सावन के महिनें में सुहागिन महिलाओं को क्यों पहननी चाहिए हरी चूड़ियां? जानें धार्मिक, संस्कृति और मानसिक लाभ।
हिंदू धर्म में सावन का महीना विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। यह महिना भगवान शिव और देवी पार्वती की भक्ति, उपासना और पारिवारिक सौभाग्य की कामना का होता है। विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं इस पूरे महीने उपवास, श्रृंगार और पूजन के माध्यम से अपने पति की लंबी उम्र और सुखमय और वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करती हैं।
इन परंपराओं में एक महत्वपूर्ण रस्म है हरी चूड़ियां का पहनना, जो न सिर्फ धार्मिक स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन से भी इसका गहरा संबंध है।
जानें हरी चूड़ियों का धार्मिक महत्व क्या हैं?
देवी पार्वती का प्रिय रंग कौन हैं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरा रंग देवी पार्वती को बहुत ही प्रिय है। सावन में जब स्त्रियां हरी चूड़ियां पहनती हैं, तो वह देवी को प्रसन्न करने के लिए एक माध्यम बनता है। हरी चूड़ियां से उन्हें अखंड सौभाग्य, सुख-शांति और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद भी मिलता है।
सौभाग्य और सुहाग की रक्षा
सावन में हरे रंग की चूड़ियां पहनना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। स्त्रियां जब इन चूड़ियों को पहनती हैं तो यह उनके सुहाग की रक्षा और पारिवारिक सुख की भावना को और मजबूत करता है।
सावन के सोमवार और मंगला गौरी व्रत
सावन के सोमवार भगवान शिव के पूजन के लिए होते हैं, जबकि मंगलवार को महिलाएं मंगला गौरी व्रत करती हैं। इस अवसर पर हरी चूड़ियों का श्रृंगार विशेष महत्व रखता है। यह व्रत और चूड़ियां मिलकर स्त्री के वैवाहिक जीवन को अधिक समर्पित और संकल्पशील बनाती हैं।
हरी चूड़ियों के वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक फायदे क्या हैं ?
मानसिक और भावनात्मक संतुलन
रंग चिकित्सा (Color Therapy) और आयुर्वेद के अनुसार, हरा रंग तनाव को कम करता है और मन को शांत रखता है। यह रंग दिल और भावनाओं से जुड़ा होता है, जो महिलाओं में संतुलन, करुणा और प्रेम की ऊर्जा को बढ़ाता है।
हृदय चक्र को सक्रिय करता है
हरा रंग हमारे शरीर के हृदय चक्र (Heart Chakra) से जुड़ा होता है। इस चक्र का संतुलन प्रेम, करुणा और भावनात्मक स्थिरता का प्रतीक होता है। जब महिलाएं हरी चूड़ियां पहनती हैं, तो यह चक्र सक्रिय होता है और जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
चूड़ियों की खनक से सकारात्मक ऊर्जा
चूड़ियों की खनक केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि ऊर्जा का स्रोत भी है। इसकी ध्वनि शरीर में सकारात्मक कंपन उत्पन्न करती है, जिससे स्त्रियों में आत्मबल, उत्साह और प्रेरणा का संचार होता है।
तनाव और क्रोध में कमी
हरियाली से जुड़ा हरा रंग मन को शीतलता और शांति प्रदान करता है। यह क्रोध, चिड़चिड़ापन और मानसिक बेचैनी को कम करता है। सावन जैसे व्रत-उपासना के माहौल में यह रंग मानसिक स्थिरता बनाए रखने में सहायक होता है।
सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण
सौहार्द और परिवार में प्रेम का संचार
जब महिलाएं हरे रंग की चूड़ियां पहनती हैं, तो घर-परिवार में एक सौहार्दपूर्ण वातावरण बनता है। बच्चे, पति और अन्य परिवारजन भी इसका सकारात्मक प्रभाव महसूस करते हैं। यह एक सांस्कृतिक एकता और सामंजस्य की भावना पैदा करता है।
प्रकृति और हरियाली से जुड़ाव
सावन में जब पूरा वातावरण हरियाली से भर जाता है, तो हरी चूड़ियां पहनना प्रकृति से आत्मिक जुड़ाव की भावना को दर्शाता है। यह पहनावा नवजीवन, उर्वरता और सकारात्मकता का प्रतीक बनता है।
सावन में हरी चूड़ियों को पहनने के 10 मुख्य फायदे (संक्षेप में):
- देवी पार्वती को प्रसन्न करने में सहायक
- पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख की कामना
- सौभाग्य और शुभता का प्रतीक
- तनाव, क्रोध और घबराहट में कमी
- मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन
- हृदय चक्र को सक्रिय करता है
- शरीर में ऊर्जा और सकारात्मक कंपन का संचार
- परिवार में प्रेम और सौहार्द को बढ़ाता है
- हरा रंग जीवन में हरियाली और समृद्धि का प्रतीक
- सावन के व्रतों और पूजा में आध्यात्मिक सहयोगी