हरियाणा में गन्ना किसानों को अब प्रति एकड़ मिलेगें 5 हजार, मुफ्त मिलेंगे टिश्यू कल्चर पौधे

 

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती से जोड़ने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश के सभी किसानों के नलकूपों के पानी की गुणवत्ता की मुफ्त वैज्ञानिक जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का मकसद किसानों को उनकी जमीन और सिंचाई के पानी के अनुसार सही फसल चयन और उन्नत खेती की सलाह देना है।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को चंडीगढ़ में राज्य सरकार की बजट घोषणाओं, मुख्यमंत्री घोषणाओं तथा संकल्प पत्र-2024 की प्रतिबद्धताओं की समीक्षा के लिए आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की योजनाओं एवं परियोजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार, डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर की प्रधान सचिव अमनीत पी. कुमार, कृषि विभाग के महानिदेशक राजनारायण कौशिक समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

नलकूप के पानी की जांच पूरी तरह निशुल्क

नई व्यवस्था के तहत किसानों को अपने नलकूप के पानी की जांच के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। किसान अपने पानी के नमूने नजदीकी अधिकृत प्रयोगशालाओं में जमा कर सकेंगे, जहां वैज्ञानिक तरीके से पानी की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्बोनेट, बाइकार्बोनेट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम और क्लोराइड सहित पानी के महत्वपूर्ण रासायनिक मापदंडों की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

जांच पूरी होने के बाद किसानों को विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें पानी की गुणवत्ता के साथ-साथ खेती से जुड़ी उपयोगी सलाह भी शामिल होगी। रिपोर्ट में किसानों को बताया जाएगा कि उनके पानी की गुणवत्ता के अनुसार कौन-सी फसलें उपयुक्त हैं, किन फसलों से बचना चाहिए और कौन-से कृषि पद्धतियां अपनानी चाहिए। सरकार का उद्देश्य सिर्फ पानी की गुणवत्ता की रिपोर्ट देना नहीं है, बल्कि 'पानी की रिपोर्ट के आधार पर फसल चयन' की वैज्ञानिक प्रणाली विकसित करना है।

'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल से जुड़ेगी पूरी व्यवस्था

सरकार इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी कर रही है। नलकूप के पानी की जांच रिपोर्ट को 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल से लिंक किया जाएगा। इससे किसानों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। रिपोर्ट तैयार होते ही किसान घर बैठे ऑनलाइन अपनी पानी जांच रिपोर्ट, रिकॉर्ड और कृषि विशेषज्ञों की सलाह देख सकेंगे।

प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बजट 2026-27 में की गई घोषणाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एपीडा (APEDA) द्वारा प्रमाणित किसानों या प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को दी जाने वाली 10,000 रुपये प्रति एकड़ वार्षिक प्रोत्साहन राशि की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए देशी गायों की खरीद पर 30,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता देने के प्रावधान को भी प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही, कृषि विभाग के करीब 800 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की भी योजना है।

गन्ना उत्पादकों को मिलेगी ज्यादा प्रोत्साहन राशि

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने गन्ना उत्पादक किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने अधिक उत्पादन करने वाले किसानों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करने को कहा। गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने चौड़ी कतार (वाइड-रो) में गन्ना बुवाई करने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति एकड़ कर दी है। एकल-आंख विधि से गन्ना बुवाई करने वाले किसानों को भी यही प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

कटाई के लिए आधुनिक मशीनें और टिश्यू कल्चर तकनीक

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को शुगरकेन हार्वेस्टर जैसी आधुनिक कृषि मशीनें उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। सहकारी चीनी मिलें किसानों को हार्वेस्टर मुहैया कराएंगी, जिससे श्रम लागत कम होगी और समय की बचत होगी।

इसके अलावा उन्होंने खेती में टिश्यू कल्चर तकनीक को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों को मुफ्त टिश्यू कल्चर पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।

कपास किसानों को भी मिलेगी राहत

मुख्यमंत्री ने कपास उत्पादक किसानों के लिए बैटरी और ईंधन से चलने वाली कपास तोड़ने वाली मशीनों पर सब्सिडी देने के भी निर्देश दिए। इससे उत्पादन लागत कम होगी और मजदूरों की कमी से जूझ रहे किसानों को राहत मिलेगी।

मिट्टी की सेहत के लिए पीआरओएम को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने विभाग को फास्फोरस युक्त जैविक खाद (पीआरओएम) को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में पहल

सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक जांच, डिजिटल सेवाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों के बेहतर उपयोग से किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ेगा। नलकूप के पानी की वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर किसान सही फसल का चयन कर सकेंगे, जिससे मिट्टी और पानी का बेहतर उपयोग होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य बजट और भाजपा के संकल्प पत्र में की गई सभी कृषि संबंधी प्रतिबद्धताओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाए, ताकि लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे।

FAQs

सवाल: हरियाणा में नलकूप के पानी की जांच के लिए किसानों को क्या करना होगा?
जवाब: किसानों को अपने नलकूप के पानी का नमूना नजदीकी अधिकृत प्रयोगशाला में जमा करना होगा। यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क है। जांच रिपोर्ट 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल पर उपलब्ध होगी।

सवाल: हरियाणा सरकार ने गन्ना किसानों के लिए क्या नई घोषणा की है?
जवाब: सरकार ने चौड़ी कतार में गन्ना बुवाई करने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति एकड़ कर दी है। साथ ही, टिश्यू कल्चर पौधे मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे और हार्वेस्टर मशीनें मुहैया कराई जाएंगी。

सवाल: प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को क्या लाभ मिलेगा?
जवाब: एपीडा द्वारा प्रमाणित किसानों या प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को 10,000 रुपये प्रति एकड़ वार्षिक प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। देशी गाय खरीद पर 30,000 रुपये तक की सहायता भी मिलेगी।