हरियाणा में खाद वितरण का नया सिस्टम, ऐप से बुकिंग और QR कोड से मिलेगी यूरिया, 3 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू
चंडीगढ़। यूरिया और अन्य कृषि खादों की कालाबाजारी रोकने तथा किसानों को लंबी लाइनों से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक नई डिजिटल खाद वितरण प्रणाली (फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल) लागू करने जा रही है। इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट हरियाणा के यमुनानगर, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिलों में शुरू किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत किसानों को खाद खरीदने के लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से अग्रिम बुकिंग करनी होगी और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही उर्वरक का वितरण किया जाएगा।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, किसानों को खाद प्राप्त करने से पहले अपने स्मार्टफोन पर मोबाइल ऐप के जरिए अपनी जमीन और बोई जाने वाली फसल का पूरा विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा। जानकारी अपलोड होते ही सिस्टम द्वारा एक डिजिटल क्यूआर (QR) कोड आधारित टोकन जनरेट किया जाएगा। इस टोकन की मदद से किसान ऐप पर ही यह देख सकेंगे कि उनके आसपास की किस दुकान पर खाद का स्टॉक उपलब्ध है। इससे किसानों को खाद के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान तक भटकने की आवश्यकता नहीं होगी और स्टॉक की रीयल-टाइम जानकारी पारदर्शी होगी।
खाद विक्रेता के पास पहुंचने पर किसान के मोबाइल में मौजूद क्यूआर कोड को पीओएस (POS) मशीन से स्कैन किया जाएगा। इसके बाद आधार कार्ड आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन (अंगूठे का निशान) प्रक्रिया पूरी होने पर ही खाद की तय मात्रा दी जाएगी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए इस 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल' का मुख्य उद्देश्य यूरिया की तस्करी रोकना और वास्तविक किसानों तक सही समय पर खाद पहुंचाना है।
योजना को धरातल पर उतारने से पहले प्रथम चरण में खाद कंपनियों और विक्रेताओं को नई प्रणाली का सघन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दुकानों पर पीओएस मशीनों की उपलब्धता और स्टॉक की ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। विक्रेताओं के बाद ग्रामीण स्तर पर विशेष अभियान चलाकर किसानों को भी इस डिजिटल प्रणाली के उपयोग के प्रति जागरूक किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इस व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा।
तकनीकी बदलाव के कारण इस योजना में कुछ प्रारंभिक चुनौतियां भी संभावित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कम पढ़े-लिखे या बुजुर्ग किसानों को स्मार्टफोन और ऐप चलाने में कठिनाई आ सकती है। इसके अतिरिक्त, धान और गेहूं की बिजाई के पीक सीजन के दौरान एक साथ लाखों उपयोगकर्ताओं के ऐप पर आने से सर्वर डाउन होने की आशंका बनी रहेगी।
खेतों में काम करने वाले कई किसानों के अंगूठों के निशान घिस जाने के कारण बायोमेट्रिक सत्यापन में भी बाधा आ सकती है। इन तकनीकी समस्याओं के समाधान के रूप में कृषि विभाग ने तय किया है कि यदि क्यूआर कोड स्कैन नहीं होता है या अंगूठा मैच नहीं करता, तो किसान अपनी वोटर आईडी, आधार नंबर या एप्लिकेशन नंबर के जरिए भी प्रमाणीकरण कर खाद प्राप्त कर सकेंगे।
कृषि विभाग के उप निदेशक आदित्य प्रताप डबास के अनुसार, नई योजना को लेकर विभागीय स्तर पर बैठकों का दौर जारी है। उच्चाधिकारियों से विस्तृत दिशा-निर्देश (गाइडलाइन) प्राप्त होते ही आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह नई और पारदर्शी व्यवस्था किसानों के लिए खाद प्राप्ति को पहले से कहीं अधिक सुगम और सुरक्षित बनाएगी।
नई डिजिटल प्रणाली से खाद प्राप्त करने की प्रक्रिया:
- किसान को सबसे पहले विभागीय मोबाइल ऐप डाउनलोड कर अपना पंजीकरण करना होगा।
- ऐप में अपनी कृषि भूमि का रकबा और बोई जाने वाली फसल का विवरण दर्ज करना होगा।
- जानकारी सबमिट करते ही ऐप पर एक क्यूआर कोड (टोकन) और निकटतम खाद विक्रेता की लोकेशन दिखाई देगी।
- खाद विक्रेता की दुकान पर जाकर यह क्यूआर कोड पीओएस मशीन में स्कैन करवाना होगा।
- बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाकर सत्यापन पूरा होने के बाद खाद प्राप्त होगी।
- फिंगरप्रिंट या स्कैनर में तकनीकी दिक्कत होने पर किसान आईडी या आधार नंबर बताकर भी खाद ले सकेंगे।