हरियाणा में गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर शिक्षा विभाग का एक्शन, तुरंत बंद करने के आदेश

हरियाणा शिक्षा विभाग ने प्रदेश भर में चल रहे सभी गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को तत्काल प्रभाव से बंद करने के सख्त आदेश जारी किए हैं। निर्देशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित स्कूलों की पहचान कर उन्हें बंद कराने तथा बंद किए गए स्कूलों की सूची मुख्यालय भेजने को कहा है। यह कार्रवाई राइट टू एजुकेशन (RTE) नियमों का पालन न करने और बिना मान्यता के स्कूल चलाने वालों के खिलाफ की जा रही है।
 

हरियाणा शिक्षा विभाग ने प्रदेश भर में चल रहे सभी गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को तत्काल प्रभाव से बंद करने के सख्त आदेश जारी किए हैं। मौलिक शिक्षा निर्देशालय ने 4 अगस्त 2026 को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) एवं जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) को निर्देश भेजकर कहा है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे समस्त गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ तुरंत कड़ा प्रशासनिक संज्ञान लें और ऐसे सभी विद्यालयों को तत्काल प्रभाव से बंद करवाएं। साथ ही बंद किए गए स्कूलों की सूची निर्देशालय को भिजवाना सुनिश्चित करें।

क्यों जारी किए गए बंद करने के आदेश?

निर्देशालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन स्कूलों के पास मान्यता से संबंधित आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं और जिन्होंने RTE (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम के तहत निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया, उनके खिलाफ यह कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले विभाग द्वारा 20 अप्रैल 2024 को भी आदेश जारी कर 13 स्कूल बंद करने के लिए कहा गया था, लेकिन उस दौरान स्कूलों ने अस्थायी मान्यता प्राप्त कर ली थी। इस बार निर्देशालय ने ऐसे स्कूलों को मान्यता देने से साफ मना कर दिया है।

कितने स्कूल हैं गैर-मान्यता प्राप्त?

शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 22 जिलों में सर्वे कर 687 गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की पहचान की है, जो बिना दस्तावेज के चल रहे थे। इनमें से 413 स्कूलों ने बाद में मान्यता से संबंधित दस्तावेज पूरे कर दिए, लेकिन 600 से अधिक स्कूलों पर कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

इसके अलावा, सरकार ने RTE नियमों का पालन न करने वाले 1107 निजी स्कूलों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इनमें से 693 स्कूल RTE प्रक्रिया के तहत "नॉन-फाइनल" चिह्नित किए गए, 145 स्कूलों का MIS पोर्टल RTE सत्र के दौरान ब्लॉक किया गया, और 269 स्कूलों के आवेदन DEEO द्वारा खारिज कर दिए गए। इन 1107 स्कूलों के MIS पोर्टल पहले ही बंद किए जा चुके हैं।

किन जिलों में होगी कार्रवाई?

निर्देशालय के आदेश के बाद सभी 22 जिलों में कार्रवाई शुरू हो गई है। यमुनानगर जिले में अकेले 50 से अधिक स्कूल बंद होने की संभावना है। फरीदाबाद में भी शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची तैयार करना शुरू कर दिया है। भिवानी जिले में 106 बिना मान्यता वाले स्कूलों की सूची सार्वजनिक की गई है। महेंद्रगढ़-नारनौल में 89 स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी है, जबकि सोनीपत में 45 अवैध स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए गए हैं।

स्कूल संचालकों पर क्या होगी कार्रवाई?

मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं। जिन स्कूलों की प्रवेश स्तर की मासिक फीस 6,000 रुपये तक है, उनके खिलाफ जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी स्वयं कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे। इन स्कूलों पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। 6,000 रुपये से अधिक फीस वाले स्कूलों पर कार्रवाई निर्देशालय स्तर पर की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों का जवाब देने का समय दिया जाएगा, जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।

अभिभावकों के लिए सलाह

शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों का दाखिला कराने से पहले संबंधित स्कूल की मान्यता की जांच अवश्य कर लें। ऐसा न करने पर भविष्य में स्कूल बंद होने की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। अभिभावक स्कूल की मान्यता की जानकारी शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.harprathmik.gov.in पर प्राप्त कर सकते हैं।

निजी स्कूल संघ ने जताया विरोध

हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने विभाग के इस कदम पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग ने RTE के तहत पढ़ाने वाले बच्चों के लिए स्कूलों को प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट) नहीं दी है, फिर भी जुर्माना लगाने की बात कर रहा है। उन्होंने मांग की है कि विभाग लंबित बकाया राशि को साफ करे और तकनीकी कारणों से सीटें न दे पाने वाले स्कूलों को राहत दे।

RTE अधिनियम क्या है?

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act-2009) देश के प्रत्येक 6 से 14 वर्ष के बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है। इस कानून की धारा 12(1)(c) के अनुसार, निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों को प्रवेश स्तर की कक्षा में कम से कम 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं। इन बच्चों की फीस का भुगतान सरकार करती है।