गांव रूपाना खुर्द के प्रगतिशील किसान सुरेंद्र कुमार को समेकित कृषि प्रणाली के लिए कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किया सम्मानित 

Integrated Agriculture System
 

नाथूसरी चोपटा/सिरसा। हरियाणा के सिरसा जिले के चौपटा क्षेत्र के गांव रूपाना खुर्द के प्रगतिशील किसान सुरेंद्र कुमार पुत्र देवीलाल को दो दिवसीय कृषि विकास मेले में समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Agriculture System) के लिए सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर सुरेंद्र कुमार ने कहा कि यह उनके जीवन का अत्यंत गर्व और खुशी का क्षण है, जिसने उनकी वर्षों की मेहनत को नई पहचान दी है।

यह दो दिवसीय कृषि विकास मेला चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेशभर से प्रगतिशील किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भाग लिया। मेले का उद्देश्य किसानों को आधुनिक, टिकाऊ और लाभकारी खेती के तौर-तरीकों से अवगत कराना था।

मुख्यमंत्री का संदेश: ज़हर-मुक्त खेती की ओर बढ़ें किसान

मेले के उद्घाटन अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में किसानों से अपील की कि वे ज़हर-मुक्त और प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक गाय के गोबर की खाद तथा केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) का उपयोग करना चाहिए। इससे न केवल भूमि की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

सुरेंद्र कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के ये शब्द उनके लिए प्रेरणा स्रोत हैं और वे पहले से ही प्राकृतिक खेती और जैविक संसाधनों के प्रयोग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

कृषि विभाग और वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी

सुरेंद्र कुमार ने हरियाणा कृषि विभाग तथा Krishi Vigyan Kendra Sirsa का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन, विशेषकर डॉ. देवेंद्र झाखड़ के सहयोग से उन्हें नई तकनीकों को अपनाने और प्रयोग करने का अवसर मिला। इसी मार्गदर्शन ने एक छोटे किसान को “प्रगतिशील किसान” के रूप में पहचान दिलाई।

विश्वविद्यालय के कुलपति बी. आर. कम्बोज ने भी सुरेंद्र कुमार को बधाई देते हुए कहा कि उनका कार्य अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक है। कुलपति के इन शब्दों ने सुरेंद्र कुमार का उत्साह और बढ़ा दिया।

समेकित कृषि प्रणाली: आय का बहुआयामी मॉडल

सुरेंद्र कुमार पिछले कई वर्षों से समेकित कृषि प्रणाली के तहत विभिन्न गतिविधियों को एक साथ जोड़कर कार्य कर रहे हैं। उनके फार्म पर—

डेयरी फार्मिंग (विशेष रूप से साहीवाल नस्ल)

बकरी पालन

केंचुआ खाद उत्पादन (Eisenia fetida प्रजाति)

फ्री रेंज पोल्ट्री फार्मिंग (कड़कनाथ नस्ल)

प्राकृतिक खेती

का सफल संचालन किया जा रहा है। इन सभी गतिविधियों को आपस में जोड़कर उन्होंने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसमें एक इकाई का अपशिष्ट दूसरी इकाई के लिए संसाधन बन जाता है। उदाहरण के तौर पर गायों का गोबर वर्मी कम्पोस्ट के लिए उपयोग होता है और वही खाद खेतों में प्रयोग की जाती है।

चार गायों से शुरू हुआ सफर, आज 35 गोवंश का मालिक

सुरेंद्र कुमार, जिन्हें स्थानीय स्तर पर सुरेंद्र सुथार के नाम से भी जाना जाता है, ने एमसीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में समय गंवाने के बजाय स्वरोजगार को चुना। अपने भाई कलमेंद्र सुथार के साथ मिलकर उन्होंने पांच वर्ष पहले चार देसी नस्ल की गायों से दूध बेचने का कार्य शुरू किया।

धीरे-धीरे मेहनत और लगन से उन्होंने अपने पशुधन को बढ़ाया। आज उनके पास कुल 35 गोवंश हैं, जिनमें 15 दुधारू गायें शामिल हैं। साहीवाल, राठी, थारपारकर और हरियाणवी नस्ल की गायों से प्रतिमाह लगभग ढाई लाख रुपये से अधिक की आय हो रही है। 

इसके अतिरिक्त गोबर की खाद बेचकर लगभग डेढ़ लाख रुपये सालाना की आमदनी होती है। पिछले वर्ष उन्होंने 20 बेड पर वर्मी कम्पोस्ट यूनिट शुरू की, जिससे   प्रति माह की अतिरिक्त आय होने लगी है।

बिना सरकारी सहायता के शुरू किया व्यवसाय

सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने शुरुआत अपने स्वयं के संसाधनों से की। बाद में पशुपालन विभाग से बिना ब्याज के ऋण प्राप्त किया, जिससे विस्तार में सहायता मिली। उनका कहना है कि खेती में कभी टिड्डी दल का हमला, कभी सूखा या ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाएं आय को प्रभावित करती हैं, लेकिन पशुपालन और समेकित कृषि प्रणाली से आय का संतुलन बना रहता है।

वे वर्तमान में एक निजी स्कूल में अध्यापन कार्य भी कर रहे हैं और युवाओं को स्वरोजगार की प्रेरणा दे रहे हैं।

युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत

सुरेंद्र कुमार का मानना है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद केवल सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा करने के बजाय युवाओं को कृषि आधारित व्यवसाय की ओर भी ध्यान देना चाहिए। उनके मॉडल को देखकर क्षेत्र के कई युवाओं ने भी दूध उत्पादन और पशुपालन का कार्य शुरू किया है, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है।

उन्होंने कहा कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ डेयरी, बकरी पालन और जैविक खाद उत्पादन को जोड़ लें तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

देसी नस्ल संरक्षण पर दिया जोर

सुरेंद्र कुमार ने सरकार से मांग की कि देसी गायों की नस्ल सुधार और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गायों को लावारिस न छोड़ें। उचित देखभाल और प्रबंधन से दूध उत्पादन और गोबर आधारित उत्पादों के जरिए अच्छा व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चोपटा क्षेत्र में दूध भंडारण की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए और पशुओं के लिए शेड निर्माण हेतु सरल प्रक्रिया से अनुदान या ऋण उपलब्ध कराया जाए, ताकि पशुओं को गर्मी और सर्दी से बचाया जा सके।

सम्मान नहीं, जिम्मेदारी है

सुरेंद्र कुमार का कहना है कि यह सम्मान उनके लिए केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। वे भविष्य में भी समेकित कृषि प्रणाली में नए-नए प्रयोग जोड़ते रहेंगे और अन्य किसानों को प्रशिक्षण देकर इस मॉडल को आगे बढ़ाएंगे।

गांव रूपाना खुर्द के इस प्रगतिशील किसान ने यह साबित कर दिया है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और बहुआयामी सोच के साथ खेती करें, तो कृषि केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि सम्मान और समृद्धि का मार्ग भी बन सकती है।