15 रुपये के खर्च से 1.5 क्विंटल बढ़ेगी ग्वार की पैदावार, ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव ने किसानों को बताएं टिप्स, आप भी जाने
कृषि विभाग ओढ़ां और ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव ने शनिवार को सिरसा के गांव घुक्कांवाली में प्रशिक्षण शिविर लगाकर किसानों को ग्वार की अच्छी पैदावार के गुर सिखाए। शिविर में 65 से अधिक किसानों को उन्नत किस्मों, सही बिजाई के समय और जड़गलन रोग से बचाव के लिए बीज उपचार की आधुनिक तकनीक की जानकारी दी गई।
मिट्टी की जांच और उन्नत किस्मों का चुनाव
डॉ. बी.डी. यादव ने किसानों को बिजाई से पहले खेत की मिट्टी और पानी की जांच करवाने की सख्त सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस जांच से जमीन में पोषक तत्वों की कमी का सटीक पता चल जाता है और किसान अनावश्यक खाद के खर्च से बच सकते हैं।
ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव ने कहा, "किसान अच्छी पैदावार के लिए उन्नतशील किस्में एचजी 365, एचजी 563 और एचजी 2-20 का ही चुनाव करें, जो 85 से 110 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं।" उन्होंने खेतों में गोबर की सड़ी हुई खाद डालने पर भी विशेष जोर दिया।
जड़गलन रोग से बचाव और बीज उपचार
गोष्ठी के दौरान सामने आया कि सिरसा क्षेत्र में ग्वार की फसल में जड़गलन रोग से किसानों को 40 से 45 प्रतिशत तक का भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इस गंभीर बीमारी की रोकथाम के लिए बीज उपचार सबसे सस्ता और प्रभावी उपाय है, जिसे गरीब किसान भी आसानी से अपना सकता है।
विशेषज्ञों ने प्रति किलो बीज को 3 ग्राम बाविस्टिन (Bavistin) दवा से सूखा उपचारित करने की विधि समझाई। इस प्रक्रिया पर प्रति एकड़ केवल 15 रुपये का खर्च आता है और फसल की पैदावार में एक से डेढ़ क्विंटल तक का सीधा इजाफा होता है।
बिजाई का सही समय और उर्वरक प्रबंधन
किसानों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे मई के महीने में ग्वार की बिजाई बिल्कुल न करें। जिन किसानों के पास अच्छी गुणवत्ता वाले नहरी पानी की सुविधा है, वे जून के पहले पखवाड़े में पलेवा करके बिजाई शुरू कर सकते हैं।
बारिश पर आधारित खेती करने वाले किसानों के लिए जून का दूसरा पखवाड़ा बिजाई के लिए सबसे उत्तम माना गया है। उर्वरक प्रबंधन के लिए बिजाई के समय 100 किलो सिंगल सुपरफास्फेट और 15 किलो यूरिया, या फिर 35 किलो डीएपी प्रति एकड़ डालने की सिफारिश की गई है।
सरकारी योजनाएं और मुफ्त किट वितरण
कृषि विभाग ओढ़ां के एटीएम डॉ. पवन कुमार ने शिविर में मौजूद किसानों को 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कुरुक्षेत्र में होने वाली प्राकृतिक खेती की मुफ्त ट्रेनिंग के बारे में भी विस्तार से बताया।
इस जागरूकता शिविर में मौजूद 65 किसानों को हिन्दुस्तान गम एण्ड कैमिकल्स भिवानी की ओर से बीज उपचार की दवा, मास्क और दस्ताने मुफ्त बांटे गए। गांव के प्रगतिशील किसान अभय सिंह के सहयोग से आयोजित इस गोष्ठी में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के विजेता पांच किसानों को सम्मानित भी किया गया।
कृषि विभाग खरीफ सीजन की बिजाई से पहले ब्लॉक स्तर पर ऐसे और भी तकनीकी शिविर आयोजित करेगा ताकि किसान अपनी आय बढ़ा सकें।