हरियाणा में छात्रो को डिग्री के साथ-साथ अब मिलेगा रॉकेट साइंस और ड्रोन टेक्नोलॉजी का ज्ञान
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य के युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान और उभरती आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने छात्रों और शिक्षकों का ‘इंडिया स्पेस लैब-समर इंटर्नशिप एवं टेक्निकल ट्रेनिंग प्रोग्राम-2026’ में पंजीकरण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें। यह पहल युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों को इस संबंध में एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि नई दिल्ली स्थित इंडिया स्पेस लैब द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए एक सुनहरा अवसर है। इसके तहत सभी प्रतिभागियों को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि रॉकेट साइंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट सिस्टम और रिमोट सेंसिंग जैसे अत्याधुनिक विषयों में व्यावहारिक (Practical) प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस समर इंटर्नशिप और ट्रेनिंग प्रोग्राम के दूसरे बैच के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसकी अंतिम तिथि 10 जून 2026 निर्धारित की गई है। नवीनतम जानकारी के अनुसार, इन विशेष कक्षाओं का आयोजन 17 जून से 4 जुलाई 2026 तक किया जाएगा। इस पूरे कार्यक्रम के लिए कुल 2315 सीटें उपलब्ध हैं, जिनमें से 1045 सीटें विशेष रूप से दूसरे बैच के लिए आरक्षित रखी गई हैं।
फीस और खर्च की बात करें तो छात्रों पर कोई भारी आर्थिक बोझ नहीं डाला गया है। इस प्रोग्राम के लिए पंजीकरण शुल्क मात्र 950 रुपये तय किया गया है और इसके अलावा मुख्य ट्रेनिंग के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। राज्य सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि इस कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार विभागीय वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किया जाए ताकि दूर-दराज के युवा भी इसका लाभ उठा सकें।
यह योजना 'विकसित भारत 2047' विजन का एक अहम हिस्सा है, जिसके तहत जमीनी स्तर पर तकनीकी ज्ञान को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पूरी मुहिम का असर स्कूल स्तर पर भी दिखने लगा है। हाल ही में यमुनानगर के 23 सरकारी स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब (ATL) स्थापित की गई हैं, जहां स्कूली बच्चे निजी स्कूलों की तर्ज पर रोबोटिक्स और अंतरिक्ष विज्ञान की बुनियादी बारीकियां सीख रहे हैं।