी

चोपटा। गांव शक्कर मंदौरी में शुक्रवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा  कपास उत्पादन व क्षेत्रफल को बढ़ावा देने के लिए एक दिवसीय किसान मेले का आयोजन किया गया।

इस मेले में सिरसा जिले के अलग-अलग गांवों से आए करीब 400 किसानों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, फसल बीमा, मिट्टी जांच व फसल सुरक्षा उपायों की जानकारी देना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि उप निदेशक सिरसा डॉ. सुखदेव कंबोज ने की। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र सिरसा से कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र जाखड़, डॉ. राकेश कुंट, डॉ. कोमल, डॉ. शैलेन्द्र सहारण, खंड कृषि अधिकारी विजय रंगा, सभी एटीएम व एएस अधिकारी, व आसपास के गांवों के किसान उपस्थित रहे।

कृषि उप निदेशक डॉ. कंबोज ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार व कृषि विभाग किसानों की आय को बढ़ाने, कॉटन की खेती को लाभदायक बनाने और जलवायु अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहा है।

उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे विभागीय योजनाओं का लाभ लें और समय पर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार कपास की खेती करें।


डॉ. देवेंद्र जाखड़ ने मिट्टी जांच की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता को समझे बिना उर्वरक का प्रयोग करना न केवल नुकसानदायक होता है, बल्कि इससे उत्पादन भी प्रभावित होता है। उन्होंने फर्टिलाइज़र के संतुलित उपयोग पर जोर दिया।


डॉ. राकेश कुंट ने कृषि विभाग की वर्तमान योजनाओं व स्कीमों की जानकारी दी जिनमें किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, ड्रिप सिंचाई योजना आदि शामिल हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इन योजनाओं के लिए समय पर आवेदन करें और ऑनलाइन सुविधाओं का लाभ उठाएं।


डॉ. कोमल ने कॉटन फसल में गुलाबी सुंडी की समस्या पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कीट फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाता है और समय पर पहचान कर उसका जैविक व रासायनिक नियंत्रण अति आवश्यक है।

डॉ. शैलेन्द्र सहारण ने 'मेरा पानी मेरी विरासत' योजना व पराली प्रबंधन की तकनीकों के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को समझाया कि पराली जलाने से भूमि की उर्वरता घटती है और पर्यावरण को भी हानि होती है। इसके बजाय पराली के वैज्ञानिक निस्तारण से मिट्टी की संरचना में सुधार लाया जा सकता है।


इस मौके पर बयार कम्पनी से आए डॉ. आशीष प्रधान ने भी किसानों को कृषि यंत्रों व उपकरणों के नवीनतम मॉडलों की जानकारी दी और फसल प्रबंधन के बारे में मार्गदर्शन किया।  गुलाबी सुंडी को खत्म करने के लिए एलडीसी कंपनी से गोविंद ने किसानों को दो-दो फॉरमेन ट्रैप वितरित किए।


कार्यक्रम के अंत में किसानों ने वैज्ञानिकों से कपास की खेती से संबंधित सवाल पूछकर अपनी शंकाओं का समाधान भी प्राप्त किया। किसान मेले को लेकर गांव शक्कर मंदौरी में उत्साह का माहौल रहा। ग्रामीणों ने इस आयोजन के लिए कृषि विभाग का आभार व्यक्त किया।