चोपटा में टूटी बरुवाली नहर, दर्जनों गांवों में पेयजल और सिंचाई संकट
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चोपटा न्यूज । हरियाणा के सिरसा जिले के चोपटा क्षेत्र से गुजरने वाली बरुवाली नहर गांव माखोसरानी के पास अचानक टूट गई। नहर में करीब 20 फीट चोड़ी दरार आ गई। जिससे आस पास के खेतों में पानी बिखर गया । और दर्जनभर गांवों के किसान सिंचाई पानी से वंचित रह गए ।
ग्रामीणों ने बताया की जब विजिट के समय सिंचाई विभाग के अधिकारी आए थे तो उनको किसानों ने बता दिया था की नहर के तटबंध मजबूत नहीं है ओर नहर में पानी आते ही टूट जाएगी लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया ओर पानी आने के मात्र 3 घंटे बाद ही नहर टूट गई ।
वहीं सबसे बड़ी बात यह है कि करीब 1 महीने से पेयजल की किल्लत झेल रहे ग्रामीणों को कोई राहत नहीं मिली । अब नहर को पीछे से बंद करवाया जाएगा और फिर पटरी को बांधा जाएगा। तो इसमें भी करीब तीन से चार दिन का समय लग जाएगा।
कालू राम , मांगेराम, , गुलज़ारी, मोमन राम, भाल सिंह, शुभकरण, राजेंद्र, ओमप्रकाश सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि बरुवाली नहर से जमाल, कुतियाना, बरासरी, रायपुर, रूपावास, ढूकड़ा, गुड़िया खेड़ा सहित कई गांवों में सिंचाई के साथ-साथ पेयजल की व्यवस्था भी इसी नहर के पानी से होती है। आज दोपहर बाद ही नहर में पानी आया था और शाम को अचानक नहर टूट गई सिंचाई व्यवस्था तो दूर अब पेयजल की व्यवस्था भी नहीं हो सकेगी करीब 1 महीने से पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। सरकार और सिंचाई विभाग की लापरवाही की वजह से लोगों को पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ रहा है।
इन्होंने बताया कि इन गांव की डिग्गियां खाली पड़ी है और ग्रामीण नहर आने पर पानी का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन नहर में पानी आते ही टूट गई और पीने के पीने के पानी का प्रबंध करना भी मुश्किल हो गया है। इनका कहना है कि नहर टूटने की सूचना सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दे दी गई है लेकिन अब कब नहर बंधेगी और कब दोबारा पानी आएगा यह तो चिंता का विषय है।
नरमें की बिजाई भी अटकी
माखोसरानी, दड़बा कलां ,रुपाणा खुर्द गांवों के खेतों में पानी से सिंचाई की जाती है। अब नहर टूटने से इन गांवों के पानी की बारी वाले किसानों के खेत बीना सिंचाई के ही रह गए। किसान वेदपाल, राजाराम, सतपाल, रोहतास, राकेश कुमार, का कहना है कि जब भी नहर की से सिंचाई की पानी की बारी आती है तो पीछे नहर टूट जाती है।
नहर टूटने के बाद पीछे से नहर को बंद करवाया जाता है और फिर नहर की पटरी को बांधकर पानी छोड़ा जाता है इस दौरान जिन किसानों के खेतों में सिंचाई के पानी की बारी होती है। वह खेत सूखे ही रह जाते हैं। और अभी तीन दिन तक सिंचाई पानी पूरी तरह बाधित हो गया है। अब नरमे की बिजाई भी मुश्किल हो गई है। किसानों का कहना है कि बार-बार नहर टूटने के कारण फसलों का उत्पादन पर भी विपरित असर पड़ता है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।