सिरसा में यूरिया की कालाबाजारी का भंडाफोड़, 45 किलो की खाद 50 किलो के गट्टों में भरकर राजस्थान में कर रहे थे सप्लाई
सिरसा। सिरसा के भंबूर गांव के समीप एक भैंसों के नोहरे (तबेले) में किसानों के हिस्से की सब्सिडी वाली कृषि यूरिया को औद्योगिक (Technical Grade) इस्तेमाल का बताकर राजस्थान सप्लाई करने के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। भारतीय किसान एकता (बीकेई) की गुप्त सूचना के आधार पर कृषि विभाग, पुलिस और आबकारी एवं कराधान (जीएसटी) विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर एक बड़े कंटेनर को यूरिया से भरे सफेद गट्टों के साथ रंगे हाथों पकड़ा है।
इस कालाबाजारी का सीधा असर उन स्थानीय किसानों पर पड़ रहा था, जिन्हें बिजाई के समय पर यूरिया की भारी किल्लत का सामना करना पड़ता है।
बीकेई अध्यक्ष लखविंद्र सिंह औलख की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, गिरोह के मुख्य आरोपी हिमांशु उर्फ मासूम (पुत्र पवन गर्ग) और उसके साथी किसानों को मिलने वाली 45 किलोग्राम पैकिंग की सब्सिडी वाली यूरिया को अवैध रूप से 50 किलो के सादे सफेद गट्टों में पलट रहे थे। इन नए गट्टों पर तकनीकी ग्रेड का मार्का लगाकर उन्हें राजस्थान नंबर के एक बड़े कंटेनर (आरजे 18जीबी 7384) में लोड किया जा रहा था।
सूचना की पुष्टि होने पर बीकेई प्रदेश महासचिव अंग्रेज सिंह कोटली और राज्य कार्यकारिणी सदस्य गुरपिंदर सिंह काहलों ने मौके पर पहुंचकर उप कृषि निदेशक सुखदेव सिंह को मामले की जानकारी दी और पुलिस हेल्पलाइन 112 पर शिकायत दर्ज करवाई।
शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन त्वरित हरकत में आया। मौके पर आईपीएस अधिकारी शिवम, सब-इंस्पेक्टर सत्यवान, कृषि विभाग के गुण नियंत्रण निरीक्षक अमित कुमार, विषय विशेषज्ञ राकेश कुंट, सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी विजेंद्र चौहान और जीएसटी विभाग के ईटीओ सुरेंद्र गोदारा दल-बल के साथ पहुंचे। संयुक्त टीम ने अवैध रूप से लोड की जा रही यूरिया को तुरंत अपने कब्जे में ले लिया। उर्वरक नियंत्रण आदेश और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए कंटेनर को सीज कर सदर थाना भेज दिया गया है।
विभागीय जांच में सामने आया कि जो यूरिया गट्टों में पलटी जा रही थी, वह कृभको (KRIBHCO) कंपनी की मई 2026 में निर्मित खेप थी, जिसका एमआरपी 266.50 रुपये (प्रति 45 किलो) है। कालाबाजारी करने वाले इस सब्सिडी वाली खेप को सतनाम ट्रेडर्स, कांडा कॉलोनी (रानिया रोड, सिरसा) के नाम से काटे गए फर्जी बिल नंबर एसटी-07 (दिनांक 30 जून 2026) और ई-वे बिल नंबर 3522 6186 8360 के जरिए चौहान इनोवेशन, सरस्वती एनक्लेव कंसुआ (कोटा, राजस्थान) भेज रहे थे। एडवांस तारीख का यह फर्जी बिल गिरोह की सुनियोजित साजिश को स्पष्ट करता है।
इस पूरे गोरखधंधे में केवल किसानों की यूरिया ही नहीं लूटी जा रही थी, बल्कि सरकार को राजस्व (GST) का भी भारी चूना लगाया जा रहा था। कृषि कार्य के लिए इस्तेमाल होने वाली यूरिया पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है, जबकि औद्योगिक उपयोग वाले तकनीकी ग्रेड यूरिया पर 18 प्रतिशत जीएसटी देय है। बीकेई ने जिला प्रशासन और हरियाणा सरकार से मांग की है कि इस पूरे नेटवर्क की गहनता से जांच कर मुख्य सरगनाओं पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि राज्य का यूरिया दूसरे राज्यों की फैक्ट्रियों में ब्लैक होने से रुक सके।