हरियाणा के निजी स्कूलों में बच्चों के बस्तों का वजन तय, स्कूल की मनमानी पर शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
चंडीगढ़/सिरसा: हरियाणा शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की दोहरी मनमानी पर एक साथ कड़ा प्रहार किया है। शिक्षा विभाग ने पहले भी स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को स्कूल या किसी विशेष दुकान से किताबें, स्टेशनरी या वर्दी खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा, लेकिन नियमों का पालन नहीं हो रहा था। इसलिए अब विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) को कड़ी हिदायत देते हुए कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
नए सत्र में अभिभावकों की लगातार शिकायतें आ रही हैं कि निजी स्कूल संचालक उन पर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें और मनमाने दाम पर वर्दी थोप रहे हैं। रोहतक में तो अभिभावक तीसरी कक्षा की किताबों व स्टेशनरी के लिए 3,500 रुपये तक खर्च करने को मजबूर हो रहे हैं। यमुना नगर में बाजार की तुलना में 5 से 6 गुना महंगी वर्दियां चुनिंदा दुकानों से ही खरीदवाई जा रही हैं, जहां 28 से 32 साइज की सफेद शर्ट जो बाजार में 200 से 250 रुपये में मिलती है, वह निर्धारित दुकानों पर 600 रुपये से भी ऊपर बिक रही है।
RTE 2009 और हरियाणा शिक्षा नियम 2003 की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं निजी स्कूल
शिक्षा विभाग के संज्ञान में आया है कि निजी स्कूल संचालक सरेआम शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 (RTE) और हरियाणा स्कूल शिक्षा नियम-2003 की उल्लंघना कर रहे हैं। कई स्कूल पुरानी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप न होने वाली संदर्भ पुस्तकें भी बच्चों पर थोप रहे हैं, और कुछ स्कूल तो छात्रों को पिछले साल की पुरानी किताबें इस्तेमाल करने से भी मना कर देते हैं, जिससे अभिभावकों पर हर साल नया आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। करनाल में DEO ने स्पष्ट किया कि स्कूलों की ओर से निर्धारित दुकानों से सामान बिकवाने के लिए किसी भी निजी स्कूल के पास कोई अनुमति नहीं है।
शिक्षा विभाग ने यह भी साफ किया है कि कोई भी निजी स्कूल अपने परिसर में वर्दी, टाई, बेल्ट, बैज, जूते या अन्य शैक्षणिक सामग्री की बिक्री से जुड़ी कोई गतिविधि नहीं चला सकता — और यदि ऐसा पाया गया तो उसे सीधे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। हरियाणा के बहादुरगढ़ में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी शेर सिंह ने सभी स्कूल मुखियाओं को निर्देश दिया है कि अभिभावकों को सामग्री खरीदने की पूरी स्वतंत्रता दी जाए।
अभिभावकों को मिलेगी राहत — शिकायत का नंबर जारी, बस्ते का बोझ भी तय
हरियाणा शिक्षा विभाग ने अभिभावकों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर 0172-5049801 जारी किया है, जिस पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। विभाग का मानना है कि कम उम्र में भारी बस्ता बच्चों के शारीरिक विकास पर असर डाल सकता है, इसीलिए बस्ते के वजन की भी सीमा तय की गई है। सिरसा, हिसार और पूरे हरियाणा के अभिभावकों के लिए यह जानकारी बेहद जरूरी है:
| कक्षा | बस्ते का अधिकतम वजन |
|---|---|
| कक्षा 1 व 2 | 1 से 1.5 किलोग्राम |
| कक्षा 3 से 5 | 3 किलोग्राम |
| कक्षा 6-7 | 4 किलोग्राम |
| कक्षा 8-9 | 4.5 किलोग्राम |
| कक्षा 10 | 5 किलोग्राम |
जमीनी हकीकत यह है कि विभागीय दावों के बावजूद कई स्कूलों में खुलेआम अभिभावकों पर दबाव बनाकर स्कूल से ही सामान खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। ऐसे में अगर सिरसा या हरियाणा के किसी भी जिले में आपका बच्चा किसी निजी स्कूल में पढ़ता है और स्कूल आप पर किसी खास दुकान से किताबें या वर्दी खरीदने का दबाव बना रहा है, तो बिना डरे हेल्पलाइन पर शिकायत करें। विभाग ने चेतावनी दी है कि निरीक्षण में नियमों की अनदेखी पाए जाने पर स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।