Ganga Dussehra 2025 : जानें कब हैं , गंगा दशहरा, इन 5 चीजों का दान करके आप पा सकते महापुण्य।
इस दान से जीवन में धन, अन्न, आरोग्य और संतोष प्राप्त होता है।
Chopta plus: गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान और जप-तप करने से पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यदि आप इस पावन अवसर पर गरीबों और जरूरतमंदों को रोजाना की जरूरत से जुड़ी कुछ विशेष चीजों का दान करते हैं, तो आपको दस पापों से छुटकारा मिलता है और महापुण्य की प्राप्ति हो सकती है। गंगा दशहरे का दान शास्त्रों में महादान माना गया है। इस दिन दिया गया दान आपके लिए स्वर्ग के रास्ते खोलता है। तो आइए जानते हैं गंगा दशहरे पर किन चीजों का दान करने से आपको लाभ होगा।
गंगा दशहरा का पर्व हिंदू धर्म में दान पुण्य करने के लिए बहुत खास माना जाता है। इस दिन गरीब लोगों को दान करने का महत्व शास्त्रों में बहुत खास माना गया है। इस दिन का किया गया दान आपको महापुण्य की प्राप्ति करवाता है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है।
मान्यता है कि इस दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण पापों के विनाश और जीवों के उद्धार के लिए हुआ था। इसलिए इस दिन यदि आप गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए कुछ खास वस्तुओं का दान करते हैं तो इस पुण्य के प्रताप से आपकी किस्मत भी संवर जाती है और साथ ही आपको महापुण्य की प्राप्ति होती है। तो आइए आपको बताते हैं गंगा दशहरा पर किन 5 चीजों का दान करना होता है सबसे शुभ।
जल से भरे घड़े का दान
गर्मियों की तपन में जब राहगीर या गरीब प्यास से व्याकुल होता है, तब शीतल जल से भरा एक मटका उसके लिए अमृत के समान होता है। गंगा जल को जीवनदायिनी कहा गया है, इसलिए इसका प्रतीक माने जाने वाले घड़े का दान सर्वोच्च पुण्य में गिना जाता है।
गंगा दशहरा के दिन आप मिट्टी या तांबे के मटके में जल भरकर किसी मंदिर, धर्मशाला, चौपाल या किसी जरूरतमंद को दान करें। साथ में तुलसी का पत्ता, इलायची, या मिसरी डालकर शीतल जल को और पवित्र बना सकते हैं। यह दान आपकी आयु, संतति, धन और पुण्य में वृद्धि करता है।
सफेद वस्त्रों का दान
गंगा मइया को श्वेत वस्त्रों में चित्रित किया जाता है क्योंकि वे पवित्रता, शांति और करुणा की देवी हैं। गंगा दशहरा पर सफेद वस्त्रों का दान करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन आता है। गंगा दशहरा पर आप सफेद धोती, साड़ी, कुर्ता-पायजामा, अंगोछा या रुमाल का दान करें।
विशेष रूप से यह दान ब्राह्मणों, साधुओं, वृद्धजनों, जरूरतमंदों या अनाथों को करना चाहिए। यह दान कर्मों की शुद्धि, पितृदोष निवारण और परिवार में शांति हेतु अत्यंत प्रभावी माना गया है। इसको करने से आपको महापुण्य की प्राप्ति होती है।
शरबत, मौसमी फल और खांड का दान
गर्मियों में शरीर की गर्मी को शांत करने वाले पदार्थ जैसे बेल का शरबत, नींबू पानी, ठंडाई, खरबूजा, तरबूज, आम, और खांड आदि का दान करने से ना केवल तन को राहत मिलती है, बल्कि यह मन को भी प्रसन्नता और संतुलन देता है। गंगा दशहरा के अवसर पर आप राहगीरों या मजदूरों के लिए शरबत बनवाकर वितरण कर सकते हैं।
मौसमी फलों के पैकेट बनाकर अनाथालय, वृद्धाश्रम, या गरीब बस्तियों में वितरित करें। खांड और मिसरी का दान शुगर रोग निवारण और पारिवारिक आनंद में वृद्धि करता है। यह दान शरीर की अग्नि को शांत करता है और क्रोध, चिंता, व असंतोष को दूर करता है।
छाता, चप्पल और तौलिया का दान
गंगा दशहरा के पावन मौके पर गर्मी से बचाव करने वाली चीजों का दान करने से आपको बहुत शुभ फलों की प्राप्ति होती है। गर्मियों में धूप, लू और तपन से बचाव के लिए छाता, चप्पल और तौलिया अत्यंत आवश्यक वस्तुएं हैं, जो कई गरीबों की पहुंच से बाहर होती हैं। तो इन वस्तुओं का दान करके आप उनकी जरूरत पूरी कर सकते हैं और ईश्वर का आशीर्वाद पा सकते हैं।
यह दान आपको दुर्घटनाओं से बचाता है, जीवन की कठिनाइयों में रक्षा करता है और धर्म की रक्षा के मार्ग पर ले जाता है। तौलिया शरीर की शुद्धि और गरिमा का प्रतीक है, इसका दान स्वास्थ्य और स्वाभिमान को बढ़ाता है।
सात धान्य और तिल का दान शास्त्रों में कहा गया है, अन्नदानं परं दानं अर्थात अन्नदान सबसे बड़ा दान है। विशेषकर गंगा दशहरे पर सात प्रकार के धान्य जैसे चावल, गेहूं, मूंग, उड़द, मसूर, जौ, और बाजरा तथा तिल का दान करने से 10 प्रकार के पापों का नाश होता है। यह दान गरीबों, ब्राह्मणों, विधवाओं, और भूखे बच्चों को करना सर्वोत्तम होता है।
इस दान से जीवन में धन, अन्न, आरोग्य और संतोष प्राप्त होता है। तिल पापों की शुद्धि का प्रतीक है और इसका दान पितृदोष निवारण में भी सहायक माना गया है।